इन मस्जिदों को बहुसंख्यकों ने ताक़त के बल पर मंदिरों में कन्वर्ट कर दिया


जब हम भारत के इतिहास के वो पन्ने पलटते है जब इस्लाम धर्म के उदय होने का शुरुआती दौर चल रहा था तो हम भारत के इतिहास में मुस्लिम बादशाहों द्वारा मंदिरो को तोड़ने और लूटने जैसी कहानियों से दो चार होते हैं ! मोहम्मद बिन कासिम, महमूद गजनवी और मोहम्मद गोरी के शासनकाल में मंदिरों को लूटने और तोड़ने के किस्से भरे पड़े हैं ! उसके बाद दिल्ली सल्तनत और मुग़ल साम्राज्य में भी हमें ऐसे ही किस्से कहानियाँ पढ़ने को मिलती है ! लेकिन किसी इतिहासकार ने कभी मुसलमानो के पूजा घरों को मंदिर में कन्वर्ट करने के बारे में कुछ नहीं लिखा ! तो चलिए आज मैं आपको कुछ उन मस्जिदों के बारे में बताता हूं जिन्हें बहुसंख्यकों ने ताक़त के बल पर मंदिरों में कन्वर्ट किया है !
वैसे तो हरियाणा में बहुत सी मस्जिदें है जो सालों से बंद पड़ी है ! जिनमें मुसलमानो को नमाज़ अदा करने की इजाज़त नहीं है ! लेकिन यहां सबका ज़िक्र करना संभव नहीं है इसलिए कुछ महत्वपूर्ण मस्जिदों के बारे में वर्णन किया गया है !

1- जामा मस्जिद, फर्रुखनगर (हरियाणा)

गुरुग्राम जिले के फर्रुखनगर शहर की स्थापना मुगल गवर्नर फौजदार खान ने 1732 ई• में की थी ! इसका नाम मुगल सम्राट फर्रुखसियर के नाम पर रखा गया था ! शहर की स्थापना के तुरंत बाद फौजदार खान को फर्रुखनगर का नवाब घोषित किया गया था और शहर की सीमाओं के भीतर ढांचागत संरचनाएं शुरू हुई थीं ! इन संरचनाओं में से एक जामा मस्जिद थी ! यह शहर की प्रमुख मस्जिद थी जहां सभी मुस्लिम इकट्ठा होते थे और जुमे की नमाज अदा करते थे ! इतिहासकार राणा सफ़वी लिखते हैं कि पाकिस्तान से शरणार्थियों के आने के बाद मस्जिद को मंदिर और गुरुद्वारे में बदल दिया गया ! मस्जिद की मीनारों में से एक मीनार आज भी लंबी है, हालांकि एक खराब हालत में है !

2- खिलजी जामा मस्जिद, दौलताबाद (औरंगाबाद) महाराष्ट्र

अलाउद्दीन खिलजी के पुत्र कुतुबुद्दीन मुबारक खिलजी ने 14 वीं शताब्दी की शुरुआत में दौलताबाद के राजसी किले में एक विशाल मस्जिद के निर्माण का आदेश दिया यह आकार में इतना बड़ी थी कि कभी खिलजी वंश के विशाल साम्राज्य के दायरे में सबसे बड़ी मस्जिदों में से एक थी ! इसके निर्माण के बाद सदियों तक मस्जिद का उपयोग जारी रहा ! वास्तव में कब, इसका कोई रिकॉर्ड नहीं है, लेकिन मस्जिद के मेहराब में एक मूर्ति स्थापित की गई थी ! तत्पश्चात स्थानीय लोग वहाँ पूजा करने लगे और भव्य मस्जिद को भारत माता मंदिर कहा जाने लगा !

3- दाना शिर मस्जिद, हिसार (हरियाणा)

एक समय हिसार एक बड़ी मुस्लिम आबादी का दावा करता था ! यह शहर कई इस्लामी स्मारकों का घर है, जिनमें से कुछ फिरोज शाह तुगलक (1351 से 1388 ईस्वी) के शासन के दौरान बनी हैं। जैसा कि संतों की कब्रों के लिए प्रथा है, मस्जिदों को उनके कब्रों के बगल में खड़ा किया जाता है ! दाना शिर मस्जिद अलग नहीं है क्योंकि इसे दाना शिर बाहुल शाह की कब्र के बगल में बनाया गया था ! विभाजन के ठीक बाद से मंदिर के रूप में उपयोग किए जाने के बावजूद इस मस्जिद की संरचना अभी भी एक मस्जिद की तरह दिखती है, जिसके तीन बड़े गुंबद क्षितिज पर हावी है !

4- जामा मस्जिद, सोनीपत (हरियाणा)

सोनीपत में सबसे प्रमुख पर्यटक स्थल इसके मुगल और पूर्व-मुगल युग के इस्लामिक स्मारक हैं ! जिनमें ख्वाजा खिज्र की कब्र, एक पुराने किले के खंडहर और जामा मस्जिद शामिल हैं, जिसे अब दुर्गा मंदिर के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है ! इस तथ्य के बावजूद कि वर्तमान में इसे मंदिर के रूप में उपयोग किया जा रहा है, स्थानीय लोग अभी भी इसे बदी मस्जिद (बड़ी मस्जिद) के रूप में संदर्भित करते हैं ! संरचना के बाहरी हिस्से को शायद ही बदला गया है क्योंकि यह दो मीनारों द्वारा अभी भी वैसा ही दिखता है। हालाँकि, मस्जिद के अंदरूनी हिस्से में कई संशोधन हुए हैं, लेकिन मुख्य केंद्रीय गुंबद पर जटिल डिजाइन जो मस्जिद के अवशेषों के लिए प्रसिद्ध थे आज भी वैसे ही है ! माना जाता है कि मस्जिद का निर्माण 19 वीं सदी के शुरुआती दौर में हुआ था !
Zafar Saifi की फेसबुक वाल से !

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