कोरोना वायरस के संक्रमण की थ्योरी ही उलट गयी है?


गिरीश मालवीय 
तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद के सीवर के पानी में कोरोना वायरस के अंश मिले हैं. यह दावा हैदराबाद में मौजूद सेंटर फ़ॉर मॉलिक्यूलर बायोलॉजी (सीसीएमबी) की हालिया रिपोर्ट में किया गया है.
मैंने हमेशा ही लिखा है कि जिस हिसाब से वैज्ञानिक कोरोना वायरस का संक्रमण फैलाव  बता रहे है उसके हिसाब से तो कोरोना वायरस अब तक विश्व में सर्वव्यापी हो गया होगा, इसके हवा के जरिए फैलने की बात तो आप मान ही रहे है  वैसे जब ये तंजानिया के पपीते में मिल रहा है जब यह फ्रोजन चिकन में मिल रहा है है जब ये बिल्ली में ऊदबिलाव में मिल रहा है जब ये तेलंगाना के सीवर के पानी में मिल रहा है तब तो यह कही भी मौजूद हो सकता है
लेकिन अब WHO एक नई थ्योरी ले कर आया है कि ये इनमे जो वायरस के जो अंश पाए गए हैं वो संक्रामक नहीं हैं...... दरअसल उनका कहना ये है कि हमारे पास अभी तक कोई सुबूत नहीं है कि इन सब जगहों में मिलने से कोरोना वायरस मनुष्यो को संक्रमित कर सकता है। ..दरअसल WHO कोरोना के मामले में शुरू से ही  झूठ बोल रहा है
क्या आप जानते है कि स्पेन के प्रतिष्ठित बार्सिलोना विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं को 12 मार्च, 2019 को इकट्ठा किए गए सीवर के पानी के नमूने में कोरोना वायरस मिला था
विश्वविद्यालय की ओर से  जारी बयान में बताया गया था  कि दुनिया के किसी भी कोने में कोविड-19 के किसी मरीज के सामने आने से बहुत पहले यह वायरस वहां पर मौजूद था। ऑनलाइन प्लेटफार्म मेडआरक्सिव पर इस शोध अध्ययन का प्रकाशन हुआ है।
बार्सिलोना महानगर क्षेत्र में सीवर के पानी का प्रबंध करने वाली संस्था के साथ मिलकर विश्वविद्यालय ने यह शोध किया था। इस अध्ययन की फिलहाल समीक्षा नहीं की गई है। बयान में बताया गया था  कि कोविड-19 सांस से संबंधित रोग है। लेकिन शोधकर्ताओं ने यह सिद्ध किया है कि सीवर के पानी में आने वाले मलमूत्र में भारी मात्रा में इस वायरस के जीनोम मौजूद थे।
अब क्या कहेंगे आप ?

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