अगर आप कुछ कर सकते हैं तो गोदी मीडिया के एंकरों से कहो कि हिन्दू मुसलमान बंद करो?

अगर आप कुछ कर सकते हैं तो गोदी मीडिया के एंकरों से कहो कि हिन्दू मुसलमान बंद करो?


रवीश कुमार
अनुपम खेर और दो चार अन्य कलाकार तख़्ती लिए खड़े हैं। उस तख़्ती पर लिखा है प्रधानमंत्री जी सांसद साक्षी महाराज को पार्टी से निकालें।

तख़्ती ट्विटर पर ट्रेंड कर रही थी। अनुपम खेर ने इंसाफ़ का तराजू हाथ में ले लिया था। उनके साथ दो चार और कलाकार आ गए थे।

साक्षी महाराज ने जेल में बंद बीजेपी के विधायक कुलदीप सिंह सेंगर से मुलाकात की थी। मुलाकात के बाद उन्हें लोकप्रिय नेता बताया था और चुनाव के लिए धन्यवाद दिया था। जेल में बंद किसी को चुनाव के लिए धन्यवाद क्यों दिया जाता है इसके लिए अनुपम खेर ने मनोज वाजपेयी की शूल देख ली थी।

सीबीआई ने पिछले साल चार्जशीट दायर की थी। आरोप है कि कुलदीप सिंह सेंगर ने एक किशोरी के साथ अपने घर पर कथित रूप से बलात्कार किया था। वह नौकरी मांगने गई थी। पिता ने जब मुकदमा किया है तो उसकी भी हत्या हो गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार उसके शरीर पर गहरे ज़ख़्मों के निशान थे।

मैंने देखा कि तख़्ती पर अनुपम खेर लिख रहे थे कि मोदी जी बलात्कार के मामले में आरोपी से मुलाकात, वो भी आपके सांसद की, आप माफ कर दें, मैं माफ नहीं कर पाऊंगा। यह कहते हुए उन्होंने ट्वीट भी कर दिया है कि वे समर्थक होने के दैनिक काम से इस्तीफा देते हैं और उनकी सांसद पत्नी जिनके प्रचार के लिए वे चंडीगढ़ गए थे, उनसे भाजपा छोड़ने की अपील करते हैं।

क्या आपने ऐसी कोई तख़्ती देखी? कोई ट्वीट देखा? नहीं ना। हो भी नहीं सकता। अनुपम खेर को पता है ऐसा कोई ट्वीट कर दिया तो मदद के लिए उन्हीं बुद्धीजीवियों को पुकारने लगेंगे जिन्हें अलीगढ़ के केस को लेकर ललकार रहे थे।

अनुपम खेर के पास इंसाफ़ का तराजू है। उस तराजू का बटखरा यानी जिससे भार तौला जाता है वह हिन्दू रंग का है। वह भाजपा रंग का है। उसी से वो आलू भी तौलते हैं और बलात्कार के केस भी। जब भी तौलते हैं, नज़र बचाकर डंडी मार लेते हैं। उनकी धार्मिकता मार्केट में अपनी प्रासंगिकता को बनाए रखने के लिए है। न कि धर्म के सत्य के लिए।

हम भारतीयों को पता है कि पांच ग्राम कम तौल देन से न तो इंसाफ़ का मक़ाम छोटा हो जाता है और न आलू ख़रीदने वाले का घर बर्बाद होता है। कारोबार चलता रहता है। इसे रोकने के लिए भार व नाप-तौल अधिकारी भारत में ही पाए जाते हैं। अनुपम खेर भी भारत में ही पाए जाते हैं। पाए जाते रहेंगे।

अलीगढ़ के टप्पल में उस बच्ची के साथ जो हुआ उसे लेकर एक हिन्दू उबाल गढ़ने का प्रयास किया गया। सुबह से मुझे फोन आने लगे कि 2002 दोहरा देंगे, मुल्लों को सबक सीखा देंगे। भेजने वाला इस निर्भिकता से भेजता है जैसे शासन का आदेश पत्र हो। जून 2017 को प्रधानमंत्री मोदी ने साबरमती में कहा था कि हिंसा से किसी चीज़ का समाधान नहीं हो सकता। उसी भाषण में कहा था कि गांधी होते तो गाय के नाम हत्या को माफ नहीं कर पाते। आज दस दिन से अधिक हो गए, गांधी के हत्यारे को देशभक्त बताने वाली सांसद प्रज्ञा ठाकुर के ख़िलाफ़ कोई कदम नहीं उठा जा सक है। हम यह अंतर्विरोध रोज़ देखते हैं। हम तो रोज़ चुप रहते हैं।

जैसे देश में होने वाली हज़ारों हत्याओं और बलात्कार की घटनाओं पर चुप होने की छूट है। आपका चुप होना उन तमाम हत्याओं में शामिल होना नहीं माना जाएगा। अलीगढ़ की घटना के अपराध में शामिल नहीं हैं तो आपको बोलना ही होगा क्योंकि आरोपी के नाम ज़ाहिद और असलम हैं। क्योंकि दोनों मुसलमान हैं।

एक मेसेज में ललकारा गया कि अख़लाक़ और आसिफ़ा पर बोलने वाले इस बच्ची पर क्यों चुप हैं। 2018 में कठुआ की आसिफ़ा के बलात्कारी के समर्थन में एक रैली निकली थी। उस रैली में बीजेपी के मंत्री शामिल हुए थे। 1 मार्च को हिन्दू एकता मंच ने बलात्कार के आरोपियों के पक्ष में तिरंगा लेकर रैली निकाली थी। क्या तिरंगा इसलिए है? उसी में मंत्री पद पर रहते हुए लाल सिंह और चंद्र प्रकाश ने भाषण दिया था। हिन्दी के एक बड़े अख़बार ने उस ख़बर पर भ्रांतियां फैलाई थी। एक पूरा तंत्र खड़ा था बलात्कारी के समर्थन में। इसलिए लिखने वाले चंद लोगों ने लिखा था।

दादरी के अख़लाक़ की हत्या अपराध की घटना नहीं थी। इस घटना की बुनियाद में सांप्रदायिक नफ़रत थी और उस सांप्रदायिक नफ़रत के साथ बहुत सारे लोग खड़े थे। यही नहीं जब हत्या के एक आरोपी रवि सिसोदिया की मौत हुई तब उसके पार्थिव शरीर को तिरंगा झंडा से लपेटा गया। अनुपम खेर कभी तख़्ती नहीं बनाएंगे कि यह तिरंगा का अपमान है। हिन्दुस्तान का अपमान है। क्योंकि अनुपम खेर को सही ग़लत कम हिन्दू और मुसलमान ज़्यादा दिखता है। अपराधी में सिर्फ मुसलमान में दिखता है। अपराध में सिर्फ मुसलमान में दिखता है।

मुझे अख़लाक़ के लिए ही नहीं आरोपी रवि सिसोदिया के लिए भी अफ़सोस है। गौ रक्षा के नाम पर सांप्रदायिक ज़हर ने उसे लपेटे में न लिया होता तो आज उसके परिवार में खुशियां होतीं। नफ़रत की यह राजनीति हमारे घरों में लड़कों को दंगाई और हत्यारा बना रही थी। चैनलों के एंकर हत्यारा बनाए जाने के माहौल को सही बता रहे थे। चंद बुद्धिजीवी इसका विरोध कर रहे थे। न उनके पास मीडिया था, न उनके साथ सरकार थी, फिर भी वे अकेले खड़े होकर विरोध कर रहे थे।

नफ़रत के ख़िलाफ़ बोलना क्या इतना बड़ा अपराध है कि उन्हें हर बात में ललकारा जाए? मैं तो आज भी कहता हूं कि सांप्रदायिकता इंसान को मानव बम में बदल देती है। आपके बच्चे डॉक्टर बनना चाहते हैं, सांप्रदायिकता दंगाई बनाना चाहती है।

अनुपम खेर ने अपनी तख्ती पर सिर्फ इंसाफ़ की बात लिखी। इंसाफ़ की मांग ग़लत नहीं होती मगर यह मांग उस इको सिस्टम के हिस्से का प्रतिनिधित्व था जो इसके पीछे सांप्रदायिक रंग खेल रहा था। जो इसके बहाने बुद्धिजीवियों की चुप्पी को ललकार रहा था। मालिनी अवस्थी अपने फेसबुक पर लिख रही हैं कि जघन्य पाप के पापियों के लिए सोशल एक्टिविस्टों के आंसू नहीं। बुद्धिजीवियों के ट्वीट नहीं। यह सब उस इकोसिस्टम का पार्ट है जो ऐसी घटनाओं के समय अलग-अलग किनारों से उमड़ पड़ता है। इनकी तख़्ती इंसाफ़ के लिए नहीं है, इंसाफ़ के बहाने कुछ और है। अहमदाबाद में अपराधियों के गिरोह ने धावा बोल दिया और बीस दिन के बच्चे की हत्या कर दी। अगर उसके आरोपी का नाम हितेश मारवाडी और सतीश पटनी की जगह ज़ाहिद और असलम होता तब यही लोग इंसाफ़ की मांग कर रहे होते। 2002 की याद दिला रहे होते।

अलीगढ़ की घटना के बहाने फिर से उस सांप्रदायिकता की चिंगारी भड़काई जा रही है। पुलिस ने ट्वीट किया है कि बलात्कार की पुष्टि नहीं हुई है। अफवाह न फैलाएं। फिर अफवाह को हवा देने वालों का मकसद क्या रहा होगा? बच्ची की हत्या भी कम जघन्य नहीं है। तो भी यह सांप्रदायिक कैसे हुआ? क्या राज्य सरकार तुष्टीकरण के नाम पर ज़ाहिद और असलम को बचा रही थी? क्या हममें से कोई ज़ाहिद और असलम के साथ ख़ड़ा था? क्या अलीगढ़ के मुसलमान इन आरोपियों के पक्ष में कठुआ की तरह रैली निकाल रहे थे? सबका जवाब ना में मिलेगा. जो चुप हैं उनके यहां भी और जो बोल रहे हैं उनके यहां भी। मगर जो पूछ रहे हैं उनसे हिसाब कौन मांगेंगा?

जब यही बुद्धिजीवी रोज़गार की समस्या से लेकर प्रधानमंत्री के बोले गए झूठ पर लेख लिखते हैं तब तो ये एंकर उनकी बातों को लेकर सरकार को नहीं ललकारते हैं। जैसे ही इन्हें किसी मामले में कोई मुसलमान देखता है ये पत्रकारिता के नाम पर उन्माद फैलाने लगते हैं। अनुपम खेर जैसे कुछ कलाकार तख़्ती लेकर मीडिया को मुद्दा देते हैं। उनकी तस्वीर स्क्रीन पर दिखाकर घर बैठे लोगों के दिमाग़ में ज़हर भरा जाता है। इस प्रक्रिया में मुसलमान को दोयम दर्जे का नागरिक बनाया जाता है। लेकिन उससे पहले जिनके दिमाग़ में यह कचरा भरा जाता है उन्हें दोयम दर्जे का नागरिक बनाया जा चुका होता है। इसलिए व्यापक हिन्दू हित में यह ज़रूरी है कि सभी न्यूज़ चैनल देखना बंद कर दें। क्योंकि चैनलों में धर्म के नाम पर हिन्दुओं से झूठ बोला जा रहा है।

ये न्यूज़ चैनल इस मान्यता का भी अपमान करते हैं कि सच्चा धार्मिक वह है जो सत्य के लिए सर कटा दे। जो निर्भीक हो। न्यूज़ चैनलों की धार्मिकता तो झूठ की बुनियाद पर खड़ी है। उनमें निर्भीकता देखनी हो तो एंकर के सामने अमित शाह को खड़ा कर दीजिए। ऐसे एंकर पत्रकारिता और न ही किसी धर्म के प्रतिनिधि हो सकते।

अंत में मोदी समर्थकों से एक बात कहना चाहता हूं। झूठ, प्रपंच और बेहिसाब पैसे के दम पर खड़ी राजनीति का विरोध कीजिए। आप सत्य का बंटवारा हिन्दू सत्य और मुस्लिम सत्य में मत कीजिए। आप सत्ता के साथ खड़े हैं तो आपकी जवाबदेही ज्यादा है। आप उस सत्य के साथ खड़े होइये जो सत्य होता है। सत्ता के लिए झूठ को सत्य मत बनाइये।

चैनलों के हिन्दू धूर्त हित हैं। उनके यहां सत्य का नैतिक बल नहीं हैं। जहां सत्य का नैतिक बल नहीं होगा वह सच्चा हिन्दू नहीं हो सकता है। आप हिन्दू धर्म की बात करने वालों की टाइम लाइन पर जाकर देखें। सरकार से शायद ही कभी कोई सवाल मिल जाए। ये एंकर तो अपने नागरिक होने का फ़र्ज़ नहीं निभा पा रहे हैं, हिन्दू होने का क्या निभाएंगे।

प्रधानमंत्री ने अभी-अभी तो सबका साथ- सबका विश्वास का नारा दिया है। अनुपम खेर और ऐसी बात करने वालों ने उनके इस नारे के मूल भाव का अपमान किया है। खेर की तख़्ती झूठ और नफ़रत के आधार एक समुदाय के प्रति भय और अविश्वास को गहरा करती है। जिस तरह से प्रधानमंत्री ने साक्षी महाराज और प्रज्ञा ठाकुर के प्रति उदारता दिखाई है, मैं चाहूंगा कि वे अनुपम खेर के प्रति भी उदारता दिखाएं। इतनी सी बात के लिए कोई कार्रवाई न करें। क्योंकि सिर्फ अनुपम खेर ही नहीं हैं। ऐसे लोग रहेंगे। वे अगर कुछ कर सकते हैं तो अपनी गोदी मीडिया के एंकरों से कहें कि हिन्दू मुसलमान बंद करो। चाहो तो चार-पांच इंटरव्यू और ले लो। उनके पास दिखाने को कुछ नहीं है।

केयर ऑफ़ मीडिया की खबरों को अपने मोबाइल पर पाने के लिए Whatsapp ग्रुप से जुड़ें

Loading...
loading...
Name

Advice,64,Agra,206,Ajab Gajab,1404,Aligarh,69,Allahabad,236,Aman Pathan,398,Ambedkar nagar,1313,Amethi,321,Amroha,434,Article,278,Ayodhya,2,Badaun,4,Bahraich,600,Ballia,3,Balrampur,582,Barabanki,3,Barebanki,3,Bareilly,12,Basti,83,beauty tips,41,Bhadohi,1,Bhakti,3,Bihar,274,Bijanaur,5,Bijnor,254,BJP,57,Blog,3865,Bollywood,357,Business Idea,62,business news,144,Carrier,1,Chandigarh,2,Congress,43,Cricket,38,CRIME NEWS,149,Desh videsh,1066,Earning Tips,3,education,2,Election,1129,English,7,Entertainment,950,Etah,580,faizabad,265,Farrukhabad,96,fatehpur,1,Firozabad,5,Gadgets,1581,Gaziabad,1,Ghazipur,8,gonda,4,Gorakhpur,1,gujarat,19,gujrat,118,Hardoi,74,Hariyana,55,Health Tips,258,Helth Tips,27,Himachal pradesh,3,Historical news,3,Hollywood,34,Home Design,25,International,252,international news,113,jammu kashmir,46,Jaunpur,1295,jayapur,1,Jharkhand,36,Job,43,Kanpur,16,Karnatak,5,karnatka,15,Kasganj,269,khana khajana,40,Korba,1,Lakhimpur khiri,135,Life Style,323,LIVE,15,lovestory,1,Lucknow,78,Madhya Pradesh,785,Madhyapradesh,3,Maharashtra,155,Maharastra,4,Mathura,26,Media Event,10,Media Job,9,Media News,857,Mirzapur,55,Mirzapur-news,7,Mohd Zahid,814,mumbai,3,Muradabad,8,Muzaffarnagar,1,Nadeem S Akhtar,471,Narendra modi,522,National,105,National News,271,New Delhi,6667,news,1,ONE CLICK 5 NEWS,15,Panjab,38,Patiyali news,2,Patna,1,Pilibhit,6,Political,16,poltical news,252,Poltics,639,Prayag,1,punjab,24,Quiz,71,Raebareli,4094,Rajasthan,1107,rajsthan,28,Ramzan,24,Rashifal,347,Ratlam,2,s,2,Saharanpur,76,Samajwadi party,70,Sambhal,101,Shahjahanpur,130,Sharanpur,152,Shayari,35,Shivakant Awasthi,3,Sitapur,56,SP Mittal,422,Special news,65,sports,116,Sports news,18,Sravasti,2252,State News,14058,stateç,1,statenews,142,Sultanpur,269,Survey,9,technology news,41,Tecnology,48,Unnav,2,unnaw,2,Urdu,6,uttar pardesh,1202,uttar pradesh,15108,uttar spardesh,26,Uttarakhand,59,uttarpardesh,28,uttarpradesh,194,uttarpradeshUttar,8,Uttrakhand,28,video,4101,Vihar,1,Viral Post,1095,Viral Video,1157,Voting,7,Wasim akram tyagi,141,West Bengal,75,Wishing,4,उत्तर प्रदेश,3,उथल पुथल,6,धर्म कर्म,180,राज्य समाचार,3,रायबरेली,3,
ltr
item
CARE OF MEDIA: अगर आप कुछ कर सकते हैं तो गोदी मीडिया के एंकरों से कहो कि हिन्दू मुसलमान बंद करो?
अगर आप कुछ कर सकते हैं तो गोदी मीडिया के एंकरों से कहो कि हिन्दू मुसलमान बंद करो?
अगर आप कुछ कर सकते हैं तो गोदी मीडिया के एंकरों से कहो कि हिन्दू मुसलमान बंद करो?
https://1.bp.blogspot.com/-5ixHIyjhW2Q/XP3ld9tK25I/AAAAAAABGMc/vZI15lUTiMQRRxvpzB9mRlp7JjWR-3AJACLcBGAs/s320/IMG_20190610_100949.jpg
https://1.bp.blogspot.com/-5ixHIyjhW2Q/XP3ld9tK25I/AAAAAAABGMc/vZI15lUTiMQRRxvpzB9mRlp7JjWR-3AJACLcBGAs/s72-c/IMG_20190610_100949.jpg
CARE OF MEDIA
https://www.careofmedia.com/2019/06/Ravish-kumar.html
https://www.careofmedia.com/
https://www.careofmedia.com/
https://www.careofmedia.com/2019/06/Ravish-kumar.html
true
3701702825773277879
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS CONTENT IS PREMIUM Please share to unlock Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy