जानिए ऐसा क्या हुआ था जो इंदिरा गाँधी ने अपने भरोसेमंद नेता से पूछा, तुम महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री हो ना, क्या नाम है तुम्हारा ?


Sudhindra Mohan Sharma
हमारे देश की आधुनिक राजनीति का इतिहास बहुत अधिक लिखा नही गया है, तो कुछ  घटनाओं के बारे में भाजपा के , और कांग्रेस के भी, हमारे युवा और किशोर साथियों को पता नहीं हैं. उन्हीके लिये यह प्रस्तुत है. कुछ वरिष्ठों का भी रिवीजन हो जाएगा इस किस्से के माध्यम से.
तो किस्सा ये है कि इंदिरा जी प्रधानमंत्री थीं पूरे भारत मे 22 राज्य थे और अधिकांश राज्यों में कांग्रेसी सरकारें थीं.
इन्ही कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों को एक  बैठक में  दिल्ली बुलवाया गया. बैठक के पूर्व इंदिरा गांधी से औपचारिक परिचय हेतु सारे मुख्यमंत्री कतारबद्ध खड़े हुए थे.
इंदिरा जी सबसे परिचय करने जा रहीं थीं लेकिन उसके पूर्व उनकी नजर कतार में खड़े ए आर अंतुले पर पड़ी जो उस समय महाराष्ट्र के बहुत लोकप्रिय मुख्यमंत्री हुआ करते थे और इंदिरा जी के बहुत विश्वासपात्र थे. इंदिरा जी की गुड बुक्स में वो हैं इसका बखान भी वे अपने सहयोगियों से आए दिन कर देते थे. उनके बारे में कुछ शिकायतें भी दिल्ली तक पहुंची थीं और इंदिरा जी को यह बिल्कुल अच्छा नही लग रहा था कि उनके विश्वासपात्र होने की बात प्रचारित कर अंतुले महाराष्ट्र में और अन्य जगहों पर भी कुछ लाभ प्राप्त कर रहे  थे. इसमें एक सीमेंट घोटाला भी था जो उस योजना में हुआ था जिसे अंतुले ने स्व. संजय गांधी के नाम पर शुरू किया था.
इंदिरा जी नाराज थीं और सबके सामने अंतुले से यह नाराजगी दिखाने का मौका भी था, और यह दिखाने का भी कि कोई उनके वफादार होने को भुनाने की कोशिश न करे.
वे परिचय प्राप्त करने के पहले ही बीच में ही रुकीं, मुड़ी और अंतुले की ओर अंगुली उठा कर पूछा , यू,  यू आर द चीफ मिनिस्टर ऑफ महाराष्ट्र, व्हाट इज योर नेम ..... तुम महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री हो ना, क्या नाम है तुम्हारा ?
हॉल में सन्नाटा खिंच गया , अंतुले जी हतप्रभ कि मैडम मेरा नाम भूल गईं , और जब तक वे इस स्थिति से बाहर आ कर गला साफ कर अपना नाम बताते, इंदिरा जी आगे बढ़ चुकीं थीं क्योंकि उन्हें जवाब की जरूरत नही थी, उन्हें जो बताना था, वे बता चुकीं थीं.
अब आप इसे ईगो कहें , दम्भ कहें, या अपने सहयोगियों के प्रति अनुचित व्यवहार, इंदिरा जी का मैसेज पहुंच चुका था, सभी मुख्यमंत्रियों को, लाउड एंड क्लियर.
आज इस तरह की लीडरशिप की आवश्यकता है या नही , इसकी बजाय यह समझने की आवश्यकता है कि अपने विश्वासपात्रों को भी कभी कभी अपनी टीम के व्यापक हित में शॉक ट्रीटमेंट की जरूरत होती है.
ए आर अंतुले साहब का पूरा नाम था अब्दुल रहमान अंतुले और वे महाराष्ट्र के एकमात्र मुस्लिम मुख्यमंत्री हुए हैं अब तक.
वैसे बता दूं कि इस घटना के कुछ महीनों बाद ही मुम्बई हाई कोर्ट ने उसी सीमेंट घोटाले में अंतुले को दोषी पाया, जिसके बारे में इंदिरा जी को शिकायतें मिलीं थीं, और अंतुले जैसे प्रतिभाशाली मुख्यमंत्री को पद छोड़ना पड़ा.  पर वे हमेशा पार्टी के वफादार रहे, उन्होंने कांग्रेस नही छोड़ी और इसके बाद 1989 से 1998  तक और 2004 से 2009 तक वे सांसद और कांग्रेस की सरकारों में दो बार केंद्रीय मंत्री भी रहे.
बॉटम लाइन ये है कि लीडरशिप स्टाइल आपकी कैसी भी हो, लीडरशिप तो होनी चाहिए, और अपने विश्वासपात्र लोगों को संभालने और उन्हें समय समय पर चेताने की जिम्मेदारी आपकी है, भले ही फिर वे आपके हमउम्र क्यों न हों .
दूसरा सबक यह कि कांग्रेस के युवाओं को यह इतिहास पता होना चाहिए , उन्हें पढ़ना चाहिए, समझना चाहिए. और केवल युवाओं को ही नही, युवावस्था के पार जा चुके नेताओं जिसमे राहुल और प्रियंका भी शामिल हैं उन्हें भी ये जानना चाहिए.
तीसरा, जो अंतुले जी से सीखना है (यह जरूर है कि उनका बेटा, एक मुस्लिम नेता पिछले दिनों शिवसेना में शामिल हो गया) वह ये कि पार्टी के साथ बने रहने में , और अपना काम करते रहने में ज्यादा फायदा है, बजाय पार्टी छोड़ कर जाने के. 

Comments

Popular posts from this blog

Bollywood Celebrities Phone Numbers | Actors, Actresses, Directors Personal Mobile Numbers & Whatsapp Numbers

जौनपुर: मुंगराबादशाहपुर के BJP चेयरमैन ने युवती के साथ कई महीने तक किया बलात्कार, देखें वायरल वीडियो

किन्नर बोले- अगर BJP से सरकार नहीं चल रही है तो हमें दे दे कुर्सी, हम सरकार चलाकर दिखा देंगे