अगर आप मुर्दा हैं, तो ये पोस्ट आपके लिए नहीं है...


मयंक सक्सेना 
ये वो ही टीवी चैनल है, जिसकी महिला कर्मचारी को किसी अनजान व्यक्ति ने रात को घर लौटते समय गोली मार दी थी...चैनल ने नाइट शिफ्ट लगाई थी और आजतक नहीं पता कि कैसे बिना श्रम आयुक्त की जानकारी के नाइट शिफ्ट लगाई जाती है...
इसी चैनल का संवाददाता, व्यापमं कवर करते हुए, संदिग्ध परिस्थितियों में जान गंवाता है और ये चैनल चुप्पी साध लेता है...
ये चैनल सवाल नहीं करता कि डिजिटल इंडिया में रफाल की फाइल कैसे गायब हो गई...क्यों वो डिजिटल फॉर्म में नहीं थी...
ये वो पत्रकारिता है, जो उनसे सवाल नहीं करती...जिन से सवाल करने हैं...ये वो पत्रकारिता है, जो आपको इस तरह के टीवी शोज़ के जाल में उलझा कर रखती है...क्योंकि वो मानते हैं कि आप ऐसे ही हैं...कूड़ाख़ोर...
वे स्त्रीद्वेष का कूड़ा फेंकते हैं और आप चट कर जाते हैं...बिना ये सोचे कि जो माहौल इस तरह से शोज़ और ख़बरों से बनता है - एक दिन उसके लपेटे में आपकी अपनी बेटियां भी आएंगी..
होना ये चाहिए था कि इस तरह के शोज़ के नाम देखते ही आप में से कई लोग थाने जाकर, इन चैनल्स के ख़िलाफ़ एफआईआर कराते...कई लोग...अलग-अलग शहरों में...
होना ये था कि आप सोचते कि कैसे बिहार के चुनावों में भाजपा-जेडीयू को फ़ायदा पहुंचाने के लिए टीवी चैनल्स किस कदर नीचता पर उतारू हैं...
पर एफआईआर होगी...उस पत्रकार पर, जो वाराणसी में गरीबों की तक़लीफ़ दिखाएगा...जो यूपी में एनकाउंटर्स पर सवाल उठाएगा...जो बताएगा कि कोरोना का इलाज नहीं हो रहा...
और आप मरे हुए लोगों...टीवी पर इस तरह के शो देखते रहेंगे...
एक दिन आप सबके घर की बच्चियों के साथ ऐसे ही ड्रामा होने लगेगा...फिर शोर मचाइएगा...अदालत जाइएगा...
और तब भी हम जैसे ही लोग, आपके साथ खड़े होंगे.ये नहीं...
आप मुर्दा हैं, तो ये पोस्ट आपके लिए नहीं थी...

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