लालू का जंगल राज और योगी का रामराज्य, जंगल राज और रामराज्य का फ़र्क क्या होता है...


Shakeeb Rahman
1989 के लोकसभा चुनाव में जैसे ही जनता दल ने अपने घोषणा पत्र में ये शामिल किया कि अगर वो सत्ता में आई तो मण्डल कमीशन की शिफारिशों को लागू किया जाएगा , फिर क्या था ....बीजेपी में भूचाल आ गया....नवम्बर में चुनाव होने वाले थें.....जनता दल और विश्वनाथ प्रताप सिंह का जादू सर चढ़ कर बोलने लगा....इसका काट सिर्फ एक ही था ....कमंडल...
उस कमंडल की राजनीति  को चमकाने के लिए बलि के लिए बकरे की ज़रूरत थी.....और वो बकरा बना मुसलमान....
9 नवम्बर 1989 को आयोध्या में वीएचपी ने राम मंदिर के लिए शिलान्यास किया। बोफोर्स में घिरे राजीव गाँधी भी इसकी इजाजत इसलिए दे दिए क्योंकि वो हिन्दू वोट बैंक को अपने पक्ष में करना चाहते थें लेकिन उनका यह दाव उल्टा पड़ गया। मलाई बीजेपी खा गई, 1989 के चुनाव में वह 2 से 85 पर पहुंच गई और कांग्रेस इस कहावत को चरितार्थ कर गई....न ख़ुदा ही मिला न विसाल ए सनम , न इधर के हुए न उधर के हुए...
इतना ही नहीं पिछड़ो के सामने दुश्मन के रूप में मुसलमानों को खड़ा किया गया.....जो अब भी जारी है.....ज़रा सोंचिए.... पंचर बनाने वाला मुल्ला भला किसी का क्या छीन लेगा .....मुसलमानों की हालत तो बस ऐसी है कि नँगा नहाएगा क्या और निचोड़ेगा क्या .....( सच्चर कमेटी की रिपोर्ट पढ़िए )
1989 में जनता दल की सरकार बन जाती है और यहीं से लालू का जंगल राज शुरू होता है। लालू के कहने पर ही 7 अगस्त 1990 को बी पी सिंह ने मण्डल कमीशन की रिपोर्ट को लागू किया जो एक इतिहास बन गया। भारतीय राजनीति और समाज में सुनामी आ गई। सदियों से हाशिए पर पड़े पिछड़े वर्ग के लोगों में नई चेतना हिलोरे लेने लगी लेकिन अभी दुश्वारियां खत्म नहीं हुई , न्यायालय में इसको चुनौती दी गई वहाँ भी लालू ने इसके लिए जम कर लड़ा। अब लालू जैसे व्यक्ति की सरकार को ब्राह्मणवादी मीडिया जंगल राज ही तो कहेगा.....
आप कहेंगे लालू के राज में जुर्म बहुत होते थें....बिलकुल सही बात है.....योगी के राज में क्या उत्तर प्रदेश स्वर्ग बन गया है जिसमे कोई विकास दुबे पुलिस बल पर हमला करके 8 पुलिस वालों को मार डालता है.....एक पत्रकार की सिर्फ इसलिए हत्या कर दी जाती है क्योंकि उसने अपने भांजी को छेड़ने वालो के खिलाफ शिकायत की थी.....कुलदीप सिंह सेंगर तो याद होगा ....बलात्कार और हत्या का कैसा घिनौना खेल खेला था। फिर योगी राज को मीडिया जंगल राज क्यों नहीं कहता है ? ........नहीं ..नहीं.....ये कमंडल की राजनीति करने वाले हैं इनके राज को रामराज्य ही कहा जायेगा.....चाहे कानून व्यवस्था जितनी भी चौपट हो....
अब आइये फिर जंगल राज के लालू पर.....पिछले 6 साल में लालू को छोड़कर किस बड़े नेता को भ्रष्टाचार के लिए सज़ा हुई ?......किसी को नही.....जबकि 2014 में मोदी जी कहते थें कि उनकी सरकार बनी तो सारे भ्रष्टाचारी जेल में होंगें.... आज कल सब बीजेपी में हैं.....लालू को इसलिए जेल हुई क्योंकि वो नागपुर के आगे नतमस्तक होने को तैयार नहीं हुए.....
अब आते हैं मूल मुद्दे पर......आयोध्या में राम मन्दिर बनने वाला है....चलों अच्छा हुआ ...आयोध्या विवाद का सुलझना बहुत ही ज़रूरी था.....क्योंकि बीजेपी के पिटारे से संजीवनी बूटी निकल गई।
तो क्या अब बीजेपी मण्डल कमीशन की बाकी बची 20 शिफारिशों को लागू करेगी ? फिर मोदी जी पिछड़े वर्ग से होने का दावा भी करते हैं ........या बीजेपी फिर पिछडो को फिर एक नया गोली देगी....?
वैसे समझना लोगों को है.....जंगल राज और रामराज्य का फ़र्क क्या होता है.....

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