जब भी कोरोना काल में भारत का निष्पक्ष इतिहास लिखा जाएगा, तब इन 4 तस्वीरों का भी ज़िक्र होगा?


Soumitra Roy
जब भी कोरोना काल में भारत का निष्पक्ष इतिहास लिखा जाएगा, तब इन 4 तस्वीरों का भी ज़िक्र होगा। ताज़ा तस्वीर एमपी के गुना की है। वही गुना, जहां हाल में एक दलित परिवार ने पुलिस के ज़ुल्म से तंग आकर कीटनाशक खाया था।
कल गुना के जिला अस्पताल में गंभीर बीमार सुनील धाकड़ को उसकी पत्नी लेकर आई थी। उसके पास इलाज की पर्ची बनाने के भी पैसे नहीं थे। इलाज नहीं मिला तो 12 घंटे में सुनील मर गया। बेटे को लगा कि पिता सो रहे हैं। वह उन्हें जगाने की कोशिश कर रहा है।
बहुत मुमकिन है कि ये तस्वीरें बाद में इतिहास से हटा ली जाएं। अलबत्ता होना यह चाहिए कि इन तस्वीरों को मोदी और शिवराज सरकार के तमाम मंत्रियों, मीडिया संस्थानों के बोर्ड पर लगा दिया जाए। वे रोज़ इन्हें देखें तो उनकीं नज़रें यह सोचकर रोज़ झुक जाएं- कि उन्होंने तकरीबन रोज़ झूठ बोला कि सब ठीक है, देश तरक़्क़ी कर रहा है।
गुना ज्योतिरादित्य सिंधिया का इलाका है। उन्होंने अपनी निष्ठा बदली और भगवा चोले में आ गए। अब सरकार उनकी, नौकरशाह उनके, बिसात उनकी। शायद ग़रीब अवाम के प्रति उनकी निष्ठा बीजेपी में जाते ही मर चुकी हैं।
नेता, विधायक रोज़ अपनी निष्ठा बदल रहे हैं। निष्ठा बिक रही है। सरकारें गिराई जा रही हैं। लेकिन उन करोड़ों लोगों का क्या, जो अपनी निष्ठा बदलना चाहते हैं। नाकाम, नपुंसक निज़ाम को बदलना चाहते हैं, पर उसे झेलने को अभिशप्त हैं।
भोपाल में आज शाम से सब-कुछ बंद हो जाएगा। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत 3 दिन की चिंता कर लौट जाएंगे। यकीनन उनकी चिंता इस देश के स्वास्थ्य तंत्र, बढ़ते निजीकरण और मरते ग़रीबों के लिए नहीं होगी। उनकी चिंता राम मंदिर है। 5 अगस्त को दिए जलाने की है।
लेकिन, सुनील की पत्नी आरती के लिए संघ प्रमुख का क्या संदेश होगा, जिसके पास इलाज की पर्ची बनवाने के भी पैसे नहीं थे? सुनील के बेटे के लिए भागवत क्या कहेंगे, जो मां से पूछेगा या पूछ रहा होगा कि पिता क्यों सो गए और क्यों नहीं उठे?
पिता को खो चुके बच्चे के भविष्य पर भागवत के क्या विचार होंगे? शायद यही कि कुछ "देकर" मामला खत्म करो। इस तरह की खबरें नहीं आएं, इसके लिए यूपी सरकार की तरह कुछ करो। निष्ठा कभी सेलेक्टिव होती है क्या? अगर हां तो 5 अगस्त को एक दिया ज़रूर जलाएं और खुशी मनाएं।

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