हमारे देश के महापुरुष ताली, थाली, दीया, शंख, नगाड़ा, भाभी जी पापड़ और हनुमान चालीसा से कोरोना भगा रहे हैं?


कृष्णकांत 
‘रोज पांच बार हनुमान चालीसा पढ़ें, कोरोना खत्म हो जाएगा’. बीजेपी सांसद प्रज्ञा ठाकुर से इससे ज्यादा की उम्मीद किसे होगी? यह उनकी समझदारी का चरम है, लेकिन जनता को अपने बच्चों और अपने देश के ​भविष्य के लिए चिंतित होना चाहिए. दो दिन पहले एक और मंत्री जी कह रहे थे कि भाभी जी पापड़ खाने से कोरोना के प्रति एंटीबॉडी उत्पन्न हो जाएगी.
भारत समेत सारी दुनिया के डॉक्टर वैज्ञानिक रिसर्च में लगे हैं. इधर हमारे महापुरुष लोग ताली, थाली, दिया, शंख, नगाड़ा, भाभी जी पापड़ और हनुमान चालीसा से कोरोना भगा रहे हैं. हम दुनिया को यह संदेश दे रहे हैं कि हमारे जैसा जाहिल देश अब दुनिया में दूसरा मौजूद नहीं है. हमारे देश का नेतृत्व ही हमारे लिए राष्ट्रीय शर्म का विषय बन गया है.
ईश्वर में आस्था रखने, विश्वास और धैर्य बनाए रखने की सलाह देने में कोई बुराई नहीं है. ईश्वर जनता का अंतिम सहारा होता है. लेकिन जब आप हनुमान चालीसा से कोरोना खत्म करने का सुझाव देते हैं, तो ये हनुमान जी का भी अपमान है और पूरे देश की सामूहिक समझदारी का भी.
इस देश में जितना पुराना साहित्य उपलब्ध है, लगभग तभी से चिकित्सा शास्त्र के प्रमाण भी उपलब्ध हैं. न हम अपनी आधुनिकता और अपनी वैज्ञानिक क्षमता का सम्मान कर पा रहे हैं, न ही अपनी परंपरा और अपनी मेधा का ही सम्मान कर पा रहे हैं. कमाल तो ये है कि ये सभी अपने को घनघोर राष्ट्रवादी कहते हैं!
क्या अब इस देश के माता पिता अपने बच्चों को सिखाएंगे कि बीमार पड़ने पर अस्पताल मत जाओ, बैठ कर धूनी रमाओ? क्या हमारे नेता भी करते हैं? प्रज्ञा ठाकुर खुद बीमार थीं और अस्पताल जाती रही हैं. किसी नेता का मूड़ भी पिराए तो भाग कर देश के सबसे अच्छे अस्पताल में पहुंचता है. वही नेता जनता को पोंगापंथी में झोंक रहे हैं.

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