जमात अभी बाकी है !


हिदायत खान 
सबसे पहले बॉम्बे हाईकोर्ट का फरमान सुन लीजिए,उसके बाद आगे बात करते हैं।कोर्ट का कहना है- " मीडिया ने तब्लीग़ी मरकज़  में आएं विदेशियों को लेकर बड़ा प्रोपोगैंडा चलाया और ऐसी तस्वीर बनाई गई कि कोविड-19 वायरस फैलाने के लिए यही लोग ज़िम्मेदार हैं,इन्हें बलि का बकरा बनाया गया "।
अब चलते हैं,पीछे...जब कोरोना की आमद हुई थी और तबग़ीली जमात के मरकज़ से कुछ पाजेटिव निकल गए थे।बस, सब कुछ नेगेटिव कर दिया गया था। ऐसा माहौल बना दिया गया था कि मुल्क में यही कोरोना पैदा कर रहे हैं और साजिश के तहत फैला रहे हैं।
तमाशा-मीडिया चीख़ पड़ा था और व्हाट्सएप मंडी में ग़ज़ब का शोर था।गंदी जबान का इस्तेमाल किया जा रहा था, घटिया लफ्ज़ निकाले जा रहे थे और ना जाने कितनी कहानियां बना दी गई थी। आतंक तक कूद पड़ा था और देखते ही देखते तब्लीग़ी जमात को आतंकी जमात में तब्दील कर दिया गया था। जो विदेश से आए थे,वो भी आतंकी हो गए थे। देशद्रोही तो ख़ैर पहले दिन ही करार दे दिए गए थे।
इस मुहिम में वो भी शामिल हो गए थे, जो समझदार कहलाते हैं या जिनसे उम्मीद की जा सकती है।अब तस्वीर बदल गई है,बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुकदमा खारिज कर दिया है, लताड़ लगाई है और मीडिया को इसके लिए जिम्मेदार बताया है।अदालत जो कह रही है, अपनी जगह है, लेकिन फैसला तो कोरोना भी सुना चुका है। उसने दाढ़ी-तिलक का फ़र्क़ ख़त्म कर दिया है और कमल-पंजे को भी खोल कर रख दिया है।
किसी को नहीं छोड़ा है और अब तो सियासी मजमों से कोरोना मरीज निकल रहे हैं। कई नेता चपेट में आ गए हैं। इसके बाद वो सारी ज़बान खामोश है, जो ज़हर बन गई थी।उनको आगे आना चाहिए, बोलना चाहिए और समझना भी चाहिए। कोई बीमार होना नहीं चाहता है, कोई मरना नहीं चाहता है और कोई मारना भी नही चाहता है,ना ही कोरोना किसी के बस में है।
'जग्गा' बोला- जो 'तमाशा-चैनल' रात दिन सुशांतसिंह राजपूत को इंसाफ दिलाने में लगे हैं, शायद मौलाना साद को भूल गए हैं, अभी तक वो गिरफ़्तार नही हुए हैं और इनकी तरफ़ से 'गिरफ़्तार-करों' वाली आवाज़ भी नही आ रही है।

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