क्या भगवान राम खुद अवतरित होकर भारत को बचाएंगे?

सौमित्र रॉय 
इस साल यानी 2020-21 में सरकार ने 30 लाख 42 हज़ार 230 करोड़ रुपए के व्यय का प्रस्ताव रखा था। कोरोना के कारण ये बजट फेल हो चुका है। लेकिन बजट आवंटन की राशि को ध्यान में रखियेगा।
बजट में विनिवेश, यानी देश की संपत्तियों को बेचकर अधिक अनुमानित राजस्व के कारण प्राप्तियां (शुद्ध उधारियों के अतिरिक्त) 16.3% बढ़कर 22,45,893 करोड़ रुपए होने का अनुमान लगाया गया था। यह अनुमान भी GST की वसूली में लगातार आ रही गिरावट से फेल हो गया है।
अब दो सवाल-
1. साल 2020-21 का भारत का कुल बजट कितने का होगा, अगर इस वित्त वर्ष में सरकार की प्राप्तियां लगभग 17-20% कम हों?
2. आरबीआई ने कहा है कि सितंबर 2020 तक बैंकों का सकल एनपीए अनुपात बढ़कर 9.9 फीसदी हो सकता है। यानी लगभग 15 लाख करोड़। अगले साल मार्च-अप्रैल तक अगर एनपीए कुल लोन का 15% हो जाये तो भारत सरकार के बजट और एनपीए के बीच कोई फ़र्क़ रहेगा?
आप सोच नहीं सकते कि देश आज किस मुकाम पर खड़ा है। यह भी कल्पना से परे है कि देश किस मुकाम की ओर बढ़ रहा है। क्या भगवान राम खुद अवतरित होकर भारत को बचाएंगे?  अगर अभी भी किसी को यकीन है कि मोदी है तो मुमकिन है- तो फिर रामजी उसे सद्बुद्धि दें।

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