अम्बेडकर नगर में अवैध मेडिकल स्टोरों की भरमार, अधिकारी जानकर भी अंजान


गणेश मौर्य 
अम्बेडकरनगर: जिले में बिना नाम लाइसेंस और फार्मासिस्ट के मेडिकल स्टोरों की भरमार कई जगह मेडिकल स्टोर बिना फार्मासिस्ट के ही संचालित हो रहे हैं। यह सारा खेल नौकरनामे की आड़ में चल रहा है। ऐसा नहीं है कि जनपद की ड्रग इस्पेक्टर अनीता कुरील" को पता नहीं सूत्रों की माने तो चाह कर भी कुछ नहीं कर सकता
विभाग, ऐसा नहीं है कि जिला चिकित्सा विभाग इससे बेखबर है, बल्कि सब कुछ जानते हुए भी अधिकारी कार्रवाई को लेकर उदासीन रवैया अपनाए हुए हैं। दरअसल, जिले में करीब हजारों से ज्यादा मेडिकल स्टोर्स हैं।जब कभी छापेमारी होती है तो कई दुकानों पर सम्बन्घित लाइसेंस धारक नदारद ही मिलते हैं।
इसकी एवज में लाइसेंस धारक को मेडिकल संचालित करने वाले की ओर से मासिक या सालाना रकम दी जाती है। इतना ही नहीं कई मेडिकल्स पर फार्मासिस्ट ही नहीं होते हैं। खास बात यह है कि यहां ऎसे लोग दवाएं देते हैं, जिन्हें उसकी पर्याप्त जानकारी भी नहीं होती। इन मेडिकल स्टोर संचालकों के खिलाफ न तो ड्रग इंस्पेक्टर की पर्याप्त कार्रवाई की जा रही है न ही चिकित्सा विभाग की ओर से। गैर डिग्री-डिप्लोमाधारी की ओर से मेडिकल का संचालन किए जाने से मरीज के साथ कोई भी हादसा हो सकता है। दवाइयों की सही जानकारी नहीं होने से मरीज को गलत दवाइयां दी जा सकती हैं। ऎसे में मरीज की जान पर बन सकती है। दवाइयों की जानकारी के अभाव में मरीज को सही दवा मिलने में संदेह रहता है। बिना फार्मासिस्ट के चल रहे मेडिकल्स पर मरीज को सही दवा मिल पाएगी, इसकी कोई गारंटी नहीं रहती है।
अधिकतर मेडिकल स्टोर संचालक मरीजों को दवाएं तो देते हैं, लेकिन उन्हें बिल नहीं देते। मेडिकल स्टोर्स पर दवाएं भी विक्रेता मुंह देखकर ही देते हैं।यदि उन्हें कोई ग्रामीण दिखा तो डॉक्टर की ओर से लिखी गई ब्रांडेड दवाओं की जगह उसी फार्मूले की लोकल व जैनरिक दवाएं थमा दी जाती हैं। इससे उन्हें अधिक लाभ होता है। यदि बिल देंगे तो बिल में दवा की कंपनी भी उल्लेखित करनी पड़ती है। यही वजह है कि कई मेडिकल संचालक मरीजों को दवाओं का बिल नहीं देते हैं।

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