मोदी सरकार के आने के बाद एक अस्पताल, एक भी स्कूल, एक भी बड़ी यूनिवर्सिटी इसलिए नहीं बनी, क्योंकि....


हमारे प्रधानमंत्री ने कोरोना महामारी को आपदा में अवसर करार दिया है। आपके लिए यह कोई अवसर भले न हो, लेकिन कुछ लोगों के लिए ये मौका है लूटने का। 
सरकार के लिए भी यह मौका है, इन लुटेरों को बख्श देने का। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने 1 लाख 23 हज़ार करोड़ का लोन माफ किया है। यानी जो पैसा आप अपनी मेहनत की कमाई से बचाकर बैंक में जमा करते हैं, उन्हें कुछ लोग लूटकर भाग गए।
स्टेट बैंक इसे लोन माफी नहीं मानती। लेकिन पुणे स्थित सजग नागरिक मंच के विवेक वेलेंकर ने ऐसे दस्तावेज़ पेश किए हैं, जिससे साफ होता है कि बैंक झूठ बोल रहा है। बैंक 2013 से 2020 तक महज़ 8969 करोड़ का लोन ही वसूल कर पाया है। यह बैंक से लिये गए कुल लोन का 7% है। बाकी 1.23 लाख से ज़्यादा लोन डूब गया।
लोन किन लोगों ने खाया? वीडियोकॉन, भूषण पावर एंड स्टील, रिलायंस, जेट एयरवेज, रुचि सोया जैसी कंपनियों को आप दिवालिया समझते हैं? शेयर बाजार में ये कंपनियां अच्छा कमा रहीं हैं। लेकिन लोन नहीं चुकाना चाहतीं। इसी साल अप्रैल में रिज़र्व बैंक ने 68 हज़ार करोड़ से ज़्यादा के लोन माफ किये थे।
ये पैसा किसका है? ये देश की 130 करोड़ जनता का है। मोदी सरकार की नाक के नीचे से क्या कोई कंपनी लोन डकारकर छूट सकती है? ये कॉर्पोरेट और सरकार की मिलीभगत को दर्शाता है। बिना मिलीभगत के यह संभव नहीं।
आप यकीन नहीं करेंगे कि मोदी सरकार के आने के बाद एक अस्पताल, एक भी स्कूल, एक भी बड़ी यूनिवर्सिटी इसलिए नहीं बनी, क्योंकि विकास में खर्च होने वाला पैसा कंपनियों की उधारी चुकाने में खर्च हो रहा है।
जी हां, आपके टैक्स के पैसे से मोदी सरकार कंपनियों की उधारी चुका रही है। बदले में क्या मिल रहा है? ज़रा सोचकर देखिये कि चुनाव में पानी की तरह बहाने और विधायकों की खरीद-फ़रोख़्त के लिए पैसा कहां से आ रहा है?

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