शर्मनाक तस्वीर: जूते पुलिस करता नजर आया देश का भावी कर्णधार, बाल मजदूरी रोजगार नहीं अभिशाप है?


गणेश मौर्य
अम्बेडकरनगर: वैसे तो संसद में बाल मजदूरी को लेकर कानून तो बने मगर किस हद तक कानून का पालन सरकार और जिला प्रशासन अधिकारी करवाते हैं आज भी भारत देश गुमनामी की जंजीरों में जकड़ा हुआ है जिन हाथों में पेंसिल खेल खिलौने होने चाहिए आज उन्हीं हाथों में एक  मासूम बच्चा बूट पॉलिश करते नजर आया।
एक दौर था जब 'बचपन मत मुरझाने दो, बच्चों को मुस्कुराने दो' जैसे नारे फिजा में खूब गूंजते थे, लेकिन सच्चाई यह है कि शहर के ढाबे और गैराजों में बचपन सिसक रहा है और मासूमों के सपने टूट रहे हैं। यह विडंबना है कि जिन हाथों में कलम होनी चाहिए उन हाथों में झूठे बरतन, पॉलिस और हथौड़ी है। काम के बोझ तले बचपन लुटा रहे इन मासूमों पर सबकी नजर पड़ जाती है, लेकिन जिला प्रशासन की नहीं पड़ती।
अंबेडकर नगर जिले के पटेल नगर  तिराहा पर स्थित आदर्श जलपान ग्रह पर जूता पालिश करते एक मासूम बच्चा दिखा जिसकी उम्र महज 4 वर्ष थी. दुकान पर दिनभर तमाम लोग आते हैं और वह बड़े शौक से सभी बड़े शौक से चाय भी पीते हैं अधिकतर कोतवाली की पुलिस भी वहां पर बैठते है।लोग उसे कभी प्यार से तो कभी झिड़की देकर छोटू कहते हैं। लेकिन उसका असली नाम क्या है, शायद ही किसी को पता हो।
प्रदेश सरकार के 'ऑपरेशन मुस्कान' की मुस्कुराहट भी शहर में गायब नजर जाती है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद  से सूबे में शुरू 'ऑपरेशन मुस्कान' के तहत अभी तक जिले में किसी तरह की कार्रवाई नहीं हुई।

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