भक्तों को भक्ति का एक्स्ट्रा डोज देने के लिए ऐसे शूट कराए जाते हैं?


आवेश तिवारी 
मनुष्य भक्ति के प्रयोग पहले अन्य मनुष्यों पर करता है उसके बाद वो जीव जंतुओं को भक्त बनाने की जुगत लगाता है फिर उसे लगता है यह फूल पौधे पत्तियां और प्रकृति भी उसकी भक्त बन जाएं। यह प्रयोग दरअसल आत्मविश्वास के कमजोर होने पर बढ़ते जाते हैं।
दरअसल हुआ क्या होगा? पीआर एजेंसी ने यह प्लान दो तीन दिनों पहले बता दिया  होगा कि यह शूटिंग करनी है। कैमरा टीम को दृश्य समझा दिए गए होंगे, कलाकार को अभिनय समझा दिया गया होगा। फिर इस शूटिंग को अंजाम दिया गया होगा।
कुछ दिनों पहले आपने सरकार के साथ कबूतरों को देखा होगा। आज मोर थे। कल मुमकिन है शेर हो। मेरी वन्य जीव विशेषज्ञ मित्र रक्षिता पांडे कहती हैं कि शूटिंग में कई पालतू जीव उपलब्ध कराए जाते हैं जिनमे मोर और कबूतर भी है यह अपने मास्टर के कहे के हिसाब से ऐक्ट भी करते हैं।
इस बात को मानने में कोई दो राय नही है कि भक्तों को भक्ति का एक्स्ट्रा डोज देने के लिए ऐसे शूट कराए जाते हैं। भक्त ऐसे दृश्य देखकर भाव विह्वल होते हैं कुछ रोते हैं कुछ ग़ैरभक्तों को गाली देते हैं।बिहार चुनाव से पूर्व ऐसे तमाम तरह के प्रहसन आएंगे। देखते जाइये।

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