रोजाना 20 हजार से ज्यादा ट्रेनें चलाने वाला रेलवे अब सिर्फ 230 विशेष ट्रेनें चला रहा है?


गिरीश मालवीय 
रोजाना 20 हजार से ज्यादा ट्रेनें चलाने वाला रेलवे सिर्फ 230 विशेष ट्रेनें चला रहा है और न्यूज़ चैनल बकवास कर रहे हैं कि हमारी इकनॉमी रिवाइव कर गयी है..... अरे झूठ परोसने मे कभी शर्म आएगी कि नही इनको कभी ? बीते पांच महीनों से  रेलवे की रेगुलर ट्रेनों की सर्विस बन्द है जो 166 सालों से कभी बन्द नही हुई थी
लॉकडाउन से पहले तक इन ट्रेनों से रोज करीब ढाई करोड़ लोग सफर करते रहे हैं. केवल मुंबई की लोकल ट्रेनों से ही रोज 80 लाख लोग आते-जाते हैं....…. लाखों मजदूर एक शहर से दूसरे शहर जाने के लिए इसी साधन का इस्तेमाल करते हैं, आज अगर यूपी बिहार का मजदूर वापस काम पर लौटना चाहे तो कैसे लौटेगा ?
25 जून को रेलवे बोर्ड ने सभी नियमित मेल, एक्सप्रेस और यात्री ट्रेन सेवाओं के साथ उपनगरीय ट्रेनें 12 अगस्त तक के लिए रद्द किया था, 11 अगस्त तक कोई खबर नही आई अब इस तरह की खबर आई रही है कि इस तारीख को 30 सितंबर तक के लिए बढ़ाया जा रहा है पर यह ऑफिशियल सूचना नही है
एक बात ठीक से समझ लीजिए अगर रेलवे नही चल रहा तो समझिए देश मे कुछ नही चल रहा ........एक 'ऑस्ट्रेलिया' को रोज़ ढोती है भारतीय रेल,........इंजनों का यह विशाल बेड़ा क़रीब पांच लाख माल ढोने वाले डिब्बों और 60,000 से अधिक यात्री कोचों को 1 लाख 15 हज़ार किलोमीटर लंबे ट्रैक पर खींचते हैं.
यह विशाल सरकारी कंपनी ‘राज्य के अंदर एक राज्य जैसा’ है. रेलवे के अपने स्कूल, अस्पताल और पुलिस बल है. इसमें कुल 13 लाख कर्मचारी काम करते हैं और इस लिहाज से यह दुनिया की सातवां सबसे ज़्यादा रोज़गार देने वाली कंपनी है.
इसके अलावा रेलवे स्टेशन के आसपास सैकड़ों तरह के रोजी रोजगार रेल संचालन पर ही निर्भर है, लाखो परिवारों की आमदनी ओर करोड़ों की रोजी रोटी इसी से चलती है अगर रेलवे बन्द है तो आप देश की इकनॉमी में सुधार आएगा इसकी कल्पना भी नही कर सकते............

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