चे ग्वेरा ने सैकड़ों लोगों को बिना केस चलाए ही दे दी थी फांसी - CARE OF MEDIA

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Friday, June 14, 2019

चे ग्वेरा ने सैकड़ों लोगों को बिना केस चलाए ही दे दी थी फांसी


क्यूबा में वर्ष 1959 की क्रांति के बाद फिदेल कास्त्रो के नेतृत्व में कम्युनिस्ट सरकार बनी। फिदेल ने चे ग्वेरा को जेल मंत्री बनाया। इस दौरान चे ग्वेरा का एक नया चेहरा देखने को मिला। उन्होंने कास्त्रो के मिशन के दौरान पकड़े गए सैकड़ों आरोपियों को बिना केस चलाए ही फांसी पर लटकवा दिया। इस कदम को लेकर उनकी आलोचना भी होती रही है। बावजूद इसके युवाओं में चे ग्वेरा की लोकप्रियता आज भी कायम है। चाहे अमेरिका हो या भारत युवाओं के बीच चे ग्वेरा की तस्वीर वाली टीशर्ट आज भी यूथ की पसंद है।

... और तीसरे विश्व युद्ध के मुहाने पर थी दुनिया

साल 1959 के विद्रोह के बाद अमेरिका ने क्यूबा से अपने तमाम कूटनीतिक रिश्ते तोड़कर उस पर आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए थे। इसके बाद क्यूबा ने सोवियत संघ की ओर हाथ बढ़ाया। साल 1962 में सोवियत संघ ने अपने मिसाइल क्यूबा भेजे जो अमेरिका के खिलाफ तैनात किए जाने थे। क्यूबा की इस चाल से अमेरिका हैरान था। इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी ने कड़ा रुख अपनाने की बात कही, आखिरकार सोवियत संघ को अपना कदम वापस लेना पड़ा। यह संकट 13 दिन तक चला जिसके कारण दुनिया तीसरे विश्व युद्ध के मुहाने पर खड़ी नजर आई थी। विद्वान इस संकट के पीछे चे ग्वेरा की कूटनीति को मानते हैं।

चे ग्वेरा को सत्‍ता की चमक दमक भी नहीं बांध पाई...

चे ग्वेरा 33 साल की उम्र में क्यूबा का उद्योग मंत्री बनाए गए लेकिन बाद में दक्षिण अमेरिका में क्रांति के मकसद से यह पद छोड़कर फिर जंगलों का रुख कर लिया। 37 साल की उम्र में क्यूबा के सबसे ताकतवर युवा चे ग्वेरा ने कांगो में विद्रोहियों को गुरिल्ला लड़ाई का प्रशिक्षण दिया। इसके बाद वह बोलीविया चले गए जहां उन्होंने विद्रोहियों को ट्रेनिंग देनी शुरू की।
इस दौरान अमेरिका की खुफिया एजेंसियां उनके पीछे पड़ी रहीं। आखिरकार, 9 अक्टूबर, 1967 अमेरिकी खु़फिया एजेंटों और बोलीविया की सेना की मदद से चे को पकड़कर गोली मार दी गई। आज उनकी मौत के 52 साल बाद भी उन्हें युवाओं के जेहन से नहीं निकाला जा सका है। विशेषज्ञ इसके पीछे चे ग्वेरा की ईमानदारी और गरीबों के हक की लड़ाई को मानते हैं।

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