वो फ़िल्म जिसकी हीरोइन पूरी फिल्म में एक शब्द नहीं बोलती...


अंकुर मौर्य 
बहुत दिन होगए थे कोई फ़िल्म नहीं देखी थी, ना किसी का रिव्यु लिखा था.. हर बार सोचता था लेकिन ख़बरों में ही व्यस्त हो जाता था और समय नहीं मिलता था, आज दफ्तर की छुट्टी थी तो Netflix पर "चमन बहार" देखी जिसने मुझे स्कूल की एक घटना याद दिला दी, पहले फ़िल्म के बारे में बताता हूं..
कोटा वाले जीतू भैया यानी जितेंद्र कुमार ने हाल ही में पंचायत वेब सीरीज़ से सबका दिल जीता था वहीं इस फ़िल्म में भी उन्होंने अपना लीड रोल बखूबी निभाया है,... फ़िल्म की कहानी एक छोटे से शहर की है इसका मुख्य पात्र "बिल्लू" जिसकी अपने पिता से बनती नहीं वो गाँव मे अपनी अलग पहचान बनाना चाहता है, और अपने पिता द्वारा दिलवाई जा रही नौकरी जो चौकीदारी की है वो ना करके पान की दुकान खोलना चाहता है...
बिल्लू अपनी दुकान खोलता भी है लेकिन जिस जगह पहले लोगो की भीड़ हुआ करती थी अब जब उसने वहां दुकान खोली तो किसी कारण से यहां अब एक मक्खी भी नहीं भिनभिनाती, लेकिन बिल्लू की किस्मत करवट तब बदलती है...
जब उसकी दुकान के सामने एक परिवार रहने आता है  और उस परिवार में होती है एक सुंदर लड़की जो फर्राटे दार स्कूटी चलाती है और हॉफ पेंट पहनती है.. यानी एक मॉर्डन लड़की होती है जो छोटे शहर के लड़के कम ही देख पाते है , रिंकु नाम की इस लड़की के पूरे शहर के लड़के दीवाने हो जाते हैं जब-जब वो स्कूटी से स्कूल आती-जाती तो उसके पीछे तमाम लड़के उसका पीछा करते हुए जाते , अब बिल्लू की दुकान के सामने ही रिंकु का घर होता है तो लौंडो का सारा जमावड़ा बिल्लू की दुकान पर ही लगता है, केवल उस लड़की की वजह से ताकि लौंडो को उसको देखने का मौका मिल जाए..
इन सबके बीच बिल्लू की दुकान तो दबा के चल ही रही थी लेकिन बिल्लू भी उस लड़की के प्यार में पड़ जाता है और यहां बिल्लू पिघल जाता है जो उसके धंधे पर असर डालती है.. बाकी आप फ़िल्म में देखिए सबकुछ बता दूंगा तो क्या ही रह जाएगा..
फ़िल्म में तमाम छोटे-छोटे किरदार है जो इस फ़िल्म को रोमांच से भर देते हैं...सिंपल सी कहानी है जिसे बेहद ही खूबसूरती से दर्शाया गया है.. कुल मिलाके बेहद ही प्यारी फ़िल्म है ... जरूर देखें

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