कांगेसी संघियों ने कांग्रेस की दीवारों की ईंटों से बीजेपी का महल बना दिया...


Shakeeb Rahman
इस पर बात करने के लिए थोड़ा इतिहास में जाना होगा.....1925 में ब्राह्मणवादी विचारधारा के पुरोधा केशव राव बलीराम हेडगेवार ने आरएसएस की स्थापना की ......कांग्रेस तब तक इतने बड़े किले में परिवर्तित हो चुकी थी कि हेडगेवार उसको हिला भी नहीं सकते थे....
एक बात गौरतलब है कि कांग्रेस भले एक पार्टी है लेकिन शुरू से ही वो कई विचारधाराओं का संगम रहा है...इसलिए कांग्रेस में  इनकी दाल उस तरह से गल नहीँ रही थीं जैसा कि वे चाहते थें.....वैसे इसी समय ब्राह्मणवादी विचारों को पोषित करने वाली हिन्दू महासभा भी थी ....लेकिन अन्य लोगों को वो जोड़ नहीं पा रही थीं....
तब आरएसएस राजनीति के शतरंज के बिसात पर एक नई चाल चलती है कि जनसंघ नामक अपना एक स्थायी आवास बनाओ ( जो कि बाद में बीजेपी नामक्रम में  परिवर्तित हो गई ) और जब तक ये घर बन नही जाता है...तब तक कांग्रेस में रह कर उसकी जड़े खोदो...
हुआ भी यही.... संघी कांग्रेस में शामिल होकर कांग्रेस के किले की ईंटें ले जाकर आरएसएस (जनसंघ ) को मज़बूत करते रहें यही कारण है कि कुछ लोग कांग्रेस को आरएसएस की जननी तक कह देते हैं....ये कांग्रेस से जोंक की तरह चिपककर उसका खून पीकर आरएसएस को रक्तदान करते रहें...
1980 में मण्डल कमिशन की शिफारिशों को कुँए में डलवाने वाला कांग्रेस का यही धड़ा था....क्योंकि इसमे भूखे पिछडो के लिए कुछ निवाला था जो कि ब्राह्मणवादियों की थाली से जाने वाला था....सोचिए 1980 में इसे लागू न करने देने से पिछडो का कितना नुकसान हुआ...1984 में दिल्ली में सिखों के ख़िलाफ़ तांडव भी इन्ही संघियों ने किया था...
इन पर नेहरू जी का नियंत्रण
इंद्रा पर आकर कमज़ोर हुआ .....और...राजीव तक आते - आते खत्म हो गया.... इसलिए 1987 का हाशिमपुरा नरंसहार और 1989 का भागलपुर दंगा प्रायोजित किया जाता है.....कुछ लोग कहते हैं कि कांग्रेस को मुसलमानों के ख़िलाफ़ दंगा करवाने से उसका खुद का ही नुकसान होगा फिर वो ऐसा क्यों करेगी......क्योंकि ऐसा करवाने वाले समाजवादी कांग्रेसी नहीं बल्कि संघी कांग्रेसी होते थें.....जिनको कांग्रेस को खोखला कर बीजेपी की रीढ़ मज़बूत करना था....यही संघी धड़ा राजीव गांधी से मस्ज़िद का ताला खुलवाता है....
1998 में संघी आवास की इमारत का ढाँचा तो बन गया लेकिन मुकम्मल घर 2014 मे जाकर तैयार हुआ...अब आप कहेंगे....जब संघियों का स्थायी आवास बीजेपी ( आरएसएस ) बन गया है तो सारे संघी कांग्रेस को छोड़कर वहाँ चले क्यों नही जाते हैं...??
पहली बात ...एक घर मे शामिल होने की एक सीमा भी तो होती है....
दूसरी बात ....ये गोलवलकर की संतानें बहुत चालाक होते है...हमेशा अपने लिए एक विकल्प बनाए रखते हैं...
तीसरी बात ...अगर सारे वहाँ चले जाएँगे तो मोदी विरोध के प्लेटफार्म पर बहुजनों का कब्ज़ा हो जाएगा....फिर ये बहुजन एससी , एसटी ,ओबीसी और अल्पसख्यकों के हक़ की बात उठाने लगेंगे....तो इससे ब्राह्मणवाद का नुकसान होगा न....और बीजेपी भी यही चाहती है कि उसके विरोध के प्लेटफार्म पर भी कांग्रेसी संघी ही काबिज रहें....
इसलिए ये मोदी को गरियाते हुए आपको उन्ही मुद्दों में उलझाए रखते हैं जिससे ब्राह्मणवादी हितों का नुकसान न हो तभी तो कोरोना पर ये भले 100 बातें कर देंगे लेकिन न्यायपालिका में आरक्षण ,  मण्डल कमीशन , एससी- एसटी एक्ट 1989 , सच्चर कमेटी, रंगनाथ मिश्रा आयोग, कुंडू कमेटी.......अनुच्छेद 341 जैसे विषयों पर दो शब्द भी खर्च करना ज़रूरी नहीं समझेंगे....क्योंकि ये सारे विषय इनके ब्राह्मणवादी शहद में कड़वाहट डाल देते हैं....

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