NRC और CAA की वकालत करने वाले ध्यान दें, तुम्हें नागरिकता तो मिल जाएगी अधिकार छीन जाएंगे


नदीम अख्तर
जब देश में अमन-चैन था, मैं तब से लिख रहा हूँ कि #CAB (अब #CAA) और #NRC अंततः देश को गृह युद्ध यानी Civil War की तरफ ले जाएगा। तब भाई लोग मेरी बात को हल्के में ले रहे थे और उनकी आंखों पे चश्मा चढ़ा हुआ था।

अब जब #देश #जलना शुरू हो गया है तो वही भाई लोग अब ये कहने लगे हैं कि जनता #गुमराह है। उसे भड़काया जा रहा है। तो सुनो बेटा दलालों! #जनता इतनी मासूम नहीं और कोई यहां इतना सयाना नहीं कि पब्लिक को भड़का ले! समझे! और यही बात अब बिक चुके #दलाल टीभी चैनलों से भी कहलवाई जा रही है कि जनता गुमराह है। उसे कुछ नहीं पता। अभी तो एनआरसी लागू ही नहीं हुआ। अभी तो उसका #ड्राफ्ट ही तैयार नहीं हुआ वगैरह वगैरह बातें ये दलाल टाइप उतरकर टीभी पे बता रहे हैं। पर जनता सयानी है। वह इन दलालों को सरेआम #लतिया के भगा दे रही है और ये सिर पे पैर लेकर वहां से भाग रहे हैं।

तो ऐसा है गुरु कि NRC और CAA में कहीं किसी को कोई #confusion नहीं। सबको मालूम है कि NRC नागरिकता देने का नहीं, छीनने का क़ानून है। अगर एनआरसी नागरिकता देने का क़ानून है तो #Assam में NRC के दौरान #देश के पूर्व #राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद के परिवार की नागरिकता क्यों छिन गई जबकि उनके पास सभी वैध डॉक्युमेंट्स थे? साथ ही #सेना के अफसरों और #जवानों के उन परिवारों की #नागरिकता क्यों छीन ली गयी जो देश की सेवा कर रहे हैं या कर चुके हैं?

इसलिए असम टेस्ट केस है। वहां खुद बीजेपी #एनआरसी के नतीजों का विरोध कर रही थी पर उसी बीजेपी ने इसे राष्ट्रीय स्तर पे लागू करने की बात कहकर #नागरिकता #संशोधन #क़ानून (CAA) भी बना दिया। अब इसका असर क्या होगा, ये भी बहुत सिंपल भाषा में समझाता हूँ। जो दलाल टाइप पत्रकार और लोग ये कह रहे हैं कि NRC और CAA दो अलग चीज़ें हैं और इनका एक-दूसरे से कोई लेना-देना नहीं, उन महामूर्खों और धूर्तों को सरल ज़बान में ककहरा पढ़ाता हूँ।

तो मामला ये है बेटा कि असम में एनआरसी में ज्यादातर नॉन-मुस्लिमों का नाम NRC #रजिस्टर में नहीं चढ़ पाया, जिस वजह से इज्जत बचाने के लिए खुद #बीजेपी एनआरसी के रिजल्ट को बोगस बताने लगी। फिर इस पे मंथन हुआ कि जब देशभर में इसे लागू करेंगे तो ऐसी क्या व्यवस्था की जाए कि सिर्फ मुसलमानों को छोड़कर बाकी सभी धर्मों के लोगों को NRC में नाम ना आने की सूरत में पिछले दरवाजे से नागरिकता मिल जाए। तब ये आईडिया आया कि देश के नागरिकता क़ानून में संशोधन कर एक प्रावधान उसमें जोड़ा जा सकता है कि #पाकिस्तान, #बांग्लादेश और #अफगानिस्तान से भारत आये सभी मज़हब के लोगों को (मुसलमानों को छोड़कर) यहां की नागरिकता मिल जाएगी।

यानी मुसलमान का नाम NRC के रजिस्टर में नहीं चढ़ा तो उसे घुसपैठिया करार देकर परिवार समेत यातना झेलने के लिए Detention Camp में भेज दो और अगर किसी अन्य धर्म के व्यक्ति का नाम देशव्यापी NRC में नहीं आया तो CAA क़ानून के तहत उसे भारत की नागरिकता दे दो। नतीजा ये होगा कि करोड़ों मुसलमानों को देश में घुसपैठिये करार देकर उनसे वोटिंग समेत तमाम अधिकार छीन लिए जाएंगे और अलग थलग #डिटेंशन #कैम्प में ठूंसकर जानवर से बदतर ज़िन्दगी जीने को मजबूर कर दिया जाएगा। ये बहुत बड़ा गेम प्लान है, जिसे अंजाम देने की कोशिश हो रही है।

पर हड़बड़ी में भाई लोग ये भूल गए कि जिन हिन्दुओं, सिखों और ईसाइयों के नाम NRC में नहीं आएंगे, उनको CAA के तहत नागरिकता लेने में 900 दीया तेल जलाकर भी नागरिकता पानी मुश्किल होगी। बरसों लग जाएंगे बाबुओं को घूस खिलाकर कागज़ देने में और दुबारा भारत की नागरिकता लेने में। और इसकी गारन्टी भी नहीं कि उनको भारत की नागरिकता मिल ही जाएगी। पहली बात तो यही कि उनको ये साबित करना पड़ेगा कि वे पाकिस्तान, या बांग्लादेश या अफगानिस्तान से भागकर आए पीड़ित हिन्दू या सिख हैं।

फिर उसका फर्जी सर्टिफिकेट कहाँ से आएगा? और अगर आप बरसों से भारत में ही रहने वाले हिन्दू हैं और आपका नाम NRC में नहीं आ पाया तो क्या CAA के तहत आपको नागरिकता मिलेगी? मेरे ख्याल से नहीं। तब उनका क्या होगा, ये मुझे पता नहीं। और ये याद रखिए कि मुसलमान हों या हिन्दू, जैसे ही आपका नाम NRC से हटा, आपकी सरकारी नौकरी छीन ली जाएगी और सारे नागरिक अधिकार खत्म कर दिए जाएंगे। यानी आप अपने ही देश में विदेशी घुसपैठिये घोषित कर दिए जाएंगे और डिटेंशन कैम्प में ठेल दिए जाएंगे।

ये देशभर में नागरिक जो विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, वे इसी बात से खफा हैं। खासकर नागरिकता क़ानून में इस संशोधन से कि इसमें मुस्लिम समुदाय के लोगों के लिए कोई जगह नहीं क्योंकि अगर NRC में उनका नाम नहीं आ पाया तो CAA के तहत भी उन्हें नागरिकता नहीं मिल पाएगी जबकि जूते घिस-घिस कर और येन केन प्रकारेण दूसरे धर्म के लोग यहां की नागरिकता हासिल कर सकते हैं (जो बहुत मुश्किल काम है) क्योंकि CAA क़ानून उनके साथ है। संविधान विशेषज्ञों और क़ानून के जानकारों का कहना है कि धर्म के आधार पर भारतीय संविधान के तहत शरणार्थियों को भी नागरिकता देने में भेदभाव नहीं कर सकते।

इसलिए ज़रा सोचिए कि भारत के लगभग 20 करोड़ मुसलमानों में से कुछ करोड़ (पाकिस्तान में रहने वाले 20 करोड़ मुसलमानों के बराबर) अगर सड़क पे उतर गए तो सरकार के लिए हालात संभालना कितना मुश्किल होगा क्योंकि देशभर में मुसलमानों के साथ-साथ सभी मज़हबों के लोग NRC के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। तब आगे आंदोलन के उग्र होने पे प्रदर्शनकारियों की तादाद का अंदाज़ा आप लगाइए। अभी आप जो कुछ टीभी पे देख रहे हैं, वो तो बस शुरुआत है क्योंकि जितने नागरिक पुलिस से पिटकर घर आ रहे हैं, उन्हें देखकर 100 और लोगों का खून खौल रहा है।

फिर वे भी पुलिस को दुश्मन मानकर सड़क पे उतर रहे हैं। सो पता नहीं इस देश में कितने लोगों और हुक्मरानों को अंदाज़ा है कि हालात दिन ब दिन कितने खतरनाक होते जा रहे हैं और एकदिन जनता एक साथ बम की तरह फट सकती है। ये हाल तब है जब इंटरनेट और फोन सेवा बन्दकर धारा 144 लगाई जा रही है। नागरिक पुराने तरीक़ों का इस्तेमाल कर भारी संख्या में जुट जा रहे हैं। और ये नेताविहीन भीड़ कभी भी बेकाबू हो सकती है, मेरी इस बात को नोट कर लीजिएगा।

वैसे आज देर शाम केंद्रीय #गृह #मंत्रालय ने हालात काबू में ना होता देख कई सारे #tweets करके ये आश्वासन दिया कि किसी भी नागरिक की नागरिकता नहीं छीनी जाएगी। पर लगता है कि सरकार अभी भी अंधेरे में तीर चला रही है। देशभर में विरोध प्रदर्शन CAA के तहत धार्मिक आधार पर भेदभाव और उसके बाद लागू किए जाने वाले NRC को लेकर है, जिससे लोगों को नागरिकता छिनने का डर सता रहा है। यानी जड़ में CAA क़ानून है जिस पे सरकार स्पष्ट रूप से कुछ नहीं बोल रही। मास कम्युनिकेशन में ऐसे हालात को #Crisis #Communication के मार्फ़त डील करते हैं यानी तुरन्त असल और सच्ची बात जनता तक सभी माध्यमों से पहुंचाई जाती है।

अभी तक सरकार की तरफ से CAA में बदलाव और NRC की पूरी प्रक्रिया को लेकर कोई स्पष्ट जवाब नहीं आया है, लिखित में, जिस कारण लोग डरे हुए हैं। कोढ़ में खाज ये की असम में बनाए गए डिटेंशन सेंटर्स के वीडियो वायरल हैं, जो भयावह हैं और उसके बारे में जानकर आपकी रूह कांप जाए कि क्या भारत जैसे मुल्क में ऐसे डिटेंशन कैम्प बन चुके हैं जहां लोगों को रखना शुरू भी कर दिया गया है। सो जनता का गुस्सा और डर, दोनों सातवें आसमान पे है। बस एक चिंगारी की देर है कि ये आग बहुत तेजी से भड़केगी।

अगर पूरा देश एक साथ जलने लगा तो दुश्मन देश की चांदी है। नागरिक और जान-माल का नुकसान जो होगा, वह अलग। यानी पूरे विनाश के आसार हैं। NRC और CAA पे केंद्र सरकार घिर गई है। उसकी गति सांप छछूँदर वाली हो गयी है। ना निगलते बन रहा है और ना उगलते। इधर जनता का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। अगर जल्द ही केंद्र सरकार ने शक के बादल नहीं हटाए और समझदारी भरा कदम नहीं उठाया तो फिर क्या होगा, इसका अंदाज़ा आप लगा लीजिये। पूरी रामकहानी लिख दी।

और हां। अब ये मत कहना कि NRC और CAA, दो अलग चीज़ें हैं और NRC तो अभी लागू ही नहीं हुआ! सुनो मीडिया के दलालों! जनता क्या इतनी येड़ी है कि असम में NRC का हाल देखने और वहां के डिटेंशन कैम्प्स के वीडियो देखने के बाद अपनी गर्दन कटने का घर बैठकर इंतज़ार करेगी? सुधर जाओ वरना अभी तक तो जनता माइक छीन रही है। किसी रोज़ दमभर कूट दिए जाओगे और तुम्हारे ही टीभी चैनल पे तुम्हारे कूटे जाने की खबर नहीं चलेगी। समझे!!
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