अमेरिका के राष्ट्रपति लिंडन जॉनसन इंदिरा गाँधी से पूछते हैं- ‘क्या आप मेरे साथ डांस करेंगी?’ जानिए इंदिरा गाँधी ने क्या कहा...


दिलीप मिश्रा 
भारत की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी सिल्क की साड़ी में बेहद खूबसूरत लग रहीं थी. साल था 1968 जब अमेरिका में व्हाइट हाउस में चल रहे एक कार्यक्रम में इंदिरा गांधी शिरक़त कर रहीं थी. अचानक अमेरिका के राष्ट्रपति लिंडन जॉनसन इंदिरा के पास आते हैं और शालीनता से पूछते हैं- ‘क्या आप मेरे साथ डांस करेंगी?’
इंदिरा मुस्कुराते हुए जवाब देती हैं-‘माफ कीजिये, मेरे देशवासी मेरा आपके साथ डांस करना बिल्कुल पसंद नहीं करेंगे.’
लिंडन जॉनसन के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति बने रिचर्ड निक्सन. निक्सन की इंदिरा गांधी से कभी नहीं बनी. दोनों के बीच रिश्ते इतने खराब थे कि निक्सन ने एक बार इंदिरा को बूढ़ी चुड़ैल तक कह दिया था. निक्सन भारतीयों को नापसंद करते थे लेकिन पाकिस्तान से उन्हें प्रेम था. वहां के तानाशाही शासक याहया खान से उन्हें भावुकता वाला प्यार था. निक्सन मानते थे कि पाकिस्तान के लोग बेवकूफ़ ज़रूर होते हैं लेकिन सीधी बात करते हैं जबकि हिंदुस्तान के लोग पेचीदा किस्म के होते हैं.
इंदिरा गांधी और निक्सन के तल्ख़ रिश्तों का अंदाजा उनकी पहली मुलाक़ात से ही लग जाता है.राष्ट्रपति बनने से पहले निक्सन दिल्ली आये और उन्होंने इंदिरा से मुलाकात की. दोनों की यह पहली मुलाक़ात इतनी फ़ीकी थी कि इंदिरा गांधी कुछ ही देर में बोर हो गईं और निक्सन के साथ आये भारतीय राजदूत से निक्सन के सामने ही हिन्दी में पूछ लिया -“मुझे कब तक इस आदमी को झेलना है?”
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फिर आया साल 1971, वो दौर जब पूर्वी पाकिस्तान में वहां की हुकूमत के खिलाफ़ विद्रोह चरम पर था और भारत सरकार विद्रोहियों को मदद कर रही थी. मुक्तिवाहिनी के 20 हज़ार लड़ाकों को भारतीय सेना प्रशिक्षण दे रही थी.
निक्सन को पूर्वी पाकिस्तान में भारत का दख़ल बिल्कुल नहीं भा रहा था. निक्सन का स्पष्ट रुख़ था कि किसी भी हालत में वो हिंदुस्तान को पाकिस्तान का विखंडन नहीं करने देंगे. जुलाई 1971 में निक्सन के कहने पर उनके सुरक्षा सलाहकार हेनरी किसिंजर इंदिरा गांधी से मिलने दिल्ली आये. किसिंजर भी अपने राष्ट्रपति की तरह इंदिरा से खार खाते थे.उन्होंने इंदिरा के लिए ‘Bitch’ और भारतीयों के लिए ‘Bastard’ जैसे घटिया शब्दों का इस्तेमाल किया था. किसिंजर की भारत यात्रा का मकसद पूर्वी पाकिस्तान में भारत की दखलंदाजी का विरोध करना था. किसिंजर ने इंदिरा गांधी के सामने राष्ट्रपति निक्सन की नाराज़गी के बारे में बताया. एक तरह से उन्होंने इंदिरा को धमकी दी कि अगर वो पूर्वी पाकिस्तान के मामले में आगे बढ़ती हैं तो यह उनके लिए घातक होगा. इंदिरा गांधी ने किसिंजर को बड़े संयम से सुना लेकिन उन्हें करना वही था जो उन्होंने अपने मन में ठान रखा था.
इंदिरा गांधी अमेरिका के रुख से पहले से ही वाकिफ़ थी इसलिए अपनी स्थिति को मजबूत करने के लिए उन्होंने दूसरे रास्ते चुने. सबसे पहले अपने विदेश मंत्री स्वर्ण सिंह को सोवियत संघ भेजा फिर बाद में खुद भी गईं और सोवियत संघ का विश्वास और समर्थन हासिल किया. इंदिरा जानती थीं कि अमेरिका जैसी महाशक्ति से दुश्मनी मोल तभी ली जा सकती है जब एक दूसरी महाशक्ति उनके साथ हो.
अमेरिकी राष्ट्रपति से ख़राब रिश्तों के बावजूद,बांग्लादेश पर फाइनल काउंट डाउन से पहले नवंबर 1971 में इंदिरा ने अमेरिका की यात्रा की. इस यात्रा के दौरान एक कार्यक्रम में इंदिरा गांधी ने निक्सन को पूर्वी पाकिस्तान की समस्या को नज़रंदाज़ करने पर ख़ूब खरी-खोटी सुनाई. निक्सन को यह इतना अपमानजनक लगा कि अगले दिन जब इंदिरा से मिलने उनका समय तय था तो वो जानबूझकर देर से आये. इंदिरा गांधी को निक्सन से मिलने के लिए काफी देर तक इंतज़ार करना पड़ा.
इंदिरा गांधी को इससे ज्यादा फ़र्क नहीं पड़ा. वो पूर्वी पाकिस्तान के मसले पर बात करने आयी थीं. उन्हें निक्सन से जो कहना था, वो कह दिया था. इंदिरा का यह अमेरिका दौरा इतना तल्ख़ी भरा था कि जब-जब वो निक्सन से मिलती थी, निक्सन का मुँह देखने लायक होता था. निक्सन अंदर तक जल रहे थे. निक्सन ने धमकी भरे अंदाज़ में भारत को पाकिस्तान की पूर्वी सीमा पर किसी भी तरह की सैन्य कार्यवाई न करने के लिए चेता दिया था.
इंदिरा गांधी अमेरिका की धमकी के आगे झुकने के लिये तैयार नहीं थी. दिसम्बर का महीना था. जनरल सैम मानेकशॉ की अगुवाई वाली भारतीय सेना पूर्वी पाकिस्तान की सीमा पर पहुंच गई. पाकिस्तान ने तत्काल अमेरिका से मदद मांगी. अमेरिका के बम-वर्षकों का बेड़ा बंगाल की खाड़ी तक पहुंच गया उसने सोचा कि इससे भारत डर जाएगा और अपने कदम पीछे हटा लेगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ.
भारत ने पाकिस्तान को पूर्वी मोर्चे पर ऐतिहासिक मात दी. 16 दिसम्बर 1971 को पाकिस्तान के जनरल नियाज़ी ने अपने 93000 सैनिकों के साथ भारतीय सेना के पूर्वी जोन के जनरल जगजीत सिंह अरोड़ा के सामने आत्मसमर्पण पत्र साइन कर दिया. अंततः अमेरिका की तमाम कोशिशों के बावज़ूद भारतीय सेना ने पूर्वी पाकिस्तान को पश्चिमी पाकिस्तान से अलग कर नया देश बांग्लादेश बना दिया.
इस पूरे प्रकरण के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन आग बबूला हो गए. निक्सन की पूरी सहानुभूति पाकिस्तान के साथ थी. निक्सन ने किसिंजर से कहा-“हमने उस धूर्त और दुष्ट महिला को चेतावनी दी थी, फिर भी उसने ऐसा किया.”.लेकिन निक्सन अब कुछ नहीं कर सकते थे.
उधर इस लड़ाई के बाद पाकिस्तान में भी मातम का माहौल था.राष्ट्रपति याहया खान इसलिए भी ज्यादा मायूस थे क्योंकि उन्हें अमेरिका और चीन दोनों महाशक्तियों का समर्थन हासिल था फिर भी उनकी सेना की ऐतिहासिक हार हुई.
भारतीय सेना के चीफ मानेकशॉ और पाकिस्तान के सैनिक तानाशाह याहया खान भारत-पाक बंटवारे से पहले भारतीय सेना में एक साथ सेवा दे रहे थे. 1971 की लड़ाई के बाद मानेकशॉ ने एक घटना का ज़िक्र करके पाकिस्तान के घाव पर नमक छिड़क दिया. मानेकशॉ ने कहा- “जब मैं और याहया खान एक साथ थे तब उसने मुझ से मेरी बाइक 1000 रुपये में खरीदी लेकिन उसके पैसे कभी नहीं चुकाए लेकिन अब उसने मेरी बाइक के पैसे के बदले आधा देश हमें दे दिया है.’

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