12 रूपए घंटे की मजदूरी करने वाली मंगला की बेटी दो दिन से भूखी है, आखिर कहाँ गया 20 लाख करोड़ का आर्थिक पैकेज?


आवेश तिवारी 
एक मंगला है । मंगला अपने तीन बच्चों के साथ पिछले दो सालों से पूर्वी उत्तर प्रदेश में सोनभद्र की पत्थर खदानों में काम करती थी। उसे और अन्य महिलाओं को जिन्हें रेजा कहा जाता है दिन भर पत्थरों के साथ पीसने के बावजूद केवल 12 रूपए घंटे की मजदूरी मिलती है। मंगला जैसे मजदूर छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड और एमपी के गरीब जिलों से आते हैं। जहां भूख , रोग पर ही नही मौत पर भी भारी है।
मंगला और उसका पति प दोनों मिलकर मेहनत करने के बावजूद महीने भर में  4-5 हजार रुपयों से ज्यादा नहीं कमा पाते थे ,उसमे भी एक हिस्सा पति अपने माता पिता के पास गढ़वा बिहार भेज देता था। अब चार महीने से खदाने पूरी तरह से बंद है क्रशर भी बन्द। तकरीबन डेढ़ लाख लोग जिनमे से आधी रेजाएँ हैं भुखमरी के कगार पर हैं।यह वो लोग है जो अपने खाने पीने का रोज इंतजाम करते हैं।
पिछले महीने सोनभद्र गया तो हमने पूछा  क्या तकलीफ है मंगला ? वो मेरा सवाल सुनने के बाद वह अपनी बिटिया की आँखों को घूरती रही फिर मुझे अनदेखा करते हुए कही "हमारी बिटिया दो दिनों से भूखी है
छोटा बेटा भी बीमार है मालिक के पास पैसा नहीं है ,न ही हमारे दुखों को समझने का कलेजा, अब हम किससे कहें क्या कहें  "... वाह सरकार, वाह रे मोदी तेरा 20 लाख करोड़, वाह री मीडिया। आप बताइए यह खबर नही है?

Post a Comment

0 Comments