सिर्फ़ यूपी पुलिस ही नहीं, सेना पर भी फ़र्ज़ी एनकाउंटर का फ़िर दाग लगा है?


सौमित्र रॉय 
भक्त इस पोस्ट पर मुझे सेना विरोधी ठहरा सकते हैं। सरकार भी मामले को दबाने की पुरजोर कोशिश करेगी, लेकिन सवाल फिर भी खड़ा होगा कि हाथ में बंदूक थमाने से किसी को बेकसूरों की जान लेने की छूट नहीं दी जा सकती।
पिछले महीने की 18 तारीख को सेना ने कश्मीर के शोपियां में जिन तीन आतंकियों का एनकाउंटर किया, वो राजौरी के रहने वाले मजदूर थे। पुलिस के मुताबिक, इस ऑपरेशन का पहला इनपुट सेना को मिला था और सेना ने ही एनकाउंटर शुरू किया।
सेना का कहना है कि ये फेक एनकाउंटर नहीं था और इसकी जांच की जा रही है। 22 दिन बाद 10 अगस्त को सेना ने इस एनकाउंटर की जांच शुरू कर दी है। ये पता करने की कहीं ये एनकाउंटर सच में फेक तो नहीं था।
उन तीन लड़कों के परिवारों ने बाकायदा तस्वीरें जारी की हैं। परिवार ने जो तस्वीरें जारी की हैं, उनमें ये तीनों लड़के एनकाउंटर में मारे गए आतंकियों से काफी मिल रहे हैं। सेना ने ये भी कहा है कि उन तीनों आतंकवादियों की पहचान अब तक नहीं हो पाई है और उनके शव दफन कर दिए गए हैं। फिलहाल जांच जारी है।
अगर डीएनए टेस्ट में एनकाउंटर फ़र्ज़ी निकले तो हम-आप क्या करेंगे? क्या कर सकते हैं? हमारी आंखों में विश्वास की पट्टी थोड़ी और धुंधली पड़ जाएगी। कुछ दिनों में दिखाई देना भी बंद हो जाएगा। शायद हम यह सोचना भी बंद कर दें कि आतंक का हल आतंक नहीं है।

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