अभी कुछ भी क्लीयर नहीं है कि चीन की मोबाइल कंपनी वीवो की टाइटल स्पॉन्सरशिप रहेगी या नहीं ?


गिरीश मालवीय 
 अभी इस पर सस्पेंस बना हुआ है......... एक न्यूज़ एजेंसी कुछ बोल रही है दुसरी कुछ और ही बोल रही है.... आज  शाम आई पहली मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि वीवो खुद ही स्पॉन्सरशिप छोड़ देगी। इसके बाद न्यूज एजेंसी आईएएनएस ने बीसीसीआई के सूत्रों के हवाले से खबर दी कि स्थिति में कोई बदलाव नहीं है। यानी वीवो की टाइटल स्पॉन्सरशिप बनी रहेगी। हालांकि, 10 मिनट बाद एक और न्यूज एजेंसी पीटीआई ने कहा कि वीवाे एक साल के लिए हट सकती है। बाद में नया कॉन्ट्रैक्ट हो सकता है।
लेकिन एक बात याद रखिए सिर्फ वीवो को हटाने से कुछ नहीं होगा  चीनी कम्पनियो की स्पांसर की जा रही जर्सी भारतीय खिलाड़ी कैसे पहन रहे है ? इस जर्सी पर 20 भारतीय सैनिको का खून लगा है
टीम इंडिया की मौजूदा जर्सी स्पॉन्सर बायजू में भी चीनी कंपनी टेनसेंट की हिस्सेदारी है वीवो के अलावा मोबाइल पेमेंट सर्विस पेटीएम की भी आईपीएल की स्पॉन्सरशिप डील का हिस्सा है। इस कंपनी में भी चीन की कंपनी अलीबाबा ने निवेश किया है। पेटीएम में अलीबाबा की हिस्सेदारी 37.15 फीसदी है। इसके अलावा चीन की वीडियो गेम कंपनी टेनसेंट का स्वीगी और ड्रीम-11 में 5.27 फीसदी की हिस्सेदारी है। यह सभी चीनी कंपनियां बीसीसीआई की स्पॉन्सर हैं।  ड्रीम-11 और स्वीगी जैसी  कंपनियों में चीन का सीधा निवेश है।..........
हटाना है तो सभी को हटाइये ! कम से कम भारत आईपीएल के अंदर तो आत्मनिर्भर बन जाए पहले ? बड़ी बड़ी बाते तो मोदी रोज ही करते है। ..... अब कुछ कर के दिखाने का टाइम आ रहा है तो पीछे हट रहे है।

Post a Comment

0 Comments