आप टीवी क्यों देखते हैं अखबार क्यों पढते हैं?


आवेश तिवारी 
आप टीवी क्यों देखते हैं अखबार क्यों पढते हैं? निस्संदेह पहली वजह खबर दूसरी वजह मनोरंजन होगी। अखबार में मनोरंजन के दायरे सीमित हैं, टीवी में ज्यादा है। लेकिन अब चीजें पूरी तरह से बदल चुकी हैं ।अखबार हो या टीवी अब न तो मनोरंजन है न खबरें हैं।
 अब टीवी और अखबार एक प्लेसिबो मेडिसिन की तरह काम कर रहे हैं जो आपको कुतर्की,क्रूर , अवैज्ञानिक, तर्कहीन, संवेदनहीन और पक्षपाती बनाता है। टीवी से यह ज्यादा हो रहा है क्योंकि टीवी में सुनाने और दिखाने की भी क्षमता है। एंकर आपके इर्द गिर्द ऐसी दुनिया रच देता है कि आप सही गलत का अंतर ही नही भूलते आप करोड़ों रुपये के लेन देन के बाद इस्टेब्लिश किये जा रहे नैरेटिव को सच मान लेते हैं।
एक बात आपने शायद महसूस की या नही डीटीएच यानि सेट टॉप बक्सा अब गुजरे जमाने की चीज होता जा रहा है। लोग न केवल मनोरंजन के नाम पर परोसे जा रहे बकवास बल्कि खबरिया चैनलों से उकता रहे हैं।।अब टीवी केवल भक्त देते हैं। भक्तों के टीवी देखने के पीछे की एक बड़ी वजह है चूंकि उनके पास कोई अपना विचार नही है इसलिये वो उधार के विचार लेने टीवी पर जाते हैं उन्हें वहां पर अपने झूठा राष्ट्रवाद मिलता है। सत्ता के पापों पर पर्देदारी की तकनीक भी यह लोग वहीं से सीखते हैं। सच यह है टीवी मर रहा है,अखबार मर चुके हैं।
अब सवाल उठता है सूचनाओं के लिए विकल्प क्या है? मैं किन्ही भी सूचनाओं के लिए टीवी या अखबार पर निर्भर नही हूँ।मैंने लॉकडाउन से पहले एक स्मार्ट टीवी लिया बाजार में दो ढाई हजार रुपये के अपने टीवी को।स्मार्ट बनाने के विकल्प हैं। मैं खबरों के लिए अब हत्यारे चैनलों पर निर्भर नही हूँ। बेरूत मर बम विस्फोट हुआ मैं अगले ही पल लेबनान का एक चैनल लाईव देख रहा था।
रूस ने वैक्सीन बनाई, कैसे वैक्सीन बनी मैं रूस की गामाले यूनिवर्सिटी से जुड़कर सीधे वहां से वीडियो देख रहा था। हमने पाया स्वतंत्र और बिना नैरेटिव के सूचनाओं को पाने के माध्यम बेहद विशाल है। तकनीक से जुड़िये आप सब खुद एक चलता फिरता टीवी और अखबार है बस सरदाना,चौधरी, अंजना की तरह अपनी विश्वसनीयता मत खोइयेगा।

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