पत्‍नी की इच्छा रह गई अधूरी, मौत के 3 साल बाद पति ने इस तरह पत्नी को किया 'जिंदा'!


बेंगलुरू। कहते हैं कि सच्चे प्यार में बहुत ताकत होती है। अगर कोई एक बार किसी से सच्चा प्यार करता है, तो वह उससे कभी भी दूर नहीं हो सकता। किसी न किसी रूप में उसके न होने के बावजूद भी वह उससे जुड़ा ही रहता है। सदियों पहले अपनी बेगम मुमताज की याद में मुगल बादशाह शाहजहां ने ताजमहल बनवाया था जो आज भी दुनिया के सात आश्‍चर्यों में गिना जाता है। शायद इसी से प्रेरण ली कर्नाटक के उद्योगपति श्रीनिवास गुप्‍ता ने। उन्‍होंने ताजमहल तो नहीं बनवाया लेकिन कुछ ऐसा किया कि एक सड़क हादसे में गुजरी उनकी पत्‍नी कुछ पलों के लिए फिर से 'जिंदा' हो गईं।
हुआ यह था कि साल 2017 में कोप्पल में रहने वाले एक उद्योगपति श्रीनिवास अपनी पत्‍नी और दोनों बेटियों के साथ कार से कहीं जा रहे थे। इसी दौरान उनकी कार का एक ट्रक से एक्सिडेंट हो गया जिसमें बाकी तो सही सलामत रहे लेकिन उनकी पत्‍नी माधवी की मौत हो गई। इस घटना से पूरा परिवार टूट गया। इससे उबरने के लिए श्रीनिवास ने माधवी की याद में एक घर बनाने का फैसला किया।
माधवी चाहती थी की वो अपना घर बनवाये और गृह प्रवेश पर सबको बुलाये, लेकिन हादसे ने उसको छीन लिया और इच्छा अधूरी रह गई। लेकिन श्रीनिवास गुप्ता ने अपनी पत्नी की इच्छा को मरने नहीं दिया। उन्होंने घर तो बनाया लेकिन गृह प्रवेश के लिए पत्नी मौजूद नहीं थी जो सभी का स्वागत करती। इस कमी को पूरा करने के लिए वह इसमें माधवी की एक ऐसी आदमकद मूर्ति बनवाना चाहते थे जो कि एकदम असली लगे। उन्‍होंने बहुत से कलाकारों से संपर्क किया लेकिन कामयाबी नहीं मिली।
इसके बाद मशहूर आर्किटेक्‍ट रंगनान्नवर ने उनका यह सपना पूरा किया। उन्‍होंने श्रीनिवासन की मुलाकात कलाकार श्रीधर मूर्ति से करवाई और श्रीधर ने सिलकॉन वैक्‍स की हूबहू माधवी जैसी मूर्ति बना दी। एक बार तो खुद उन्‍हें भरोसा नहीं हुआ। इसमें पूरा एक साल लग गया।
उद्योगपति गुप्ता ने कहा, 'स्टैच्यू बनाने वाले आर्टिस्ट ने सुझाव दिया कि वैक्स के बजाए सिलिकॉन का स्टैच्यू बनाया जाना चाहिए। चूंकि हम लोग कोप्पल के रहने वाले हैं जोकि काफी गर्म जगह है। वैक्स को ठंडा रखने के लिए हर वक्त एसी नहीं चलाया जा सकता है। उनके सुझाव की वजह से ही हमने सिलिकॉन का स्टैच्यू तैयार करवाया।'
इसके बाद 8 अगस्‍त को जब उनके नए मकान का गृह प्रवेश था तो श्रीनिवास की दोनों बेटियों ने माधवी को मूर्ति को उनकी फेवरिट गुलाबी साड़ी और गहनों से सजा दिया। इसके बाद मूर्ति को सोफे पर बिठाकर खुद श्रीनिवास भी बगल में बैठ गए। 
जब श्रीनिवास के नए मकान का गृह प्रवेश हुआ तो उनके साथ साथ माधवी ने भी मेहमानों का स्वागत किया। गुलाबी साड़ी और गहनों से सजी  माधवी को देख लोग हैरान रह गए, पास जाकर समझ आया कि यह जीवित महिला नहीं बल्कि मूर्ति है। पल भर के लिए एक अनहोनी से बिछड़ा हुआ परिवार फिर पूरा हो गया। 
पत्नी का सिलिकॉन स्टैच्यू गृह प्रवेश के दौरान लगवाने के मामले पर श्रीनिवास गुप्ता ने कहा कि पत्नी को फिर से घर में रखना काफी सुखद एहसास है। यह उनका सपनों का घर था। इस स्टैच्यू को बनाने के लिए आर्टिस्ट ने सालभर का समय लिया। यह स्टैच्यू सिलिकॉन से बनाया गया है, जिससे यह काफी लंबे समय तक चल सकता है।'

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