जानिए भारत में कब सही और कब गलत साबित हुए EXIT POLL - CARE OF MEDIA

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Monday, May 20, 2019

जानिए भारत में कब सही और कब गलत साबित हुए EXIT POLL


रविवार को आए ज्यादातर एग्जिट पोल्स में के मुताबिक उम्मीद की जा रही है कि बीजेपी के नेतृत्व वाली एनडीए 2019 के लोकसभा चुनाव में 336 सीटें जीत सकती है। लगभग सभी एग्जिट पोल्‍स का अनुमान एक जैसा है। यूपीए को पिछली बार से दोगुनी सीटें मिलने के आसार हैं। 5 एग्जिट पोल्स में कहा गया है कि एनडीए को 300 से ज्यादा सीटें मिल सकती हैं। 10 एग्जिट पोल्स में एनडीए को दी गई सीटों का औसत 304 आता है। वहीं, यूपीए को दी गई सीटों का औसत 119 है। 2014 में एनडीए को 336, यूपीए को 60 और अन्य को 147 सीटें मिली थीं। हालांकि, असल परिणाम तो 23 मई को ही सामना आएगा। हम बताएंगे कि कब कब सटीक साबित हुए एग्जिट पोल्‍स के आंकड़ें?

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भारत में इसकी शुरुआत 1960 में हुई थी


वैसे तो दुनिया में ओपिनियन पोल का चलन 1940 में शुरू हुआ था, लेकिन भारत में इसकी शुरुआत 1960 में हुई थी। सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसायटीज (CSDS) ने इसकी शुरुआत की थी। जबकि इसे 1980 में जमीनी स्‍तर पर उतारने की कोशिश की गई थी। उस वक्‍त के पत्रकार प्रणव रॉय ने मतदाताओं की नब्‍ज को टटोलने के लिए एक सर्वे किया था। इसी को देश में एग्जिट पोल की शुरुआत कहा जाता है।

सटीक एग्जिट पोल


लोकसभा चुनाव 1996 में सीएसडीएस के एग्जिट पोल ने खंडित जनादेश के संकेत दिए थे। जब चुनाव के परिणाम आए तो ये एकदम सटीक पाए गए। ये वही चुनाव था जिसमें बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। हालांकि उस दौरान वे बहुमत से दूर थी। उस समय अटल बिहारी वाजपेयी ने सरकार बनाई थी, लेकिन उनकी सरकार 13 दिन में ही गिर गई थी। इसके बाद एचडी देवेगौड़ा और इंद्र कुमार गुजराल ने मिलकर यूपीए की सरकार बनाई थी।

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1998 के एग्जिट पोल


90 के दशक में टीवी का चलन बढ़ने लगा था। उस दौरान एग्जिट पोल भी लोकप्रिय होने लगा था। 1998 के लोकसभा चुनाव में लगभग हर न्‍यूज चैनल ने एग्जिट पोल किए थे। उस समय के चुनाव में देश के चार सबसे बड़े चुनावी सर्वे ने एनडीए सरकार को सबसे बड़ी पार्टी बताया था। फिर भी एनडीए को बहुमत से दूर दिखाया गया था। उस समय के एग्जिट पोल में एनडीए को 214-249 के बीच सीटें और यूपीए को 145-164 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया था। इस चुनाव में एनडीए 252 और कांग्रेस ने 166 सीटें जीती थी।

1999 के एग्जिट पोल


जब 1999 में लोकसभा चुनाव हुए तो लगभग सभी बड़े सर्वे में एनडीए को 300 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया था। नतीजों में एनडीए ने 296 सीटें हासिल हुई थी। जबकि यूपीए 134 सीटों पर सिमट गई थी। उस दौरान एग्जिट पोल्‍स में यूपीए और एनडीए के सीटों का अनुमान तो सटीक रहा, लेकिन तीसरे पार्टी के मामले में एग्जिट पोल्‍स फेल हो गए। उस समय तीसरे नंबर की पार्टी को 34-95 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया था, लेकिन तीसरे नंबर की पार्टी को 113 सीटें मिली थी।

जब फेल हुए एग्जिट पोल्‍स


एग्जिट पोल्‍स के हिसाब से 2004 का चुनाव सबसे ज्‍यादा निराश करने वाला था। इस चुनाव में सभी एग्जिट पोल्‍स धराशाही हो गए थे। सभी पोल्‍स में एनडीए को बहुमत मिलने का अनुमान लगाया था। लेकिन जब रिजल्‍ट आया जो एनडीए 200 का आंकड़ा भी नहीं छू पाई। 1999 में कारगिल युद्ध जीतने के बाद भी एनडीए को केवल 189 सीटों से ही संतोष करना पड़ा। इस चुनाव में यूपीए को 222 सीटें मिली थी और उसने सपा और बसपा के समर्थन से सरकार बना ली थी।

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2009 के चुनाव में भी फेल साबित हुए एग्जिट पोल्‍स


2009 के लोकसभा चुनाव में भी एग्जिट पोल्‍स के अनुमान फेल साबित हुए थे। इस चुनाव में यूपीए और एनडीए के बीच कड़ी टक्‍कर बताया गया था। अनुमान था कि यूपीए को 199 और एनडीए को 197 सीटें मिलेंगी। लेकिन रिजल्‍ट इसके एकदम उलट रहा। यूपीए जबरदस्‍त बढ़त के साथ जादुई आंकड़े से महज कुछ सीटें ही दूर थी। यूपीए ने 262 सीटों पर जीत हासिल की थी। एनडीए को 159 सीटें मिली थी।

2014 के लोकसभा चुनाव में सटीक अनुमान, चली मोदी लहर


2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान लगभग सभी एग्जिट पोल्‍स में मोदी लहर बताया गया था। लगभग सभी ने बीजेपी नीत एनडीए सरकार बनने की बात कही थी। जब चुनाव के परिणाम आए तो बीजेपी को 282 और एनडीए को 336 सीटें मिलीं। जबकि यूपीए महज 59 सीटों पर सिमट कर रह गई थी। जिसमें से कांग्रेस को 44 सीटें मिली थीं।

मतदान खत्म होने के पहले क्यों नहीं दिखा सकते?


आरपी एक्ट, 1951 का सेक्शन 126 मतदान के पहले एग्जिट पोल सार्वजनिक करने की अनुमति नहीं देता। अंतिम चरण में वोटिंग पूरी होने के आधे घंटे तक एग्जिट पोल शुरू नहीं किए जा सकते। यह पाबंदी प्रकाशन, प्रसारण सभी पर होती है।

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