CM की 25 करोड़ वृक्षारोपण की महत्वाकांक्षी योजना ने तहसील क्षेत्र के उमरपुर गांव में तोड़ा दम।। Raebareli news ।।

वन विभाग के कर्मियों की मिलीभगत से लगभग 500 बीघे जमीन पर भू माफियाओं ने किया कब्जा
रातो रात हरियाली पर आरा या तो जेसीबी चलाकर भू माफियाओं ने लगवाया धान
शिवाजीकांत अवस्थी
महराजगंज/रायबरेली: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा धरती को हरा-भरा बनाए रखने के लिए शुरू की गई 25 करोड़ वृक्षारोपण की महत्वाकांक्षी योजना ने तहसील क्षेत्र के उमरपुर गांव में दम तोड़ दिया है। क्योंकि रखवाले ही भक्षक बन गए हैं। यहां रातों-रात वन कर्मियों की मिलीभगत से भू माफियाओं में लगभग 500 बीघे वन विभाग की जमीन पर लगे हुए पेड़ों को या तो जेसीबी मशीनों से उठवा कर फेंक दिया गया या फिर पेड़ों पर आरा और कुल्हाड़ी चली। सुबह गांव के लोग जब उठे तो देखा कि, जिन खेतों में वन विभाग के पेड़ों की हरियाली शोभा बढ़ा रही थी, उन खेतों में कहीं ट्रैक्टर चल रहे हैं, तो कहीं बैलों के जरिए खेतों की जुताई की जा रही है। मामले में जब लोगों में चर्चा शुरू हुई तो क्षेत्रीय वन रक्षक ने कोतवाली बछरावां में जाकर 10 लोगों के विरुद्ध तहरीर देकर मामले में लीपापोती की कोशिश शुरू कर दी है। जिसका परिणाम यह हुआ कि, निरीह और कमजोर लोगों के नाम तो एफआईआर दर्ज कर दी गई, लेकिन रसूखदार बड़े भू माफियाओं को बचाने की पूरी कोशिश इसी f.i.r. के आड़ में की जा रही है।
     आपको बता दें कि, महराजगंज तहसील क्षेत्र की ग्राम सभा उमरपुर में खाता संख्या 00759 पर वन विभाग का खाता दर्ज है, और 65 भूखंडों में लगभग साढ़े सात सौ बीघे जमीन का स्वामी बन विभाग है। वन विभाग की जमीन पर लगातार हर साल कुछ ना कुछ पेड़ विभाग द्वारा लगवाए जाते हैं। वन विभाग के जिम्मे न केवल वन क्षेत्र का विस्तार करना होता है, बल्कि वन विभाग के पेड़ों की रक्षा का दायित्व भी विभागीय अधिकारियों का होता है।
      ताज्जुब की बात यह है कि, उमरपुर में रातो रात सैकड़ों पेड़, या तो जेसीबी से उखाड़ दिए गए या फिर आरा कुल्हाड़ी चलाकर काट दिए गए और लगभग 500 बीघे जमीन पर धान की फसल लगा दी गई है, जो फसल अब लहलहा रही है।
     जानकारी होने पर तहसील प्रशासन ने अपने लेखपाल को भेजकर जब मौके का सर्वे कराया, तो यह बात सामने आई थी कि, वास्तव में लोगों द्वारा वन विभाग की जमीन पर धान की खेती कराई जा रही है। मामले को तूल पकड़ता देख, वन विभाग के स्थानीय अधिकारियों और कर्मचारियों ने अपनी अपनी पीठ बचाने के लिए बछरावां थाने में विगत 9 तारीख को एक तहरीर दे दी। जिसमें रंगई-बुधई का नाम डालकर 10 लोगों के विरुद्ध यह आरोप लगा दिया, कि इन्होंने वन विभाग की जमीन पर कब्जा कर लिया है।
      लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि, हकीकत कुछ और ही है। इस काम के पीछे भू माफियाओं को सह देकर वन विभाग की जमीन को किराए पर उठाया गया है, और प्रतिवर्ष स्थानीय वन कर्मी लाखों रुपए वसूल कर अपनी जमीनों की रक्षा करने की बजाय उनसे पैसा कमा रहे हैं।
     यह भी जानकारी मिली है कि, काटे गए पेड़ों को रातों-रात उठवा कर या तो लोग गांव को लेकर चले गए, या फिर लकड़ी के ठेकेदारों को बेच दिया गया है। पूरे मामले में एक बड़ी जांच की आवश्यकता है। इस बारे में जानकारी करने पर तहसीलदार विनोद कुमार सिंह ने बताया है कि, मामले के बारे में जानकारी मिलने पर उन्होंने वन विभाग के कर्मचारियों को लेखपाल की मदद लेकर अवैध कब्जे दारों को चिन्हित करके तथा जमीन की निशानदेही करवाकर अवैध कब्जे हटवा कर वन विभाग की जमीन की रक्षा करने का निर्देश दिया गया है।
     मामले में इस संवाददाता ने जब वन विभाग के बीट प्रभारी बृजेश कुमार वर्मा से बात की, तो उन्होंने बताया कि, मामला संज्ञान में आते ही विगत 9 जुलाई 2020 को 10 लोगों के विरुद्ध थाना बछरावां में एफआईआर दर्ज करा दी गई है। वन विभाग की जमीन पर अवैध कब्जेदारों पर सख्त से सख्त विधिक कार्यवाही की जाएगी।

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