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Friday, June 14, 2019

इमरान खान की चालबाजियों से नरेन्द्र मोदी को सावधान रहना चाहिए


एसपी मित्तल
14 जून को न्यूज चैनलों में प्रसारित होता रहा कि अब भारत से बातचीत करने के लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान गिड़गिड़ा रहे हैं। कभी रूसी न्यूज चैनल स्पूतनिक को इंटरव्यू देकर बातचीत का प्रस्ताव दे रहे हैं तो कभी चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से दबाव डलवा रहे हैं। चैनलों की खबरों में बताया जा रहा है कि ऐसा भारत के सख्त रुख की वजह से हुआ है।
यह सही है कि नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद पाकिस्तान के विरुद्ध सख्त रुख अपनाया गया है, लेकिन यह कहना जल्दबाजी होगी कि अब पाकिस्तान, भारत के सामने गिड़गिड़ा रहा है या फिर आत्मसमर्पण कर रहा है। 13 जून को ही जम्मू कश्मीर में राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कहा कि 11 जून को अनंतनाग में सीआरपीएफ पर पाकिस्तान ने ही फिदायीन हमला करवाया। असल में जब भी भारत की स्थिति मजबूत होती है या कश्मीर में आतंकियों के हौंसले पस्त होते हैं तब पाकिस्तान में बैठे आतंकी ऐसे हमले करवाते हैं।
सवाल उठता है कि जब पाकिस्तान हमारे देश में आतंकी हमले करवा रहा है तब गिड़गिड़ाने और आत्मसमर्पण का सवाल ही नहीं उठता। पाकिस्तान का मकसद सिर्फ स्वयं को साफ-सुथरा दिखाने का प्रयास है। नो सौ चूहे खा कर बिल्ली हज को चली, वाली कहावत को पाकिस्तान चरितार्थ कर रहा है। इसे पाकिस्तान की कूटनीति ही कहा जाएगा कि द्विपक्षीय बातचीत में चीन ने राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी पाकिस्तान से बातचीत का प्रस्ताव भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सामने रख रहे हैं।
जहां तक रूसी न्यूज चैनल के इंटरव्यू का सवाल है तो बातचीत के प्रस्ताव में धमकी भी है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने कहा कि यदि दोनों देशों के रिश्ते नहीं सुधरते हैं तो करतारपुर कोरिडोर का प्रस्ताव खतरे में पड़ सकता है। असल में इमरान खान अपनी घरेलू समस्याओं से ग्रस्त हैं, इसलिए भारत से संबंध सुधारने में कोई खास रुचि नहीं रखते हैं। पाकिस्तान में वो ही राजनेता सफल होता है जो भारत से कश्मीर को छीनने की बात करता रहे। भारत और पाकिस्तान के बीच एक मात्र समस्या कश्मीर ही है।
क्या पाकिस्तान कश्मीर पर अपना दावा छोड़ देगा? यदि इमरान खान कश्मीर पर दावा छोडऩे का करार रखते हैं तो आज इसी वक्त रिश्ते सुधर सकते हैं। जब पाकिस्तान की ओर से कश्मीर में आतंकी वारदातें नहीं होगी तो समस्या अपने आप खत्म हो जाएंगी। सब जानते हैं कि इमरान खान कश्मीर छोडऩे का ख्याल भी अपने मन में लाते हैं तो एक मिनट भी पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की गद्दी पर नहीं बैठ सकते। पाकिस्तान और भारत के बीच कश्मीर सबसे बड़ा मुद्दा हैं। आजादी के बाद से इसी मुद्दे की वजह से भारत को बहुत नुकसान हुआ है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी किर्गिस्तान के बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन के शिखर सम्मेलन में भले ही इमरान खान की शक्ल भी नहीं देखे, लेकिन इमरान की चालबाजियों से सावधान रहने की जरुरत है। चीन अपने स्वार्थों की वजह से पाकिस्तान का समर्थक है, यह बात अलग है कि चीन में ही मुसलमानों पर सबसे ज्यादा अत्याचार होते हैं। एक संतान का कानून चीन के मुसलमान सहर्ष स्वीकारते है। मुसलमानों को चीन सरकार के कानूनों के हिसाब से ही रहना होता है। विकास कार्यो के लिए मस्जिद आदि गिराना चीन में आम बात है।

पाकिस्तान पर निशाना:

14 जून को बिश्केक में पीएम नरेन्द्र मोदी ने एससीओ के सम्मेलन को संबोधित करते हुए आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान पर निशाना साधा। पाकिस्तान का नाम लिए बगैर मोदी ने कहा कि जो देश आतंकवादियों को फंडिंग कर रहे हैं उनके विरुद्ध कार्यवाही होनी चाहिए। आतंकवाद की वजह से आम नागरिक के जीवन को खतरा हो रहा है। मोदी ने हाल ही में श्रीलंका में हुए चर्चों पर हमले की भी निंदा की।

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