आर्थिक विशेषज्ञों की चिंता कोविड की दूसरी लहर को लेकर है, अगर ये हुआ तो सारे गणित फेल हो जाएंगे


सौमित्र रॉय 
कल से लेकर 15 अगस्त तक पूरे देश को फील गुड कराने के लिए सारे जतन किये जायेंगे। कल प्रधानमंत्री करदाताओं के लिए डिजिटल प्लेटफार्म का उद्घाटन करेंगे। इसमें उद्योगों के लिए कुछ ऐलान हो सकते हैं, जिनसे यह दिखाने की कोशिश होगी कि इकॉनमी पटरी पर आ रही है।
लेकिन असलियत इसके उलट है। पिछले हफ़्ते परचेसिंग मैनेजर्स सर्वे आया है। मीडिया ने इसे नहीं देखा। इसका इंडेक्स अर्थव्यवस्था को गहराई में उतरकर देखता है। इसका इंडेक्स कहता है कि जुलाई में यह 46 अंक पर रहा, जो जून के  47.2 अंक से कम है। इंडेक्स के 50 से कम होने का मतलब है इकॉनमी धीमी है और पहले से ज़्यादा खराब हो रही है।
क्यों? क्योंकि उद्योगों और कारोबारियों को नए आर्डर नहीं मिल रहे। कहीं नकदी का संकट है तो कहीं मज़दूरों का या लोन का। अलग-अलग स्थानों पर क्लाइंट्स लॉक डाउन में फंसे हैं। जब तक लॉक डाउन पूरा नहीं खुल जाता, हालत नहीं सुधरेगी।
सेवा क्षेत्र के इंडेक्स की बात करें तो यह 34.2 पर है, जो जून के 33.7 से थोड़ा बढ़ा है। PPAC का डेटा कहता है कि पेट्रोल की खपत में जून से भी 3.5% की गिरावट आई है। SBI के रिसर्च विंग का मोबिलिटी डेटा बताता है कि लोग किराने और दवाओं पर ही खर्च कर रहे हैं।
SBI का ही बिज़नेस Disruption इंडेक्स कहता है कि बिजली, RTO का राजस्व, मोबिलिटी और कामगारों की प्रतिभागिता की दर जुलाई में भी वही हैं, जो जून में थीं। आपको याद होगा कि पिछले दिनों RBI गवर्नर ने ये तो कहा कि इस साल जीडीपी गिरेगी, लेकिन कितना इस पर चुप हो गए।
17 जुलाई तक बैंक लोन 0.8% गिरा है। मोदी सरकार के खजाने में जुलाई के GST 87422 करोड़ आया है। AIIMS के निदेशक रणदीप गुलेरिया ने कहा है कि भारत में कोविड की रफ़्तार अभी भी चरम पर नहीं पहुंची है।
आर्थिक विशेषज्ञों की चिंता कोविड की दूसरी लहर को लेकर है। अगर ये हुआ तो सारे गणित फेल हो जाएंगे। फिलहाल तो आप सुशांत केस, करीना के दूसरे बच्चे, दंगे-फसाद जैसी खबरों को झेलिये। फिर पाकिस्तान और चीन है ही। सरकारात्मक रहें, पॉजिटिव नहीं। झूठ को हज़म करने का कलेजा रखिये।

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