आपदा अधिनियम तो लागू है पर ना राहत है ना राहत कोष, पीएम केयर्स क्या NDRF का उपयोग कर रहा है?


संजय कुमार सिंह 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 मार्च रात 12 बजे से अगले 21 दिनों (तीन सप्ताह) के लिए देशव्यापी लॉकडाउन की घोषणा की थी। प्रधानमंत्री ने कहा था कि कोविड-19 वायरस को फैलने से रोकने के लिए यह उपाय आवश्यक था। दरअसल, कोविड-19 महामारी को फैलने से रोकने के लिए केंद्र सरकार ने आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत प्राप्त शक्तियों का उपयोग किया और देशव्यापी लॉकडाउन की घोषणा कर दी। आपदा प्रबंध अधिनियम, 2005 की धारा 46 के अनुसार, आपदा राहत के लिए सरकार द्वारा प्राप्त सभी धन एनडीआरएफ में जाएगा। पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 28 मार्च को पीएम केयर्स बना लिया।
सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर मांग की गई कि पीएम केयर्स में इकट्ठा धन को एनडीआरएफ में ट्रांसफर किया जाए। इसके जवाब में सरकार ने कहा कि दोनों अलग हैं और ऐसा नहीं है कि एनडीआरएफ है (या होना चाहिए) इसलिए पीएम केयर्स नहीं हो सकता है। इस संबंध में पहले एनडीआरएफ का नियम पढ़िए, केंद्र सरकार आधिकारिक गजट में अधिसूचना के जरिए एक फंड बना सकती है जिसका नाम नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फंड होगा। इसका उपयोग किसी भी खतरनाक आपदा स्थिति का मुकाबला करने के लिए होगा और इसमें जो राशि डाली (क्रेडिट की) जाएगी वह (क) इस काम के लिए केंद्र सरकार संसद में बनाए कानून के तहत उचित विनियोग के बाद, मुहैया करा सकती है ख) कोई भी ग्रांट जो किसी व्यक्ति या संस्था द्वारा आपदा प्रबंध के लिए दिया जाए।
इसके बाद पीएम केयर्स के प्रचार के रूप में तमाम सरकारी वेबसाइटों पर लंबे समय तक लगे विज्ञापन की इन लाइनों को पढ़िए, पीएम-केयर्स फंड का उद्देश्य कोविड-19 के खिलाफ भारत की लड़ाई को मजबूत करना है। इससे गुणवत्ता पूर्ण इलाज सुनिश्चित होगा, साथ ही कोरोना वायरस को खत्म करने के लिए रिसर्च को बढ़ावा देगा। मैं हर क्षेत्र के लोगों से पी-केयर्स में सहयोग करने की अपील करता हूं। आइए, एकजुट होकर वर्तमान चुनौतियों का समाधान करें और भविष्य को सुरक्षित बनाएं। स्पष्ट है कि सरकार कोरोना नामक आपदा के लिए पीएम केयर्स में दान मांग रही है। पर यह नहीं पता है कि कोरोना नामक आपदा के लिए सरकार ने एनडीआरएफ बनाया या नहीं। अगर नहीं बनाया है तो सीधा सा मतलब है कि जो बनाना था वह नहीं बनाया और जो नहीं बनाना था वह बनाया। अब कानूनन या तकनीकी रूप से यह सही हो या गलत बहुत मायने नहीं रखता है।     
यहां जो बातें स्पष्ट हैं
1. आपदा राहत के लिए एक कोष बनना चाहिए जिसका नाम   एनडीआरएफ होना चाहिए।
2. वह शायद नहीं बना है या बना भी है तो पीएम केयर्स भी बना है जो एनडीआरएफ से अलग बताया जा रहा है पर मौजूदा आपदा यानी कोविड-19 से बचाव के लिए ही पैसे (सरकार की देख-रेख, प्रोत्साहन, अपील और निगरानी में) इकट्ठा कर रहा है।
3. कोरोना से राहत के लिए सरकार ने क्या-क्या किया है वह आम जानकारी में नहीं है और आपदा के लिहाज से विशेष तो बिल्कुल भी नहीं है।
4. पीएम केयर्स से वेंटीलेटर खरीदने की घोषणा हुई पर वेंटीलेटर कहां कितने पहुंचे, कब तक पहुंचेंगे, इस मामले में स्पष्टीकरण नहीं है। दोयम दर्जे के वेंटीलेटर का भी ऑर्डर दिए जाने की चर्चा है लेकिन उसपर संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं है।
5. अनुसंधान के लिए पैसे देना सही और जरूरी हो सकता है लेकिन वह फौरी राहत नहीं है। फौरी राहत के मद में क्या किया गया है उसकी कोई जानकारी नहीं है।
ऐसी हालत में यह जानना दिलचस्प है कि कोरोना से संबंधित अनुसंधान के लिए पीएम केयर्स का पैसा एनडीआरएफ ने जारी किया है। अगर एनडीआरएफ ने जारी किया है तो दोनों अलग कैसे हैं और दोनों एक हैं तो उसे वेंटीलेटर के ऑर्डर के बारे में जानकारी क्यों नहीं है? उल्लेखनीय है कि साकेत गोखले के आरटीआई के जवाब में एनडीआरएफ ने पीएम केयर्स फंड से राज्यों को 999.941 करोड़ रुपए जारी करने की बात तो कही है लेकिन वेंटीलेटर के लिए कोई राशि देना नहीं स्वीकार किया है। यह संभव है कि ऑर्डर दिया गया हो, मशीनें पूरी नहीं आई हों या डिलीवरी में देर होने की वजह से भुगतान रोका गया हो पर ऑर्डर की जानकारी तो एनडीआरएफ को होनी चाहिए अगर वही खर्च कर रहा है तो? पर आरटीआई के जवाब में इससे साफ मना किया गया है। दोनों कैसे संभव है? एक ही की संभावना बनती है और वह है – पीएम केयर्स एनडीआरएफ के संसाधनों, कर्मचारियों और अधिकारों का उपयोग कर रहा है और जो एनडीआरएफ है ही नहीं (धन के बिना कैसा कोष) उसका काम पीएम केयर्स के कुछ पैसे उससे खर्च करवाना दिखाया जाए। पर असल में भाजपा के मंत्रियों का नियंत्रण रहे।
पाठक ध्यान दें
एनडीआरएफ दो हैं – 1) नेशनल डिजास्टर रिलीफ फोर्स और 2) नेशनल डिजास्टर रिलीफ फंड। कहने की जरूरत नहीं है,  फोर्स मतलब बल होता है और फंड मतलब कोष होता है। आपदा के समय खबरों में खास किस्म के कपड़े पहने जो लोग राहत पहुंचाने का काम करते दिखते हैं वे राहत बल के होते है। फंड यानी धन तो सिर्फ खर्च होगा। उसका असर भले न दिखे या दिख जाए।

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