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Thursday, June 13, 2019

ट्रेन में मसाज सेवा का बीजेपी सांसद ने किया विरोध


नई दिल्ली। ट्रेन में यात्रा के दौरान यात्रियों को मालिश सेवाएं प्रदान करने की भारतीय रेलवे की योजना आलोचनाओं के घेरे में आ गई है। इंदौर के सांसद शंकर लालवानी ने केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल को पत्र लिखकर कहा कि महिलाओं की उपस्थिति में ऐसी सेवाओं की पेशकश करना भारतीय संस्कृति के खिलाफ है।

रेलवे के एक अधिकारी ने 8 जून को कहा था कि रेलवे अगले कुछ हफ्तों में इंदौर से चलने वाली 39 रेलगाड़ियों में सफर के दौरान यात्रियों को मालिश की सुविधा देकर अतिरिक्त राजस्व कमाने की रेलवे की नवाचारी योजना शुरू करने वाली है। पीयूष गोयल को लिखा गया पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

उन्होंने कहा, 'मुझे आश्चर्य है कि चलती रेलगाड़ियों में अन्य यात्रियों, विशेषकर महिलाओं के समक्ष इस प्रकार की (मालिश) सुविधा उपलब्ध कराना क्या भारतीय संस्कृति के मानकों के अनुरूप प्रतीत होगा? रेल यात्रियों को मेडिकल सुविधा और डॉक्टरों की उपलब्धता जैसी आवश्यक सुविधाएं देने के स्थान पर इस तरह की स्तरहीन व्यवस्थाओं का मेरे मत में कोई औचित्य प्रतीत नहीं होता है।

इस सेवा से रेलवे के खजाने में सालाना 20 लाख रुपये जमा होने की उम्मीद है। चलती ट्रेन में यात्रियों को यह सेवा प्रदान करने वाले लोगों को रेलवे अनुमानित तौर पर करीब 20,000 यात्रा टिकट बेचेगा जिससे उसे हर साल लगभग 90 लाख रुपये की अतिरिक्त कमाई होगी।

उन्होंने कहा कि, लोगों का मानना है कि रेलवे को यात्रियों के लिये नयी चिकित्सा सुविधाएं शुरू करने को प्राथमिकता देनी चाहिये। इस सेवा को पर्यटक ट्रेनों जैसे शताब्दी और राजधानी ट्रेनों में शुरू किया जाना चाहिए, लेकिन यात्री ट्रेनों में नहीं, जैसा कि योजना बनाई जा रही है। यात्री ट्रेनों में कौन मालिश करता है? वे गरीब लोग होते हैं और यात्रा तीन से चार घंटे तक चलती है। वहां मालिश की जरूरत किसे है? मुझे लगता है कि यह पूरी तरह से अनावश्यक है।

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