अगर बड़ा बनना है तो बड़े उस्तादों की तलाश में रहो और उनकी इज़्ज़त करते रहो


लानत हो उस शख्स पर और बे शुमार हो कि जिस के उस्ताद रास्ते मे मिल जाएं और वो रुक कर उनको सलाम न करे उनका अदब न करे और उनकी दुआ न ले वो लोग बहुत खुशनसीब होते हैं जिन्हें अपने उस्तादों की दिल से दुआ मिलती है शागिर्द कितना भी इल्म में ओहदे में बड़ा हो जाये लेकिन उस्ताद की नज़र में हमेशा बच्चा लड़का ही रहता है
एक शफीक उस्ताद हमेशा अपने शागिर्द के सिर पर हाथ रख कर ही दुआ देगा जाति धर्म छोटा बड़ा इसमें कोई मानी नहीं रखता उस्ताद का दिल हमेशा बड़ा होना चाहिए एक अच्छे उस्ताद को भी चाहिए कि अपने अच्छे शागिर्दों की कद्र करे उनके साथ खुलूस के साथ पेश आये अच्छे नेक उस्ताद हमेशा अपने शागिर्दों के दिल मे रहते है और अच्छा बा ज़र्फ़ शागिर्द अपने उस्ताद का हमेशा ज़िक्र करता रहता है उनके हक़ में दुआ करता रहता है उनकी सलामती के लिए अच्छा शागिर्द वो होता है जो अपने उस्ताद के साथ साथ उनकी औलाद से भी इज़्ज़त के साथ पेश आता है यानी उस्ताद की निस्बत से उनकी औलाद से भी मुहब्बत करता है
उस्ताद का मर्तबा अपने माँ बाप के बराबर होता है उस्ताद अपने शागिर्द का रूहानी बाप होता है दुनियाँ में ज़िन्दगी बसर करने का सलीक़ा और आखरत की फिक्र उस्ताद से ही मिलती है यह पूरी दुनियां जो चमक दमक रही है या अच्छी बुरी ज़िन्दगी बसर कर रही है यह सब उस्तादों का कमाल है चराग से चराग जलता चला आ रहा है सीना बा सीना आंख बा आंख हाथ बा हाथ एक दूसरे से एक दूसरे में मुन्तक़िल होता हुआ दुनियाँ में फैलता रहा है जिस को किसी भी फील्ड का जितना बड़ा उस्ताद मिल गया वो शख्स अपनी ज़िंदगी मे उतना ही बड़ा आदमी बन गया और उतनी ही बड़ी इज़्ज़त शोहरत दौलत उसने पाई
बड़े उस्तादों के शागिर्द ही बड़े होकर बड़े उस्ताद बनते हैं और वो उस्ताद जो आपको कोई इल्म निशुल्क दे बिना पैसे के दे उस इल्म का और उस उस्ताद का बदल पूरी उम्र भर कुछ हो ही नहीं सकता यह इतनी बड़ी बात है इसकी कीमत पूरी उम्र भर अदा नहीं हो सकती क्यों कि जब तुम्हारे पास पैसा नहीं था तब उन्होंने आपको निशुल्क फ्री ऑफ कॉस्ट तालीम दी थी यदि इसके बदले में सोने चांदी के पहाड़ भी दिए जाएं तो उसका बदल नहीं हो सकते इसलिए अपने उस्तादों का हमेशा दिल से सम्मान इज़्ज़त करते रहो ज़िन्दगी में खूब फलते फूलते रहोगे अगर जिस शागिर्द ने अपने उस्ताद की इज़्ज़त नहीं की दुनियां में उसे इज़्ज़त नहीं मिल सकती
यदि किसी शागिर्द के इल्म में कोई कमी है तो इसका मतलब है उसके उस्ताद ने ठीक से उसे गाइड नहीं किया या उसका उस्ताद जानता नहीं था उस्ताद का सिखाया हुआ एक एक लफ्ज़ अनमोल है उसकी कोई कीमत नहीं मेरे पास आज जो कुछ भी है वो सब मेरे उस्तादों का है यदि मेरी ज़िंदगी मे मेरे इंग्लिश के उस्ताद डॉ हरपाल यादव जी साहब नहीं आये होते तो आज जो मैं हूँ वो हरगिज़ नहीं होता उनकी बार बार होसला अफ़ज़ाई ने उनकी शिक्षा ने मुझे फर्श से अर्श पर पहुंचा दिया जो टेलेंट मेरे अंदर छुपा हुआ था उन्होंने उसे कुरेद कुरेद कर बाहर निकाला
मुझे बहुत इज़्ज़त दी उनकी इज़्ज़त और होसला अफ़ज़ाई ने मुझे तालिब इल्मी के दौरान ही इज़्ज़त बाला बड़ा आदमी बना दिया था और इसी के साथ साथ उस्ताद जनाब शमीम मुंशी जी साहब मेरे दर्जा एक के उस्ताद जलालुद्दीन साहब मेरे बहुत ही मोहतरम अति सम्मानीय काबिल ए एहतराम जनाब गुलफाम सर् साहब मेरे उस्ताद KP सर् साहब फिजिक्स टीचर में इन सभी शख्सियात का हमेशा ममनून ओ मशकूर रहूंगा जिनसे मैने जिन की मोहब्बतें आजभी मेरे साथ रहती हैं मै वो खुश नसीब शागिर्द हूँ अगर मै रास्ते मे अपने उस्तादों को रुक कर सलाम करूँ तो वो भी रुक कर ही मुझे वक़्त देते हैं यानी रुकते है और हम दोनों एक दूसरे की सलामती के लिए दुआ करते हैं तो मुझे अपने उस्ताद पर और खुद पर फख्र होता है
जैसा आप बोयेंगे वैसा आप काटेंगे यह ज़िन्दगी का फलसफा है कुदरत Nature किसी का उधर नहीं रखती लेकर जियादा देती है कम नहीं देती इसलिए अगर ज़्यादा की खुआइश है तो ज़्यादा से ज़्यादा बांट ते रहो और जितना दोगे उससे ज़्यादा हमेशा मिलता रहेगा ज़िन्दगी में बांटने का कारोबार भी करते रहो जो चीज़ बांटोगे वो बढ़ती ही रहेगी
तो हां उस्ताद की अज़मत मुहब्बत शिफ़क़्क़त लफ़्ज़ों में बयान नहीं हो सकती अगर बड़ा बनना है तो बड़े उस्तादों की तलाश में रहो और उनकी इज़्ज़त करते रहो एक दिन जरूर काबिल ए एहतराम बन जायोगे यह आर्टिकल समर्पित है मेरे सभी काबिल ए अहतराम उस्तादों के

लेखक: मुहम्मद अली ताज

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