दिल्ली दंगा: गोली मारकर नासिर खान की आँख रोशनी छीन लेने वाले दंगाई के खिलाफ अब तक दिल्ली पुलिस ने दर्ज नहीं की FIR


Zakir Ali Tyagi 
नासिर खान घोंडा के रहने वाले है, 24 फरवरी को घेरकर नरेश त्यागी ने आंख में गोली मार हमेशा के लिए आंख की रौशनी छीन ली,दंगे से अब तक नासिर पुलिस अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काट रहे  है,सैकड़ो बार शिकायत भेज चुके है लेकिन अभी तक पुलिस ने नरेश त्यागी के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज नही की है, आरोपी का नाम बताने के बावजूद नरेश को आरोपी नही बनाया है, जबकि नरेश त्यागी में नासिर की सिर्फ़ आंखों की ही नही बल्कि ज़िन्दगी को भी अंधेरे में डाल दिया है,पूरा परिवार अब अंधेरे को ही रौशनी समझ जीता रहेगा।
नासिर खान की बहन मैक्स हॉस्पिटल में भर्ती थी,24 फरवरी को जैसे ही उसको अस्पताल से छुट्टी मिली तो नासिर ने बहन को घर लाने के लिए ओला कैब बुक की,कैब से अपने इलाके में पहुंचा तो देखा कि सभी मुख्य मार्ग बंद है,नासिर को नही पता था कि ये रास्ते क्यो ब्लॉक है,वह छोटे व तंग गलियों से गुजरते हुए कैब से जैसे तैसे अपने घर पहुंच गया,मुहल्ले में पहुंचते ही नासिर को पता चला कि दंगा हो गया है और कई लोगों की जाने भी जा चुकी है इसलिए रास्ते ब्लॉक है व माहौल ख़राब है,कैब का ड्राइवर हिन्दू था,
नासिर ने ड्राइवर से कहा कि अभी माहौल खराब है ऐसे में आपका जाना सही नही रहेगा,जब तक माहौल और रास्ते सही ना हो जाये आप हमारे ही घर रुकिए, ड्राइवर नासिर के घर पर ही रुक गया लेकिन ड्राइवर की पत्नी अपने पति के लिए बेचैन थी,और बार बार अपने पति को कॉल कर रो रही थी, कह रही थी कैसे भी करके वहां से निकलिए,अब ड्राइवर से अपनी पत्नी की रोती हुई आवाज़ सुन वहां रुकना मुश्किल हो गया था,
वह अपने बच्चों के बीच जाना चाहता था, नासिर के लाख रोकने पर भी वह घर जाने की बात कहे जा रहा था,नासिर ने ड्राइवर से कहा कि रुकिए पहले मैं बाहर माहौल देखकर आता हूँ उसके बाद आपको मुहल्ले से बाहर छोड़कर आऊंगा, नासिर ने देखा कि कही कोई भीड़ नही है और वापस अपने घर आया, ड्राइवर से कहा कि चलिए अब शायद सब ठीक है मैं आपको इस इलाके से बाहर छोड़कर आता हूँ।
नासिर ड्राइवर के साथ गाड़ी में बैठ उसे बाहर छोड़ने चला गया, आगे कई रास्ते ब्लॉक मिले लेकिन नासिर स्थानीय होने की वजह से शार्ट रास्ते जानते थे, वह शार्ट रास्ते के ज़रिए कैब ड्राइवर को छोड़ने के लिए गोकुलपुरी मैट्रो स्टेशन पहुंच गया और गाड़ी से उतर ड्राइवर को उसके गन्तव्य की और सकुशल रवाना कर दिया,जब नासिर पैदल अपने घर जाने के लिए वापिस हुआ तो रास्ते मे चलता रहा,एक हिन्दू मित्र नासिर को जानता था
उसकी नज़र नासिर पर पड़ी तो उसने ऐसे माहौल में पैदल सफर करने की वहन पूछी, और अपनी बाइक पर बिठाकर नासिर को उसके घर छोड़ने के लिए चल दिया, लेकिन माहौल खराब था इसलिए उसने घर से लगभ 700-800 मीटर दूर छोड़ वापिस चला गया, अब नासिर फ़िर अकेला पैदल सफ़र करने लगा और पहुंच गया घोंडा,रोड के एक साइड हिन्दू है तो दूसरी तरफ मुसलमान, नासिर आगे पहुंचा तो जय श्री राम के नारे लगाते हुए एक भीड़ मिली और नासिर को रोक लिया,
नासिर के साथ मारपीट करनी शुरू कर दी, अपनी जान बचाने के तमाम हवाले दिए लेकिन काम ना सके, क्योंकि वह भीड़ उस पड़ोसी को भी नही छोड़ रही थी जिसके साथ उनका रोज़ उठना बैठना था,नासिर ने कहा कि मैं तो आपके ही मुहल्ले का हूँ आप मुझे जानते तो हो फ़िर मुझे क्यो मार रहे हो?इतने में उस भीड़ के अंदर से एक दंगाई ने नासिर की आंख में गोली मार दी, और छोड़कर भाग गये, पता नही किसने नासिर को जीटीबी हॉस्पिटल पहुंचाया,आपको मैं यकीन दिला दू जिस वक्त नासिर की आंख में गोली मारी गई भेजा छलनी हो चुका था,
नाक से लेकर सर तक का हिस्सा दो हिस्सों में बट गया था,और उस वक़्त नासिर की किसी ने तस्वीर ली,जो आज मुझे नासिर ने दी भी है, और तस्वीर को मैंने कई बार देखा लेकिन देखने की हिम्मत नही,मैं उस तस्वीर को सोशल मीडिया पर अपलोड नही कर सकता हूँ क्योंकि हम नही चाहते जिस तस्वीर को देखने की हिम्मत हमारे पास नही उस तस्वीर को हम किसी महिला या बच्चे और बुज़ुर्ग को दिखाए, यदि किसी को वह तस्वीर चाहिए तो इनबॉक्स में ले सकता है।
उस तस्वीर को देख ऐसा लगता है कि जिसकी यह तस्वीर है वह एक मिनट भी जीवित नही रहा होगा तुरन्त मौके पर ही मर गया होगा,लेकिन "जाको राको साइया मार सके ना कोई"
डॉक्टरों ने नासिर का तुरन्त ऑपरेशन किया और पलास्टिक सर्जरी के ज़रिए नासिर की जान बचाई,नासिर दिल्ली सरकार में दिल्ली में सरकारी नौकर है जो कि दिल्ली एडमिनिस्ट्रेशन में असिस्टेंट के पद पर नौकरी करते है,अभी तक दिल्ली सरकार की तरफ़ से मात्र 20 हज़ार रुपये का मुआवज़ा मिला है,नासिर की आंख और सरकार की तरफ से मिले थोड़े मुआवजे पर मुझे एक शायर का शेर याद आ रहा है, जो कि लगता है कि यह शेर नासिर के लिए ही लिखा गया था क्योंकि बिल्कुल सटीक बैठता है,शायर ने लिखा था कि:
सियासत इस क़दर अवाम पर एहसान करती है,
पहले आंखे छीन लेती है फिर चश्में दान करती है।।
अपनी आंखों की रौशनी खोकर भी नासिर शांति क़ायम रखने की अपील कर रहे है, हम नासिर और उसकी फैमिली की हिम्मत की सराहना करते है,दिल्ली पुलिस की गुंडागर्दी का आलम देखिए क़ई पीड़ितों ने आरोपियों के ख़िलाफ़ नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई है लेकिन पुलिस ने बेगुनाहों को आरोपी बना जेल भेज दिया है अब पीड़ित अदालतों और पुलिस अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर लगा रहे है लेकिन पुलिस टरका रही है, मेरी मुलाक़ात नासिर से मार्च माह में दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में हुई थी।

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