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पुस्तक "द थर्ड वे" के लेखक हैं दत्तोपंत ठेंगड़ी, RSS इसे "हिंदू अर्थशास्त्र" कहता है?

पुस्तक "द थर्ड वे" के लेखक हैं दत्तोपंत ठेंगड़ी, RSS इसे "हिंदू अर्थशास्त्र" कहता है?


Soumitra Roy
ठेंगड़ी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की व्यापार, मजदूर और किसान शाखा, स्वदेशी जागरण मंच, भारतीय मजदूर संघ और भारतीय किसान सभा के संस्थापक थे।
1995 में लिखी अपनी पुस्तक में ठेंगडी ने अर्थव्यवस्था और समाज की "मानवता को बचाने" के लिए एक नए और एकमात्र मॉडल के रूप में "हिंदू दृष्टिकोण" प्रस्तुत किया क्योंकि "साम्यवाद के पतन" और निरंतर "पूंजीवाद के क्षय" ने विश्व में एक "वैचारिक शून्यता" पैदा कर दी थी।
आरएसएस इसे "हिंदू अर्थशास्त्र" कहता है। ठेंगड़ी ने 1990 के दशक के शुरूआत में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की "उदारीकरण" की नीति को "सरासर भोलापन" कहा और देश में "अंतर्राष्ट्रीयतावाद" फैलाने का दोषी ठहराया।
पुस्तक में कहा गया है कि वैश्विक विचारों को अपनाने से भारत ने उन सामाजिक संस्थानों को, जिन पर उसे गर्व है, जैसे "जाति" को नष्ट कर दिया और लोगों के जीवन से धर्म की भूमिका को हटा दिया। ठेंगड़ी के अनुसार जाति का टूटना और समाज में धार्मिक ढांचे की अनुपस्थिति देश को घेरे सभी संकटों के लिए दोषी है।
ठेंगड़ी की पुस्तक शुरू से आखिर तक पढ़ी जाने लायक है क्योंकि मोदी द्वारा आत्मनिर्भर मिशन के तहत शुरू की गई कई योजनाओं को थर्ड वे में बताया गया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आत्मनिर्भर भारत एक सामाजिक-आर्थिक व्यवस्था है, जो ठेंगड़ी द्वारा निर्धारित है।
थर्ड वे के अध्याय एक के भाग चार में, ठेंगड़ी ने औद्योगिक क्षेत्र में सरकार के केवल एक "संरक्षक" के रूप में कार्य करने की वकालत की है। केवल एक संरक्षक के रूप में राज्य की ठेंगड़ी की अवधारणा के अनुरूप 16 मई को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आधिकारिक तौर पर वाणिज्यिक खनन शुरू करने की घोषणा की।
इसका मतलब क्या है?
वाणिज्यिक खनन निजी खनन कंपनियों को बिना किसी सीमा के उसी स्थान से कोयला और खनिज खनन करने और उनका भंडारण करने और उन्हें बिना किसी नियामक निगरानी के मूल्य वसूलने की अनुमति देता है।  इस तरह कोल इंडिया लिमिटेड का एकाधिकार खत्म हो गया। प्राइवेट कंपनियों ने सरकार की वाहवाही की। सीतारमण ने 15 मई को कृषि बाजारों को नियंत्रण मुक्त करने की घोषणा की। सरकार ने सरकारी मंडियों में कृषि उपज बेचने की आवश्यकता को समाप्त कर दिया।
इसका क्या असर हुआ?
इसने कृषि व्यवसाय को निगमों की दया पर छोड़ दिया, क्योंकि नियंत्रण मुक्त व्यवस्था में फसलों का कोई समर्थन मूल्य और मूल्य स्थिरीकरण नहीं होगा। ठेंगड़ी के आदर्श मॉडल के अनुसार, एक औद्योगिक संरचना "आम लोगों द्वारा वित्तपोषित," "उपभोक्ताओं द्वारा उपयोगी," "संसद द्वारा समन्वित," "राज्य द्वारा सहायता प्राप्त" और अंततः "धर्म द्वारा शासित" होनी चाहिए।
2 जून को मोदी ने सीआईआई को संबोधित करते हुए कहा- “हमारे लिए सुधार का मतलब है निर्णय लेने और उन्हें अपने तार्किक निष्कर्ष पर ले जाने की हिम्मत। चाहे वह आईबीसी (इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड) हो, जीएसटी (गुड्स एंड सर्विस टैक्स) हो या फेसलेस इनकम टैक्स की व्यवस्था हो, हम हमेशा से इस प्रणाली में सरकार के हस्तक्षेप को कम करने का प्रयास करते रहे हैं।
24 जून को मोदी की कैबिनेट ने अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में निजी कंपनियों के प्रवेश को भी मंजूरी दी। कोरोना की महामारी ने सरकार को आरएसएस की विचारधारा को एक नई सामाजिक-आर्थिक व्यवस्था में तेजी लाने का मौका दिया है।
ठेंगड़ी की दृष्टि में धर्म द्वारा शासित एक सामाजिक-आर्थिक प्रणाली के तहत, ब्राह्मणों और वैश्यों के लिए व्यवसायों का स्वामित्व सीमित होना चाहिए. इन वर्णों में एक स्वतंत्र शिकायत निवारण प्रणाली होनी चाहिए, जबकि शूद्र, जिनके अपने पारंपरिक व्यापारों को करने और मजदूरों के रूप में काम करने की अपेक्षा की जा​ती थी, उन्हें अपने मालिकों को सुनना चाहिए, जैसा कि धर्म द्वारा निर्धारित है।
ठेंगड़ी के "हिंदू अर्थशास्त्र" के तहत, एक समाज को "उसके अंग के रूप में व्यक्तिगत शरीर के साथ" के रूप में परिभाषित किया गया था. यह परिभाषा ऋग्वेद के पुरुषसूक्त की एक ऋृचा में है, जो जाति व्यवस्था की आज्ञा देती है। आरएसएस और मोदी सरकार की "आत्मनिर्भरता" की सोच का अर्थ एक ऐसा वर्गीकृत समाज है, जिसके सदस्य जन्म के समय बनाई गई सीमाओं को स्वयं लागू रखते हैं।
मोदी का स्किल इंडिया एक उद्योग-प्रासंगिक कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम, जिसे आधिकारिक तौर पर प्रधानमंत्री कौशल योजना कहा जाता है और मुद्रा लोन भी छोटे उद्यमों के लिए "ठेंगडी के दर्शन के कार्यान्वयन भी था। अगर आप दत्तोपंत जी को अच्छी तरह से पढ़ें, तो आप देखेंगे कि मोदीजी की नीतियों और उनके सिद्धांतों में कोई अंतर नहीं है। मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल की नीतियों को गहराई से समझने में "द थर्ड वे" बेहद प्रभावी है।

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