रवीश की रिपोर्ट: सुशांत सिंह का कवरेज और मीडिया


रवीश कुमार 
अवसाद और आत्महत्या के कवरेज को लेकर हमने काफ़ी कुछ सीखा और बदला। शायद उसी के कारण सुशांत सिंह की मौत की घटना के कवरेज में संवेदनशीलता बरती और प्रयास किया कि यह घटना दूसरे के अवसाद का कारण न बनें।
हमें पता था कि हमारा प्रयास असफल होगा और मीडिया नहीं करेगा जो श्री देवी की मौत की घटना से लेकर तमाम मौक़ों पर कर चुका है। ट्विटर पर रोज़ देखता हूँ जो लोग समझ सकते हैं वे भी हर रोज़ मीडिया के पतन की गहराई नाम रहे होते हैं।
बता रहे होते हैं कि आज की ये गिरावट पिछली सभी गिरावटों से अधिक है। इस फ़र्क़ के सहारे वे पिछली गिरावट या पिछले पतन को थोड़ा श्रेष्ठ बता जाते हैं। सुशांत सिंह का मामला कवरेज की अभद्रता के कई मोड़ ले चुका था। ग़लत का समंदर इतना बड़ा है कि सही समझ कर किया गया हमारा कार्यक्रम ही हास्यास्पद लगने लगा है।
शायद हम लोग किसी और समाज और दौर में रह रहे हैं जहां इंसान कभी इंसान थे। आज नहीं हैं। लगता है कि अब खुद भी दोबारा इस तरह से कवरेज नहीं कर पाएँगे। व्यर्थता का समंदर बहुत विशाल हो चुका है उसमें तर्क का एक बूँद कोई फ़र्क़ नहीं डाल पाएगा।


Post a Comment

0 Comments