ZEE News के बाद News18 में कोरोना वायरस की दस्तक, जानिए कैसे कोरोना के मरकज बन रहे हैं न्यूज़ रूम


नदीम अख्तर 
सवाल ये नहीं है कि किसी मीडिया संस्थान में 28 से ज्यादा कर्मचारी कोरोना पॉजिटिव पाए गए। सवाल ये है कि क्या आपका संस्थान सुरक्षा के लिए तय सरकारी मानकों का पालन करके जिम्मेदारीपूर्वक व्यवहार कर रहा था? क्या पहला ही केस सामने आने के बाद आपने प्रशासन को इत्तिला दी थी?एरिया को सील किया था? इलाके को सैनिटाइज किया था? बाकी कर्मचारियों के स्वास्थ्य की विस्तृत जांच की थी? उन कर्मचारियों की सुरक्षा के उपाय अपनाए थे?
अगर हां, तो फिर प्राप्त सूचना के अनुसार ये संक्रमण 28-30 कर्मचारियों में कैसे फैला? इसकी जांच होनी चाहिए।  आप मीडिया संस्थान हैं, खुद बहुत जागरूक हैं, देश-दुनिया और समाज को ज्ञान देते हैं, फिर इतनी बड़ी लापरवाही?  कोरोना संक्रमित लोगों का मरकज़ आपका न्यूज़ रूम कैसे बना? इसकी जांच होनी चाहिए। 
कौन था वहां का मौलाना साद रूपी मुखिया, जिसने अपनी आंखों के सामने ये होने दिया? खबर तो ये भी आई कि ऐसे हालात में कर्मचारियों को काम पे आने के लिए धमकाया गया!ऐसे में किसने जानबूझकर न्यूज़ रूम को कोरोना-गृह में तब्दील होने दिया ?
इसकी जांच होनी चाहिए और उसके ऊपर IPC की वही धाराएं लगानी चाहिए जो निज़ामुद्दीन मरकज़ के मौलाना साद पर लगाई गई हैं। निज़ामुद्दीन मामले के समय तो कोरोना का ऐसा हल्ला नहीं था, पर अभी तो तीन-तीन lock down खत्म करके हम चौथे में घुस गए हैं। फिर किसने इतनी बड़ी लापरवाही की? 
इसका गहन परीक्षण होना चाहिए और संस्थान सील होना चाहिए। आरोपी/दोषी गिरफ्तार होना चाहिए। आप सोचिए कि न्यूज़ रूम में 28 कोरोना संक्रमित घूम-घूमकर कितनों को ये बीमारी बांट रहे होंगे?
सिर्फ अपने चैनल में नहीं, दूसरे चैनल के कर्मचारियों को भी क्योंकि फ़िल्म सिटी में सारे न्यूज़ चैनलों के दफ्तर आसपास हैं और कर्मचारी चाय-पानी पीने बाहर पटरी की दुकानों पे इकट्ठे होते रहते हैं या वैसे भी आपस में मिलते-जुलते हैं। एक खबर आई भी है कि News18 में भी कोई कोरोना पॉजिटिव निकला है। मुझे डर है, ये तादाद बढ़ सकती है।
ये बहुत गंभीर मामला है। आप खुद दूसरों को कोरोना से लड़ने का पाठ पढ़ाते रहे हैं और तब्लीग जमात को खूब कटघरे में खड़ा किया था। रात-दिन, लगातार। लेकिन जब अपनी बारी आई तो फिर ये ज्ञान क्यों काम नहीं।आया? अपने ही घर में इतनी बड़ी लापरवाही? चिराग तले अंधेरा?
पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों पर मुकदमा दर्ज करके कार्रवाई करनी चाहिए। इस मीडिया संस्थान के नीति-नियंता बड़े दोषी हैं क्योंकि उन्होंने सब जानते-समझते हुए ये सब होने दिया। 
उम्मीद है क़ानून इस मामले में नज़ीर बनाएगा वरना उस पे ये तोहमत सदियों रहेगी कि कोरोना काल में भी भारत का संविधान, यहां की पुलिस और नेता-मंत्री, आदमी देखकर एक्शन लेते थे और कोरोना फैलाने वाली एक बड़ी जमात को उसने टच ही नहीं किया और आंखों पे पट्टी बांध ली। 
ये देश के साथ, सैकड़ों किलोमीटर पैदल चल रहे मजदूरों के साथ, दारू के लिए तरस रहे मिडिल क्लास के साथ, किटी पार्टी को तरस रहे एलीट क्लास के साथ और कोरोना से जंग में जीत के लिए महाभारत युद्ध के 18 दिन की बजाय 21 दिन मांगने वाले प्रधान जी के साथ धोखा होगा। ये धोखा नहीं होना चाहिए।

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