सुशांत सिंह राजपूत की मौत पर खेला जा रहा फर्जी खेल है?


आवेश तिवारी 
सुशांत सिंह राजपूत सुसाइड केस में महाराष्ट्र सरकार को एफबीआई या स्कॉटलैंड यार्ड को जांच सौंप देनी चाहिए। बिहार चुनाव से पहले मुझे नही लगता इस सुसाइड की फाइल भाजपा बन्द होने देगी। इस मामले ने जैसे जोर पकड़ा है उससे यह तो पता लग गया कि बिहार का यह हाल क्यों हैं।
आज मुजफ्फरपुर के एक मित्र ने बताया कि बिहारी क्षत्रिय युवक अब  अपने नाम के आगे राजपूत लिखने लगे हैं, न जाने कहाँ सुशांत के नाम पर मंदिर बनाने की भी तैयारी है। फ़िल्म सिटी के निर्माण की घोषणा पहले ही हो चुकी है।
मैं सोच रहा था कि ऐसे मुद्दों पर राजनीति करने के मूल में क्या है? जवाब बेहद मासूम मिला। यह सच्चाई है कि हिंदुस्तान का एक बड़ा तबका सिनेमा में अपने दुख तकलीफों का इलाज ढूंढता है। दक्षिण में तो अभिनेता देवता है लेकिन पूरब में वो उसके लिए आईकॉन है जिसे स्क्रीन पर देखकर उसकी तकलीफें कम होती है।
बीजेपी जानती है कि कोरोना की वजह से अगड़ी जाति के सवर्णों को गहरे घाव मिले है। यही सवर्ण नीतीश की जड़ों को उखाड़ सकता है इसलिए सुशांत का नाम लेकर इस वर्ग के युवा को दिग्भ्रमित करने की कोशिश की जा रही है। यूपी बिहार का सवर्ण बेवकूफी में सबसे आगे है। उसके लिए रोजी रोटी के सवाल से बड़ा मामला सुशांत की मौत पर खेला जा रहा फर्जी खेल है।

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