भारत में कोरोना की ऑक्सफ़ोर्ड वैक्सीन के दूसरे और तीसरे ह्यूमन क्लीनिकल ट्रायल को मंज़ूरी मिल गई है लेकिन...


गिरीश मालवीय 
भारत में कोरोना की ऑक्सफ़ोर्ड वैक्सीन के दूसरे और तीसरे ह्यूमन क्लीनिकल ट्रायल को मंज़ूरी मिल गई है. लेकिन असली स्टोरी यह नही है असली स्टोरी आप नीचे पढ़ लीजिए..........
यह वैक्सीन एस्ट्राजेनेका कम्पनी ने बनाई है जो ब्रिटिश स्वीडिश कम्पनी है .....एस्ट्राजेनेका दुनिया की सबसे बड़ी फार्मा कंपनी बन सकती है, क्योंकि यह अपनी प्रतिद्वंद्वी औषधि कंपनी गिलियड के साथ विलय पर विचार कर रही है। ऐसी खबर भी आई है
आश्चर्यजनक रूप से जनवरी में ही ऑक्‍सफर्ड वैक्‍सीन ग्रुप और जेनर इंस्‍टीट्यूट ने इस वैक्‍सीन पर रिसर्च करना शुरू कर दिया था, अब यह वैक्‍सीन फेज 3 में हैं। इसे आम सर्दी-जुकाम देने वाले वायरस से बनाया गया है। यह शरीर में स्‍पाइक प्रोटीन के प्रति इम्‍यून रेस्‍पांस पैदा करेगी और इन्‍फेक्‍शन को फैलने से रोकेगी
अब आप असली खबर पढ़िए...... पीटर एंड्रयूज जो आयरिश विज्ञान पत्रकार और लेखक है लंदन में रहते हैं उन्होंने एक सनसनीखेज खुलासा किया है कि वैक्सीन निर्माता एस्ट्राज़ेनेका के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पुष्टि की है कि उनकी कंपनी ऐसे कानूनी प्रावधान मनवाने के लिए जोर दे रही है जिसके कोविड वैक्सीन के कारण होने वाले किसी भी संभावित दुष्प्रभाव से बचा जा सके यानी प्रभावित होने वालों को कोई कानूनी सहारा नहीं मिलेगा।
यानी एस्ट्राजेनेका वैक्सीन तो बनाएगी लेकिन इसकी गारण्टी नही लेगी,
यदि उस वेक्सीन को लगवाने वाले के शरीर मे वेक्सीन से कोई गंभीर दुष्प्रभाव पुहंचा तो एस्ट्राजेनेका उसके लिए जिम्मेदार नही होगी  कंपनी उन लोगों के मुकदमों के खिलाफ पूरी तरह से संरक्षित है जो इस वैक्सीन का इंजेक्शन लगाते हैं और अपने शरीर मे नकारात्मक प्रभाव का अनुभव करते हैं, भले ही वे कितने गंभीर या लंबे समय तक स्थायी हों।
एस्ट्राजेनेका के शेयर इस वक्त टॉप पर चल रहे हैं आज यह ब्रिटेन की सबसे बड़ी फार्मा कम्पनी बन गयी है उन्होंने पिछले छह महीनों में सिर्फ 12.6 बिलियन डॉलर का बंपर मुनाफा दर्ज किया है। लेकिन इसकी स्वस्थ बैलेंस शीट के बावजूद,  फर्म के वकीलों ने मांग की है कि जिन देशों के साथ एस्ट्राजेनेका वैक्सीन  देने का अनुबंध किया गया है, उन देशों के लिए क्षतिपूर्ति की ऐसी गारंटी के बिना, उन्हें दवा का उत्पादन करने के लिए प्रोत्साहित नहीं किया जाएगा।
ऐसी वकीलों द्वारा ऐसे कहते वक्त अधिकांश देशों की वेक्सीन मांग का हवाला दिया है .....सभी देशों में यह राष्ट्रहित के नाम पर किया जाएगा, अब यह राष्ट्रीय हित है या सरकारी हित ये आप ही तय कीजिए क्योकि एस्ट्राजेनेका के वकील यह कानूनी इम्युनिटी सिर्फ ट्रायल के लिए नही माँग रहे हैं वह देशो से कानूनी सरंक्षण की मांग वेक्सीन को लगवाने के बाद की परिस्थितियों के लिए माँग रहे हैं और भारत जैसे देश उसकी यह माँग आसानी से मानने वाले हैं.......
वैसे भी मोदी सरकार मानती है कि नागरिक के शरीर पर अधिकार राज्य का है नागरिकों का नही.......

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