भाषणों के शेर, संकट में ढेर


संजय कुमार सिंह 
इस खबर के अनुसार, राहुल गांधी ने 27 जुलाई को (कल ही) कहा, अगर मेरा पूरा कैरियर चौपट हो जाए तो भी मुझे परवाह नहीं है। मैं झूठ नहीं बोलने वाला। क्या यह साधारण बात है? दो कौड़ी के कैरियर के लिए लोग क्या नहीं करते हैं और उसपर बने रहने के लिए क्या नहीं किया है। ऐसे में राहुल गांधी का राजनीति को अपना कैरियर मानना और यह कहना भी कम नहीं है। पर प्रशंसा?
राहल गांधी का यह सवाल क्या साधारण है? - प्रधानमंत्री जी, क्या आपने झूठ बोला?
यह 19 जून के उस सर्वविदित बयान से संबंधित है जब उन्होंने कहा था कि भारत की सीमा में न कोई आया है ना किसी पोस्ट पर किसी और का कब्जा है। अखबार ने लिखा है कि 38 दिन गुजर गए हैं, तीन दौर की वार्ता हो चुकी है। सवाल है कि जब कोई आया ही नहीं तो क्या मौसम की चर्चा हो रही है।
राहुल लगातार बोल रहे हैं। सवाल उठा रहे हैं। पर कोई जवाब नहीं। इस संबंध में कांग्रेस पार्टी का एक ट्वीट भी था, भाषणों के शेर, संकट में ढेर। बेशक राहुल गांधी ने भाषण वीर की चुप्पी को कड़ी टक्कर दी है। अगर राहुल गांधी को पप्पू कहा जा सकता है तो यह क्या है उसका भी कोई नामकरण नहीं होना चाहिए? और राज्यपाल का 21 दिनों का खेल भी खबर में है।

0/Post a Comment/Comments

Previous Post Next Post
loading...