भक्तों का अपमान भारत की सबसे बड़ी सेवा है?


मनीष सिंह 
भक्तो से निहायत स्तरहीनता से पेश आता हूँ। अपमानित करता हूं, गालियां देता हूँ, बुरी तरह झाड़ता हूँ। ज्यादातर ठंडे दिमाग से लिखता हूँ। कभी कभी जरूरत से ज्यादा भी हो जाता है। क़ई मित्र न उलझने की सलाह देते हैं। माफ करें, इस वक्त इनकी बेइज्जती भारत की सबसे बड़ी जरूरत है।
बहुत गुस्सा नही होता। अज्ञान पर तरस आता है, इतना चिढ़ा भी नही होता जितना प्रतीति होती है। हार्ड शब्दो का उपयोग इसलिए करता हूँ, कि इन्हें पता हो कि अज्ञान का प्रसार अपमान आमन्त्रित करता है। यह खुलासा, यह झटका, यह खीज जो झिंजोड दे, इन सिक माइंड्स की असल सेवा है।
ये स्टूडेंट है, लिखने बोलने में सक्षम और मुखर। जीवन और वातावरण नाश कर दें , इसके पहले, इन्हें वक्त रहते झाड़ देना जरूरी है। ये कमाए खाये लोग भी है। अंटी में पैसा है, स्टाफ, परिवार, दोस्त इनसे उलझते नही। समान सोच में कोई कॉन्ट्रा करता नही, असहमत लोग लिहाज में मुस्कुराकर टाल जाते है। इन्हें अज्ञान ही सच लगने लगता है। अहम और अज्ञान की मिलजुली आवाज बड़ी बुलंद होती है। इस बुलंद आवाज से देश भयाक्रांत है।
लिहाज छोड़िये। बेइज़्ज़ती कीजिये। उम्र, धन, प्रोफेशनल एक्सीलेंस के बावजूद उन्हें एक अनुभव दीजिये, जहां झूठी और नफरती बातो की वजह से बेइज्जती झेलनी पड़े। पानीदार 5% लोग भी आगे अपनी बात को कहने के पूर्व फैक्ट चेक करने लगें, तो इतने फाउंटेन हेड बन्द हो जाएंगे।
बेइज़्ज़ती के साथ विषय से सम्बंधित सत्य जानकारी अवश्य दें। यह सहायक सेवा है। मगर उनकी बेइज्जती , प्रथम और अनिवार्य मानव सेवा है। इसके साथ..
भारत माता की सबसे बड़ी सेवा है।
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(एक भक्त को गरियाने के बाद ताजी लिखी पोस्ट)
डिस्क्लेमर- मियां भाई डेयरिंग न करें। अमां 1857 में सब क्रेडिट ले लिए। इधर हम लोगो को लक्ष्मीबाई बनने दिया जाए।

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