कोरोना महामारी ने सबको थका दिया है, मदद करने वाले हाथ भी लगभग थकने लगे हैं?


श्याम मीरा सिंह 
महामारी ने सबको थका दिया है, मदद करने वाले हाथ भी लगभग थकने लगे हैं। लेकिन गौर करने वाली बात है बिहार में कोई काम आन पड़ता है तो लोग पप्पू यादव को टैग करते हैं, तेजस्वी यादव को टैग करते हैं। क्योंकि उन्हें उम्मीद रहती है कि यहां से कोई मदद मिलेगी। लोग सोनू सूद को भी टैग करते हैं क्योंकि बीते दिनों वहां से मदद मिलती रही है।
लेकिन मैंने ऐसे एक भी शख्स को नहीं देखा जिसने रामविलास पासवान, चिराग पासवान, जीतनराम मांझी को टैग किया हो। सेम उत्तरप्रदेश में है मुसीबत आने पर लोग सपा के नेताओं को याद करते हैं, अखिलेश यादव को याद करते हैं, इस उम्मीद में कि शायद कोई मदद मलेगी।
उम्मीद का ये भरोसा एक दिन की कमाई नहीं है, सालों में बनती है, सालों में बिखरती है। लेकिन सोचता हूँ लोग बसपा को टैग क्यों नहीं करते? रामदास अठावले को क्यों नहीं करते? उदित राज को क्यों नहीं करते? बीते वर्षों में कहीं न कहीं इन नेताओं ने अपना विश्वास खोया है।
लोगों ने इनसे उम्मीदें करना बंद कर दिया है। जिन नेताओं के नाम यहां गिना रहा हूँ उनमें से किसी का प्रशंसक या किसी का भी विरोधी नहीं हूं। लेकिन आजकल का फैक्ट्स यही कहता है। राजद और सपा ने कई मामलों में मजबूती दिखाई है वहीं दलितों के वोटों को उनके नेताओं ने आरएसएस के हाथों बेच दिया है।

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