आज प्रशांत भूषण के बुलंद हौसले के आगे व्यवस्था का घमंड और सिस्टम को अपने हिसाब से चलाने की तमाम कोशिशें चकनाचूर हो गईं


सौमित्र रॉय 
आज एक व्यक्ति के बुलंद हौसले के आगे तमाम नेतागीरी, व्यवस्था का घमंड और सिस्टम को अपने हिसाब से चलाने की तमाम कोशिशें चकनाचूर हो गईं। वह एक शख्स है प्रशांत भूषण।
भारत में नागरिक अधिकारों और अभिव्यक्ति के लोकतांत्रिक अधिकार की लड़ाई की जब भी बात उठेगी, तो प्रशांत भूषण के खिलाफ अवमानना के मामले को नजीर के रूप में पेश किया जाएगा।
कौन कहता है कि एक अकेला व्यक्ति दमनकारी व्यवस्था को नहीं झुका सकता। भारत के संविधान पर अटल विश्वास, बुलंद हौसले और परिणाम  परवाह किए बगैर जो भी अपने हक के लिए तनकर खड़ा हो जाएगा, जीत उसी की होगी।
हम सभी को प्रशांत भूषण का साथ देना चाहिए। एक व्यक्ति के रूप में नहीं, बल्कि भारत के संविधान में निहित एक समानतामूलक व्यवस्था की स्थापना के लिए उनके संघर्ष को साथ जरूर मिलना चाहिए।
उन्होंने दो-टूक कहा है कि इस संघर्ष में कोर्ट उन्हें जो भी सजा दे, वे न झुकेंगे और न ही सच का दामन छोड़ेंगे। महात्मा गांधी ने कहा था कि मुझे खुद में ढूंढो, गांधी बनो। प्रशांत भूषण ने दिखा दिया कि वर्तमान में देश को सही दिशा में ले जाने का एकमात्र यही रास्ता बचा है।

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