सचिन पायलट सहित कांग्रेस के 18 विधायक 25-25 करोड़ रुपए में बिक गए


एसपी मित्तल 
कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी से लेकर पार्टी प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला तक ने प्रयास किए, लेकिन प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सचिन पायलट के साथ बैठे कांग्रेस के 18 विधायक 14 जुलाई को दिल्ली से जयपुर नहीं लौटे हैं। यानि कांग्रेस के 19 विधायकों के बगैर ही जयपुर में विधायक दल की बैठक हो रही हैं। 12 और 13 जुलाई के घटनाक्रम से साफ जाहिर है कि कांग्रेस के विधायकों ने सचिन पायलट के नेतृत्व में बगावत कर दी है।
11 जुलाई को भी एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत ने कहा कि 25-25 करोड़ रुपए में कांग्रेस के विधायकों को खरीदा जा रहा है। विधानसभा में कांग्रेस के मुख्य सचेतक महेश जोशी की शिकायत पर तो स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी)ने जांच भी शुरू कर दी है और सरकार के डिप्टी सीएम सचिन पायलट को नोटिस देकर तलब भी कर लिया। इतना ही नहीं तीन निर्दलीय विधायकों के विरुद्ध भी एसीबी ने मुकदमा दर्ज कर लिया। यानि सीएम गहलोत और सरकार की जांच एजेंसियों को पता था कि कांग्रेस के विधायक 25-25 करोड़ में बिक रहे हैं।
अब चूंकि पायलट के नेतृत्व में 18 विधायकों ने दिल्ली में डेरा जमा लिया है, इसलिए सीएम गहलोत और जांच एजेंसियों को यह बताना चाहिए कि पायलट सहित इन 18 विधायकों ने 25 करोड़ रुपए की राशि कैसे प्राप्त की। अशोक गहलोत के दावे के अनुरूप यदि 19 विधायकों की कीमत लगाई जाए तो यह राशि 475 करोड़ रुपए की होती है। इतनी बड़ी राशि विधायकों में किस प्रकार बांटी गई। क्या यह राशि जयपुर में दी गई या फिर दिल्ली में? अब इन विधायकों ने यह राशि कहां कहां पर छिपा कर रखी है। 475 करोड़ रुपए की राशि देने वाले कौन थे? इनमें से भाजपा के कितने नेता थे।
गहलोत और जांच एजेंसियों के अधिकारी यह भी बताएं कि क्या सचिन पायलट जैसा कद्दावर विधायक भी 25 करोड़ रुपए में बिक गया। आखिर मसूदा के विधायक राकेश पारीक और टोंक के विधायक सचिन पायलट में कुछ तो फर्क होगा? जहां तक राकेश पारीक का सवाल है तो उनके लिए 25 करोड रुपए की राशि बहुत बड़ी है। यह सही है कि यदि पायलट और उनके समर्थक विधायक राजस्थान के किसी रिसोर्ट या होटल में होते तो एसओजी और एसीबी के अधिकारी अब तक गिरफ्तार कर लेते।
चूंकि सभी 19 विधायक दिल्ली में हैं, इसलिए राजस्थान पुलिस की हिम्मत नहीं हो रही है। आयकर विभाग के अधिकार केन्द्रीय सुरक्षा बलों के माध्यम से राजस्थान में छापामारी कर सकते हैं, लेकिन राजस्थान की पुलिस दिल्ली में घुस नहीं सकती। अब देखना है कि सीएम गहलोत 475 करोड़ रुपयों का मामला कब उजागर करेंगे। अलबत्ता गहलोत की इतनी रोकथाम और होहल्ले के बाद भी पायलट सहित 18 विधायकों का दिल्ली पहुंचना बहुत मायने रखता है।
यह तब हुआ जब गहलोत ने 10 जुलाई को ही राजस्थान से बाहर जाने पर पाबंदी लगा दी थी। यह पाबंदी अभी भी लगी हुई है, जिससे हजारों लोगों को परेशानी हो रही है। हालांकि जिस मकसद से पाबंदी लगाई थी, वह मकसद पूरा नहीं हुआ। अच्छा हो कि गहलोत ऐसी पाबंदी हटा दें। कांग्रेस का कोई विधायक राजस्थान की सीमा से बाहर न जाए, इसके लिए ही एसओजी और एसीबी को सक्रिय किया था, लेकिन फिर भी सचिन पायलट इस बार 18 विधायकों को दिल्ली पहुंच गए। 

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