लोकतंत्र के जिस दौर में हम आ गए उसमे संविधान को तार तार करना ही मास्टर स्ट्रोक कहलाया जाने लगा है?


गौरव त्यागी 
लोकतंत्र के जिस दौर में हम आ गए उसमे संविधान को तार तार करना ही मास्टर स्ट्रोक कहलाया जाने लगा है । राजस्थान के मौजूदा प्रकरण में संविधान और लोकतंत्र की जिस तरह से धज्जियां उड़ रही हैं वो देश की सत्ता में बैठी पार्टी की संविधान के प्रति सोच पर एक बार फिर से सवाल खड़े करता है । राजस्थान में राजनीतिक संकट कांग्रेस की अंदरूनी कलह की वजह से आया है इससे कोई इनकार नहीं कर सकता । लेकिन इसकी आड़ में बीजेपी ने जो हदें पार की हैं आने वाली राजनीति में उसके गंभीर परिणाम होंगे । कांग्रेस की अंदरूनी कलह कांग्रेस के खुद के लिए घातक हो सकती है संविधान के लिए नहीं लेकिन बीजेपी जो कर रही है वो सीधा संविधान पर वार है ।
चुनी हुई सरकार को गिराने के लिए विधायकों को खरीदने के केंद्रीय मंत्रियों तक के ऑडियो सामने आ गए । लेकिन खरीद फरोख्त पर सवाल उठाने के बजाय इसे भी मास्टर स्ट्रोक का तमगा दे दिया । जिस ऑडियो की गूंज देश के कोने कोने में गूँजनी चाहिए थी उस पर मास्टर स्ट्रोक का टैग लगा कर शांत कर दिया गया ।
बीजेपी बसपा के विधायकों के कांग्रेस में शामिल होने को अपने कुकर्मों का आधार बना रही है । लेकिन ध्यान रहे बसपा के विधायकों पर दल बदल कानून लागू नहीं होता है । इसलिए वो कानूनी रूप से गलत नहीं है । लेकिन बीजेपी जो कर रही है वो सरासर संवैधानिक रूप से गलत है ।
राजस्थान के मुख्यमंत्री विधानसभा का सत्र बुलाकर खुद फ्लोर टेस्ट कराना चाहते हैं लेकिन राज्यपाल इसकी भी इज़ाज़त नहीं दे रहे हैं । कोरोना का बहाना बनाकर विधानसभा का सत्र टालने की कोशिश हो रही है । लेकिन बीजेपी बिहार में कोरोना को भूल जाती है जहां 3 अगस्त से विधानसभा का सत्र शुरू हो रहा है ।
अब अगर आज सवाल नहीं उठाया तो आगे चलकर जब कांग्रेस सत्ता में आएगी तब बीजेपी की इस क्रिया की प्रतिक्रिया देगी तो हैरान मत होना । क्योंकि लोकतंत्र की ऐसी तैसी करने में कांग्रेस भी कम नहीं रही है । वक़्त रहते लोकतंत्र और संविधान को बचाना जरूरी है ।
NOTE- राजस्थान में राजनीतिक संकट के लिए सिर्फ और सिर्फ कांग्रेस की अंदरूनी कलह ही जिम्मेदार है इससे इनकार नहीं है । पोस्ट लिखने का मकसद सिर्फ संवैधानिक प्रतिक्रिया को ध्वस्त करने से है ।

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