एटा में 10 गौवंशों को बांधकर हजारा नहर में फेंका, दो सगे भाइयों ने गौवंशों की बचाई जान


एटा: हजारा नहर स्थिति भयानक मंजर देखकर रूह कांप जाती है, एक नही दो नहीं 8 गायों के हाथ पैर और आंखें बांधकर उफनती नहर में डाल दिया गया, यह अपराध का एक काला इतिहास है, लेकिन हमारे जिला के दो जांवाज तैराक जुगेंद्र,और रविंद्र, दोनो सगे भाई इस नहर पर दशकों से  इंसानों और जानवरों की जान बचाने का कार्य कर रहे हैं
अपनी जान हथेली पर रखकर समाज सेवा का इस कदर इन दोनों भाईयों पर असर है,कि अपने परिवार और बच्चों की जिम्मेदारियां भी भूल जाते हैं, लेकिन शासन और प्रशासन को इन पर जरा भी तरस नहीं आता है, इतने जोखिम भरे कार्यों में कब इनके साथ कोई हादसा हो जाए ईश्वर ना करें इन गरीबों के परिवार की यही छत हैं,
हमारी दुआएं इनके साथ रहनी चाहिये,  प्रशासन और शासन वाले तो इन्हें प्रसस्त पत्र देकर इनकी भावनाओं से खेलते हैं, फिर क्या आला अधिकारी नेता,समाज सेवी,और क्या उत्तर प्रदेश के मुखिया गायों के मसीहा योगी जी भी इनको प्रसस्त पत्र देने में पीछे नहीं है,हम जल्द ही प्रसस्त पत्रों की गड्डियां भी आप सबतक---- लेकिन आज यह भी कहना होगा कि मैं खुदके कार्यों के लिये, एटा प्रशासन के पास कभी नहीं गई
पर इन दोनों तैराक भाईयों को लेकर जिलाधिकारी सुखलाल भारती के सामने उपस्थित जरूर---- इनकी रोजी रोटी की मांग करने गई  लेकिन, उस बक्त भी जिलाधिकारी जी ने साफ,साफ बोल दिया था कि इनके लायक सरकार पर कोई  स्कीम नहीं है,मै नगर पालिका से बात करूंगा लेकिन कई महीने गुजर जाने के बाद भी कोई मदद नहीं मिली है आखिर कब तक कभी-कभी यह दोनों भाई भी अपने इस कार्य से घृणा करते हैं तब जब अपने परिवार और बच्चों के फर्ज इनकी गरीबी मे इनसे सवाल करते है।
लेखिका, पत्रकार, दीप्ति चौहान।

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