कांग्रेसी संघियों ने मोदी जी को देश की सम्पूर्ण सत्ता चाँदी की तश्तरी में परोसी है...


Shakeeb Rahman
आज जो लोग कहते है कि सारी संवैधानिक सस्थाएं धराशायी हो गई हैं तो कभी आप ने सोंचा कि सिर्फ़ 6 वर्षो में कोई व्यक्ति कैसे देश की सम्पूर्ण सत्ता अपने हाथों में केंद्रित कर लिया ?
सत्ता क्या है ?
सत्ता शक्ति का संस्थानात्मक एवं विधिक रूप है  साधारण शब्दो में कहें तो सत्ता निर्णय लेने की वह शक्ति है जो दूसरों के कार्यो को प्रभावित करती है....
देश की सम्पूर्ण सत्ता का मतलब सिर्फ सरकार नही होता है ....बल्कि वो देश की सम्पूर्ण सत्ता का एक भाग भर है .....अगर राजनीतिक और प्रशासनिक सत्ता की बात की जाए तो उसमें सरकार , न्यायपालिका , सभी संवैधानिक संस्थाएं - यथा - चुनाव आयोग , CAG , UPSC, वित्त आयोग , गैर संवैधानिक निकाय -  यथा -  CBI , नीति आयोग ( जो पहले योजना आयोग था ), केंद्रीय सतर्कता आयोग , केंद्रीय सूचना आयोग ,नौकरशाही , अन्य
प्रशासनिक व्यवस्था , पुलिस , शैक्षणिक संस्थान और मीडिया....तथा कई अन्य संगठन आते हैं..
क्या इन सत्ता प्रतिष्ठानो में ऊपर से नीचे तक सब के सब मोदी जी से डर गए या खरीद लिए गए .....नही ऐसा बिलकुल नहीं है.....70 वर्षो की मेहनत है....
तो फिर इनका भगवाकरण कैसे हुआ ?
इसे समझने के लिए गोलवलकर की कूटनीति को समझना होगा.....भले ही आरएसएस की स्थापना हेडगेवार ने की थी लेकिन इसके नीति निर्माता गोलवरकर ही थें.... इन्हें पता था कि कांग्रेस कई विचारधारा का संगम है इसलिए इसके माध्यम से इन्हें देश की सम्पूर्ण सत्ता कभी नहीं मिलेगी....
इसलिए गोलवलकर ने संघियो को सभी जगह फैल जाने का मूलमंत्र दिया.......इसे ऐसे समझिये कि गोलवरकर के दो बेटे थे ...एक को कहा तुम जनसंघ (आज का बीजेपी ) बना लो......दूसरे को कहा तुम कांग्रेस में घुस जाओ......तुम कांग्रेस में रहकर सारे सत्ता प्रतिष्ठानों में संघियो को बैठाओ...और जब तक नागपुर की  पूर्ण बहुमत की सरकार न बन जाए अपने चेहरे पर कांग्रेसी आवरण ओढ़े रखना......अन्दर - अंदर एक दूसरे की मदद करना लेकिन सार्वजनिक मंचो पर एक दूसरे को गरियाते रहना....तब एक ने पूछा...गुरु जी हम तो भाई हैं , एक दूसरे को क्यों गरियाये ?..... तो गुरु जी ने कहा .....ताकि लोगों को ये न पता चल सके कि तुम दोनों भाई हो....
नेहरू जी ने संघी धड़ा पर नियंत्रण रखा ( यही कारण है कि भाजपाई संघी इनका चरित्रहनन करते रहते हैं ) .....1977 तक के काल तक इंदिरा पर भी समाजवादियों का ही प्रभाव था यही कारण है कि वो कई चीजों का राष्ट्रीयकरण करती हैं...
लेकिन कांग्रेस में रहकर कांग्रेसी संघियो ने सत्ता प्रतिष्ठानों में संघियों की राह आसान करते रहें खासकर पुलिस प्रशासन में ( सबसे पहले इसी का भगवाकरण किया गया ).....साथ ही अपने सरकारी दबदबे का इस्तेमाल कर ब्राह्मणवादी विचारधारा को राजनीति और समाज में फैलाने का काम जारी रखा....यही कारण है कि व्यवस्था और समाज का भगवाकरण करने में मोदी जी को दिक्कत नहीं हुई....
उदाहरण....... आज शीर्ष में बैठे अधिकतर न्यायधीशों के जज बनने की शुरुआत कांग्रेस काल मे ही हुई थी....
सत्ता जाने से इंदिरा को कांग्रेसी से संघियो की ताकत का अहसास हो चुका था....1980 में दोबारा आने के बाद ये धड़ा कांग्रेस में सबसे मजबूत हो गया .....जिसके कारण गूँगी गुड़िया से दुर्गा बनी इंदिरा ........संघियो के लिए फिर से गूँगी बन गई.....जिसका लाभ उठाकर मुरादाबाद नरंसहार को अंजाम दिया....और इंदिरा गांधी ने मुँह में दही जमा लिया ....अगर मैं इसे स्वतंत्र भारत का जलियांवाला बाग कांड कहूँ तो कोई भी अतिश्योक्ति नही होगी और इतना ही नही .....इन्ही संघियो के प्रभाव में आकर इंदिरा ने केंद्रीय मंत्री अब्दुलरहमान नश्तर द्वारा कांग्रेस की गलती मान लेने पर उन्हें मंत्री पद से बर्खास्त कर दिया....इसी की अगली कड़ी 1983 में असम में नेली हत्याकांड हुआ...जिसमे बर्बरता की हदें पार हो गई..... जिसके लिए जांच आयोग ने भी पुलिस को ज़िम्मेदार माना...
राजीव तो इन संघियो के सामने नतमस्तक हो गए.....तभी तो 1984 में सिखों के नरसंहार पर राजीव कहते हैं कि जब भी कोइ बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती थोड़ी हिलती है......
व्यवस्था में जड़े जमा चुके इन्ही संघियो पर नकेल कसना भी वीपी सिंह द्वारा मण्डल कार्ड खेलने का एक बहुत बड़ा कारण था....
क्रमवार कांग्रेसी संघियो ने सत्ता प्रतिष्ठानों का संघीकरन किया और आखिर 26 मई 2014 को वो शुभ दिन आ गया जब नागपुर की पूर्ण बहुमत की सरकार बनती है तब व्यवस्था मे बैठे कांग्रेसी संघियो ने अपने तिरंगा के खोल को उतार दिया जिससे उनका भगवा चोला बाहर आ गया....
इस तरह देश की राजनीतिक और प्रशासनिक सत्ता को मोदी जी की करिश्माई सत्ता में परिवर्तित कर दिया गया......मतलब तश्तरी में परोस दिया गया
रही बात समाजवादी कांग्रेसियो की तो ये व्यवस्था मे बहुत कम रह गए थे..... जिन्हें या तो नोटबन्दी के नोट से खरीद लिया गया या जज लोया बन जाने के डर ने समर्पण करा दिया....
अब कांग्रेस में जो कांग्रेसी संघी बचे हैं वे चिल्ला - चिल्ला कर मोदी जी द्वारा देश की सम्पूर्ण सत्ता हतिया लेने की बात तो करेंगे लेकिन इसका कारण नहीं बताएंगे.....
इसे ऐसे समझिए कि बात जब बिल गेट्स की रणनीति की हो तो उसकी परतों को ये माइक्रोस्कोप से दिखाएंगे लेकिन जब बात गोलवरकर की रणनीति की होगी तो ये आपके आँखों पर पर्दा डाल  देंगे......ठीक ही तो है....भला कोई अपने पूर्वनो के पोल खोलता है क्या..!
इसलिए बहुजनों ( एससी , एसटी , ओबीसी और अल्पसख्यकों ) को ये बात समझनी होगी कि कांग्रेसी संघियो के हमवार होकर वे कभी भी आरएसएस से लड़ाई नही  जीत पाएंगे.... बल्कि इसके लिए उन्हें खुद वोकल होना पड़ेगा....क्योंकि कांग्रेसी संघियों की बैसाखी के सहारे आप सत्ता के  ओलंपिक का रेस नहीं जीत पाएँगे....
बाकी ......आप लोगों को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं....

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