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Friday, June 14, 2019

अब भू-कारोबारियों और बेईमान अफसरों पर कसेगा शिंकजा


एसपी मित्तल
अजमेर विकास प्राधिकरण की आनासागर सर्रक्यूलर रोड योजना में वैशाली नगर में आनंदम समारोह स्थल के निकट जो पचास करोड़ रुपए की आठ हजार वर्ग गज जमीन की बंदर बांट हुई उसमें नया खुलासा हुआ है। इससे स्वायत्त शासन विभाग और नगर निगम के अधिकारियों के साथ-साथ प्रकरण से जुड़े भू-कारोबारियों पर शिकंजा कसेगा। आठ हजार वर्गगज भूमि का नियमन और फिर रिषभ भवन निर्माण सहकारी समिति को आवंटन अजमेर नगर निगम के द्वारा किया गया है।
भाजपा पार्षद चन्द्रेश सांखला की शिकायत पर जिला कलेक्टर विश्वमोहन शर्मा ने जांच कमेटी बनाई है। इस कमेटी में प्राधिकरण के सचिव इन्द्रजीत सिंह, नगर निगम के उपायुक्त अखिलेश कुमार पीपल और निगम के विधि सलाहकार एचआर सीरवी को रखा गया है। जांच कमेटी सांखला से यह जानना चाहती थी कि सरकार ने संबंधित भूमि का अधिग्रहण कब किया है। चूंकि अधिग्रहण का कोई दस्तावेज नगर निगम की फाइल में नहीं था, इसलिए सांखला ने हाईकोर्ट में प्रस्तुत याचिका की फोटो कॉपी विधिवत रूप से प्राप्त की।
असल में रिषभ गृह निर्माण सहकारी समिति ने भूमि के नियमन और आवंटन के लिए वर्ष 1986 में हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की थी इस याचिका में सरकार का अधिग्रहण वाला आदेश भी लगाया गया। अधिग्रहण का आदेश मिल जाने से बंदरबांट का मामला और गंभीर हो गया है। अधिग्रहण का आदेश बताता है कि 1969 में ही भूमि का अधिग्रहण नगर सुधार न्यास के द्वारा कर लिया गया था। जबकि गृह निर्माण समिति का रजिस्ट्रेशन 1972 में करवाया गया है। समिति के अध्यक्ष प्रकाश जैन ने हाईकोर्ट में जो याचिका प्रस्तुत की उसमें 20 सदस्यों के नाम लिखे गए।
इसी में बीसवें नम्बर पर दिगम्बर जैन मंदिर का भी उल्लेख किया गया है। यानि समिति की कॉलोनी में जैन मंदिर भी बनाया जाएगा। सूची में हेमचंद जैन, नौरतमल झांझरी, त्रिलोकचंद झांझरी, दिलीप चौधरी, रामलाल गोयल, ओम प्रकाश जोशी, अरविंद कुमार सेठी, मूल चंद सोगानी, प्रशांत कुमार जैन, मांगीलाल जैन, अरविंद सेठी, पूनमचंद लादूलाल काला, रामप्रकाश तिवारी, निर्मल कुमार सोनी, पदमचंद जैन, चतरलाल जैन, कमल कुमार जैन, ललित जैन के नाम शामिल है।
नगर निगम को इन्हीं बीस सदस्यों को भूखंड आवंटित करने थे, लेकिन मार्च 2018 में निगम ने मधुर गोयल को छह, मीनाक्षी गोयल को चार, अनुपम महेश्वरी को चार, दीपा टिक्यानी को चार भूखंड आवंटित कर दिए। जबकि दो भूखंड अभी भी निगम ने अपने पास सुरक्षित रखे हैं। सवाल उठता है कि जब हाईकोर्ट में गृह निर्माण सहकारी समिति के बीस सदस्य बताए गए तो चार सदस्यों को 18 भूखंड आवंटित क्यों कर दिए गए? वैसे भी निगम को भूखंड आवंटन करने का अधिकार नहीं थी क्योंकि तत्कालीन नगर सुधार न्यास कई बार आवंटन के आवेदन को निरस्त कर चुका था।
न्यास के अधिकारियों का बारबार कहना रहा कि जिस भूमि का अधिग्रहण हो चुका है उसे किसी भी स्थिति में आवंटित नहीं किया जा सकता है। लेकिन इसे स्वायत्त शासन विभाग और नगर निगम के अधिकारियों की मिली भगत ही कहा जाएगा कि गैर काूननी तरीके से 8 हजार वर्गगज भूमि का आवंटन किया गया। इस भूमि की कीमत आज पचास करोड़ रुपए है। गंभीर बात तो ये है कि जांच शुरू हो जाने के बाद भी भूखंडों पर चार दीवारी और अन्य निर्माण कार्य धड़ल्ले से हो रहे हैं।
नगर निगम में आनासागर सर्रक्यूलर रोड योजना के अंतर्गत आवंटन के लिए चार सौ फाइलें लगी हुई है, लेकिन नगर निगम ऐसी फाइलों पर कोई निर्णय नहीं ले रहा है। गंभीर बात ये है कि निगम ने कृषि भूमि का नियमन आवासीय में किया है। निगम से पहले नगर परिषद तक के इतिहास में यह पहला मौका है जब कृषि भूमि का नियमन किया गया है। सांखला का आरोप है कि निगम ने उस भूमि को आवंटित किया जिसका का कब्जा भी पूर्व में नगर सुधार न्यास ने ले लिया था।

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