ऐसे दमन से अच्छा है कि भाजपा एक कानून बना दे कि जो भाजपाई नहीं है, उन सबको मृत्युदंड दिया जाएगा?


कृष्णकांत 
तमाम कार्यकर्ताओं को जेल में ठूंसने के बाद लगता है अब डीयू के प्रोफेसर अपूर्वानंद को फंसाने की तैयारी है. सोमवार को उनसे पुलिस ने दिल्ली दंगे के संबंध में पांच घंटे पूछताछ की और उनका फोन जब्त कर लिया. अपूर्वानंद जैसे सुलझे, शांत और विचारशील व्यक्ति को दंगे में घसीटने का मकसद वही है, जो सुधा भारद्वाज जैसी महिला को जेल में ठूंसने का था.
पहले कई कार्यकर्ताओं, अध्यापकों और पत्रकारों को नक्सली बताकर जेल में डाला गया. अब उन्हें लग गया है कि समाज चुप है, कुछ भी किया जा सकता है. वे चाहते हैं कि जनता का ऐसा दमन कर दिया जाए कि कोई विरोध में मुंह न खोले.
दिल्ली में दंगा कराया गया. टेलीविजन पर दुनिया के सामने दंगा भड़काया गया. दिल्ली को जलने दिया गया. थानों के बगल आगजनी होती रही. दिल्ली हाईकोर्ट ने फटकार लगाई और दंगाइयों को पकड़ने का आदेश दिया तो तुरंत जज का तबादला कर दिया गया और उनके आदेश पर कार्रवाई नहीं हुई.
दंगा शांत होने के बाद से ही उन लोगों को खोजा जा रहा है जो सीएए के विरोध में थे. जिन्होंने दंगा भड़काया, उनका कहीं नाम तक नहीं है.
डीयू, जामिया के छात्रों और अध्यापकों को निशाने पर इसलिए लिया जा रहा है ताकि जो लोग हर बात पर विरोध करते हैं, वे डरें. वे सभी लोग जो विरोध की आवाज बनकर खड़े थे, उन्हें एक एक निपटाया जा रहा है.
चाहे प्रशांत भूषण हों, गौतम नवलखा हों, सुधा भारद्वाज हों, वरवरा राव हों या अपूर्वानंद. विरोध की अगुवाई करने वाले कुचल दिए जाएंगे तो जनता विरोधी की हिम्मत नहीं करेगी.
ऐसे दमन से अच्छा है कि भाजपा एक कानून बना दे कि जो भाजपाई नहीं है, जो भाजपाई हिंसा और घृणा में शामिल नहीं है, सबको मृत्युदंड दिया जाएगा.

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