बैटमैन, स्पाइडर मैन, एंटमैन, आयरन मैन, ये मैंन, वो मैन, सुपरमैंन - इनमें एक बेसिक फर्क है, क्या कभी महसूस किया आपने?


मनीष सिंह 
बैटमैन, स्पाइडर मैन, एंटमैन, आयरन मैन, ये मैंन, वो मैन, सुपरमैंन - इनमें एक बेसिक फर्क है, क्या कभी महसूस किया आपने?? बैटमैन, ब्रूस वायने है। स्पाइडरमैन, पीटर पार्कर है। आयरनमैन, टोनी स्टार्क है। ऐंटमैन, स्कॉट लेंग है, सुपरमैन क्लार्क केंट है। अरे हां शक्तिमान, गंगाधर है। अंग्रेजी में अल्टरईगो, या हिंदी में समझें तो एक व्यक्ति के दो रूप। एक ही व्यक्ति है, दो रूप बदलता है। जरूरत के अनुसार, सुविधा के अनुसार। पहचान बताने को, पहचान छुपाने को।
जब वे मोहब्बत करते हैं, ब्रूस, पीटर औऱ एंथनी हैं। जब हंसते है, रोते हैं, इंसान होते है..  इंसान बनना चाहते है। लबादा नही ओढ़ते। लबादा ओढ़ते हैं, युध्द लड़ने को। जी हां, जब सुपर शक्तियों का उद्गोष करना हो, वह चमकीला नकाब, विशिष्ट पोशाक, पैंट के ऊपर चड्डी और कंधों पर फहराता पर्दा.., कैमरे का एंगल टांगों से, जो उसका विस्तार वास्तविकता से ज्यादा दिखाए।
यह उसकी इमेज है, जो उसने सोच समझकर बनाई है, दुश्मन को डराने, उसकी हिम्मत तोड़ने को। खुद सोचिये, जीन्स टीशर्ट में बैटमैन खुद आ जाये तो दुश्मन भला क्यों डरेगा। नही मगर काली नकाब और फहराता पर्दा, वह समझ जाएगा- बाप रे, बैटमैन आ गया। भागो..
इमेज इसी काम आती है। पोशाक इसी काम आती है। आधी जीत सिर्फ पोशाक दे देती है। पूरा डर, पूरी लोकप्रियता, सिर्फ पोशाक दे देती है। बैटमैन पोशाक के बगैर कुछ नही। मगर वह पोशाक उतारता भी है। वह जानता है, कि पोशाक को मिली लोकप्रियता, उसे  मिली मोहब्बत नही, पोशाक की है। मां, पत्नी, प्रेमिका, बीवी, बेटे का मोहब्बत भरा किस अपने माथे पर वह अपने हिस्से चाहता है। वह पोशाक निकाल फेंकता है।
और जिंदगी को बाहों में भरता है।
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तो जिसे मोहब्बत नसीब न हो, लबादा पहने सोता है, जागता है, जीता है। लबादा सुरक्षा है। लबादे में ही जीवन है। लबादा है, तो भय है। जिसे मोहब्बत की सुरक्षा न मिली, भय के रास्ते सुरक्षा तलाशता है। यह पहला लेसन, अब दूसरा..
बात बेसिक फर्क की थी, समझिये। ब्रूस,पीटर,एंथनी, स्कॉट, सुबह सोकर उठते है, ब्रूस, पीटर, एंथनी और स्कॉट होते हैं। उन्हें बैटमैन, स्पाइडरमैन,आयरनमैन, एंटमैन बनना है, सूट पहनकर। उनकी शक्तियां सूट में हैं। सूट के बगैर वो कुछ नही। सूट के बगैर पिट जाते है, मार खाते है, अपमानित होते है। आपकी और मेरी तरह, वो इंसान है जो मोहब्बत भी पाता है, अपमानित भी होता है।
लेकिन सुपरमैन, बॉर्न सुपरमैन है। सोकर उठे तो सुपरमैन होता है। उसकी शक्तियां भीतर हैं, उसे लबादे की जरूरत नही। सूट की जरूरत नहीं। वह लबादा ओढ़ता है, क्लार्क बनने को। शक्तिमान लबादा ओढ़ता है, गंगाधर बनने को। एक आम इंसान, जो बेवकूफ है, हास्यास्पद है, हारता है, हंसता है, रोता है, मोहब्बत करता है, गलतियां करता है।
दूसरा लेसन हुआ। तीसरा .. 
वो तस्वीर में हैं, और आप समझदार 😀
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आह, भक्त तो क्यूट है। बेचारे उलझ जाएंगे। तो उनके लिए स्वदेशी क्लू- " बन्दर की तरह व्यवहार करने से आप हनुमानजी नही हो जाते"।
जय जय श्रीराम!!!

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