सुशांत सिंह राजपूत की मौत का तमाशा बना दिया गया है. कंगना रनौत इसे पेट्रोल बनाकर माइलेज ले रही हैं?


दिलीप खान 
सुशांत सिंह राजपूत की मौत का तमाशा बना दिया गया है. कंगना रनौत इसे पेट्रोल बनाकर माइलेज ले रही है. ‘इनसाइडर-आउटसाइडर’ की बहस मिसगाइडेड होकर सही संदर्भ से कटकर तू-तू, मैं-मैं में तब्दील हो चुकी है. पूरे मामले को NDTV पर दिए गए इंटरव्यू में अनुराग कश्यप ने सही परिप्रेक्ष्य में रखा-बोला है.
सुशांत सिंह राजपूत मुझे एक औसत लेकिन प्रतिभाशाली अभिनेता लगते रहे. उन्होंने ऊंचाइयां भी देखीं और बहुत मुमकिन है कि किसी के प्रभाव तले उनका करियर नीचे भी गया होगा. लेकिन, कंगना रनौत का पूरा रवैया डिप्रेशन और सुसाइड को ट्रिवियलाइज़ करने जैसा हो गया है. 
क्वीन की सफलता के बाद बाद कंगना रनौत ख़ुद कैसी हो गईं? जब वह स्टार बन गई, उसके बाद उसका व्यवहार कैसा रहा? कंगना ने मणिकर्णिका में ज़बर्दस्ती निर्देशक में भी अपना नाम लिखवा दिया.
और तो और, फ़ेसबुक पर कुछ शरलॉक होम्स निकल आए हैं. एक ने लिखा- उफ़्फ़! देखिए, लेटे हुए सुशांत की उंगली हिल रही है. वीडियो में फलाने सेकेंड पर जाकर देखिए. दूसरे ने लिखा- सही दीदी, सही भैया. बाक़ी किसी को उंगली हिलती नज़र नहीं आई. किसी की मौत/आत्महत्या/हत्या पर नागरिकों की बारीक नज़र अच्छी चीज़ है, लेकिन उसे नकली स्कूप की तरह पेश करना माइलेज लेना है. सनसनी बेचना है. 
जिसने कभी क्राइम सीन को एनालाइज़ करने के तौर-तरीक़ों के बारे में किताबों में भी नहीं पढ़ा, वे सब फॉरेंसिक एक्सपर्ट हो गए. सुशांत की मौत पर कई लोगों ने सुचिंतित, सारगर्भित, संवेदनशील और व्यापक नज़रिए के साथ लिखा. मैंने ऐसा लिखने वालों को कभी सनसनी बेचने का प्रयास करते नहीं देखा. कई ‘सुशांत फैंस’ उन सबको चुनौती देने के अंदाज़ में ख़ारिज़ करते नज़र आ रहे हैं जो ‘सीबीआई जांच की मुहिम’ में मुखर नहीं है. ग़ज़ब दौर है!

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